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****पल्लवी अनवेकर*****

 विकास की दूरगामी सोच रखकर काम हों यह सोच राजनीतिक नेता, तथा शेष भारतीय समाज में निर्माण होना अंत्यत जरूरी है। पूर्वोत्तर के विशालहृदयी नागरिक इससे मन: पूर्वक प्रतिसाद देंगे। सबकी कोशिश से, स्वर्ग से सुंदर पूर्वोत्तर को शांत, विकसित और खुशहाल स्थिति में देखना हमारा आज का स्वप्न और कल की वास्ताविकता होनी चाहिए।

   पूर्वोत्तर अर्थात भारत का ऐसा भूभाग जिससे भूटान, चीन, म्यांमार और बांग्लादेश से सीमा सटी हुई है।  ऐसा भूभाग केवल ७० कि.मी. चौडाई के ‘सिलिगुडी नेक’ के द्वारा शेष भारत से जुड़ा है। पूर्वोत्तर भारत जल, जंगल, खनिज, उर्जा साधन इन प्राकृतिक संसाधनों से सम्पन्न प्रदेश है। इन संसाधनों के बल पर जलविद्युत केंन्द्र बनाए जाए तो सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि आसपास के देशों की बिजली की जरूरत भी पूरी की जा सकती है। जंगलों में उत्पन्न होने वाली वनौषधि से संबंधित उद्योग को बढ़ावा मिल सकता है। पूर्वोत्तर राज्यों में मूलभूतसुविधाओं, यातायात के साधनों और प्रशिक्षित मानवीय शक्ति का अभाव है। इसके कारण यहां पर कल कारखाने बड़ी मात्रा में नहीं बनाये जा सकते। पूर्वोत्तर के राज्यों में फैली आपसी लड़ाई के कारण पूर्वोत्तर का विकास नहीं होता। बेरोजगारी के कारण भी आतंकवाद पूर्वोत्तर में पनप रहा है। ये हालात स्वतंत्रता के पश्चात निर्माण हुए हैं।

      २०१४ में नरेंद्र मोदी जी की सरकार सत्ता में आई। पूर्वोत्तर राज्य की विविध घटनाओं और आवश्यकताओं की ओर ध्यान दिया जाने लगा। एकाध बड़ी आंतकवादी घटना घटने पर ही देश का मीडिया पूर्वोत्तर राज्य की ओर देखता था। आज वही मीडिया मोदी सरकार के पूर्वोत्तर राज्य के परिवर्तन के लिए उठाए गए कदम और ध्ययों की ओर देख रहा है। नरेंन्द्र मोदी सरकार ने ‘एक्ट इन पॉलिसी’ का स्वीकार किया है। पूर्वोत्तर राज्य के विकास के संदर्भ में स्वतंत्र मंत्रालय कार्यरत है। मिनिस्ट्री ऑफ डेवलपमेंट ऑफ नॅार्थ ईस्टर्न रीजन इस नाम से कार्यरत स्वतंत्र्य मंत्रालय के सूत्र जिनके हाथ में है, जिन्होंने पूर्वोत्तर राज्य के विकास कार्य को गति दी है वे हैं भारत सरकार के केबिनेट मंत्री  डॉ.जीतेंद्र सिंह। पूर्वोत्तर राज्यों के विकास संदर्भ में डॉ.जीतेंद्र सिंह के साथ वार्तालाप करने का मौका मिला। उससे स्पष्ट हुआ कि पूर्वोत्तर के विकास के लिए मोदी सकार कौन-कौन सी योजनाएं बना रही है।

   पूर्वोत्तर राज्यों के संदर्भ में अपनी भावना को स्पष्ट करते हुए जीतेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत का श्रेष्ठ व सुंदर क्षेत्र है। यह प्रदेश देवी देवताओं के निवास के कारण पवित्र है। यह प्रदेश प्राकृतिक सुंदरता से युक्त तथा अप्सराओं का प्रदेश है। यहां के सुंदर सरोवर, नदियां, पर्वत और यहां के लोग भारत में ही क्या दुनिया में भी असाधारण हैं। प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न प्रदेश है। पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के भूभाग की जनसंख्या पूरे भारतवर्ष की तुलना में ८% है। आतंकवाद और अलगाववाद यहां पर बडी मात्रा में फैला है। स्वतंत्रता के बाद यहां के लोग दिल्ली की पत्थरदिल कांग्रेस सरकार की शासन पध्दति के बलि चढ गए। ऐसे हालात में यहां के लोगों के मन में ऐसी भावनाएं निर्माण हुईं कि भारत के सत्ताधारी उन्हें अपना नहीं समझते। कांग्रेसी नेतृत्व के पास दूर की सोच का अभाव है, उन्होंने अब तक स्वार्थ की राजनीति की है।

   स्वार्थी राजनीति और दूर की सोच के अभाव को स्पष्ट करते हुए वे आगे बताते हैं कि,‘पिछले छह दशकों में, खासकर कांग्रेस के नेतृत्व में यह कमी रही कि वे पूर्वोत्तर मैदानी भूभाग में हुई घुसपैठ पर रोक नहीं लगा सके। स्वतंत्रता के बाद इस संदर्भ में उपाय तुरंत किए जाते तो यह समस्या इतनी बड़ी नहीं होती। इस समस्या का दूरगामी परिणाम न सोचकर कुछ मतों के लाभ के लिए स्वार्थी राजनीति कांग्रेस ने अपनायी थी। समूचा पूर्वोत्तर आज आलगावाद की आग में झुलस रहा है।

        शुरूआत के दिनों में ब्रह्मपुत्र नदी पर पुल बनाने की बात हो या गुवाहाटी में ब्रॉडगेज लाइन की, असम में मिले खनिज तेल की बात हो या गुवाहाटी का विश्वविद्यालय हो, आंदोलन किए बगैर पूर्वोत्तर के पल्ले कुछ नहीं पड़ा। पहाड़ी प्रदेश में महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग और रेल (लोह-मार्ग) बनाने का विचार भी उस सरकार ने कभी नहीं किया। बेरोजगारी पर रोक लगाने हेतु पूर्वोत्तर में विकास कार्यों का होना जरूरी था। दूसरे राज्यों की तुलना में यह विकास नहीं के बराबर है। विविध जातियों में उत्पन्न आयडंटेटी क्रायसिस मिटाने के बदले उनके झगड़ों को हवा दी गई। ‘फूट डालो और राज करो’ जैसी कुटील नीति अपनाई गई। अरुणाचल प्रदेश छोड़कर अन्य कहीं हिंदी का प्रचार भी नहीं किया।

पूर्वोत्तर आज अलगाववाद की आग में झुलसता हुआ क्यों दिखाई देता है  इस प्रश्न के जवाब में डॉ.जीतेंद्र सिंह कहते हैं कि ‘‘पूर्वोत्तर की सामाजिक सांस्कृतिक संस्थाएं, प्रशासनिक तंत्र और राजनीतिक निर्णय तीनों में योग्य समन्वय न होने के कारण किसी भी निर्णय की कार्रवाई पूर्वोत्तर राज्यों में कांग्रेस काल में नहीं हुई।‘‘

        १९९९ से २००४ के कालखंड देश में वाजपेयीजी की  सरकार थी। क्या पूर्वोत्तर राज्य के आज की हालात के लिए अटल सरकार भी जिम्मेदार है? ऐसा प्रति प्रश्न पूछने पर वे मुस्कुराकर कहते है कि, १९९९ में रालोआ सरकार सत्ता में आई। अटल जी के नेतृत्व में सरकार ने पूर्वोत्तर के लिए महत्वपूर्ण योजनाएं बनाई। जनवरी २००० में पूर्वोत्तर विकास के लिए १०,००० करोड़ रुपयों की मदद घोषित की गई थी। इस निधि का इस्तेमाल सुनियोजित ढंग से हो, इसके लिए ‘नॉर्थ इस्टर्न डेवलपमेंट‘ के नाम से मंत्रालय स्थापन किया। इस विशेष कार्य की जिम्मेदारी अरुण शौरी जी को सौपी गई। इन विभागों को कैबिनेट का दर्जा दिया गया था।‘‘

      ‘‘इसके अलावा हर एक विभाग के बजट की१० प्रतिशत रकम पूर्वोत्तर के लिए रखने के निर्देश भी अटल सरकार ने दिए थे। गलत राह अपनाने वाले युवक आंतकवाद छोड़कर फिर से सामान्य जिंंदगी बिताएं इस हेतु से उन्होंने ‘पीस बोनस’ की घोषणा की। पूर्वोत्तर की सरकार, प्रशासन व्यवस्था और आम नागरिक के बीच समन्वय लाने की कोशिश की। अटल सरकार के कालखंड में पूर्वोत्तर को कुल ४८,००० करोड़ रुपये की मदद दी गई। तब पूर्वोत्तर में किसी भी राज्य में भाजपा की सरकार नहीं थी। यह मदद अटलजी का निष्पक्ष व्यवहार और पूर्वोत्तर के प्रति ईमानदारी और सरल दृष्टि दर्शाती है। डॉ जीतेंद्र सिंह इस संबंध में आगे कहते हैं कि २००४ के चुनाव में केंद्र में सत्ता परिवर्तन हुआ तब मनमोहन सिंह जी के नेतृत्व में सरकार बनी। डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में पूर्वोत्तर को निराशा ही हाथ लगीं। डॉ मनमोहन सिंह असम से राज्यसभा में चुनकर आए थे।

प्रधान मंत्री मोदीजी ने लोकसभाचुनावों में देश की जनता को ‘अच्छे दिन’लाने का आश्वासन दिया था। यह स्वप्न पूर्वोत्तर के लिए भी दिखाया गया था। भाजपा सत्ता में आने पर मोदी जी ने पूर्वोत्तर के विकास के लिए कौन से कदम उठाए है? इस प्रश्न के उत्तर में डॉ सिंह कहते हैं कि ‘‘मुझे इस बात का गर्व है कि केंद्र की सत्ता के सूत्र हाथ में लेने के बाद पूर्वोत्तर के हालात में बदलाव आ रहा है। प्रधान मंत्री पद पर आसीन होने पर नरेंद्र मोदी जी ने कई बार यह सूचित किया है कि पूर्वोत्तर राज्य की ओर उनका विशेष ध्यान है। इसका उत्तम उदाहरण है नगालैंड में हर साल होने वाले ‘वॉलीबॉल फेस्टीवल’का आयोजन। आजतक किसी भी प्रधान मंत्री ने इस फेस्टवल की ओर अपना रुख नहीं किया था। इस बार मोदी जी के द्वारा इस फेस्टिवल का उद्घाटन हुआ। असम और मेघालय को जोडने वाले ‘दूध नोई मेंडी पाथार’ नामक १९१७ किमी के रेल मार्ग का शुभारंभ हुआ। पर्यटन उघोग पूर्वोत्तर भारत के लिए प्राणवायु की तरह है। बारह महीने बर्फ से ढंकी पहाड़ों की चोटियां, घने जंगल, एक सींग वाला गेंड़ा, दुर्लभ प्राकृतिक संसाधन, काझीरंगा अभयारण्य, अत्याधिक  वर्षा का प्रदेश चेरापूंजी जैसे अनेक विविध पर्यटन स्थलों को रेल से जोड़ने की इस सरकार की योजना है। डॉ. सिंह ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि पड़ोसी राज्यों से जोड़ने वाली सडकें न होना पूर्वोत्तर की दुखती रग है। सड़कों के बगैर विकास संभव नहीं, विकास न होने के कारण रोजगार नहीं। इस चक्र में राज्य उलझ गए हैं। अब केन्द्र में मोदी सरकार आने के बाद नितिन गडकरी जी ने इन राज्यों का दौरा किया। पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों की राजधानियों को ‘फोर लेन’ राजमार्ग से जोड़ने की बात सोची है। उसी प्रकार पूर्वोत्तर के ८८ जिलों को ‘टू लेन’ रास्तों से जोड़ने का काम शुरू किया है। पूर्वोत्तर भारत के पास जल विघुत निर्माण की क्षमता अत्यधिक है। इस बात को ध्यान में रखकर कुछ ही सालों में वहां ६३,२५७ मेगावॉट बिजली का निर्माण शुरू करने की मोदी सरकार की योजना है। हाल ही में त्रिपुरा में गैस का इस्तेमाल कर ७२६ मेगावॉट विघुत निर्माण करना शुरू किया गया है।     

   

क्रीडा क्षेत्र में पूर्वोत्तर के युवकों के अमूल्ययोगदान पर प्रकाश डालते हुए डॉ. सिंह कहते है कि आजकल अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पूर्वोत्तर भारत के प्रतियोगियों ने अपनी विशेष छाप छोड़ी है। देश को प्राप्त पदकों में से ५०% पदक पूर्वोत्तर राज्यों को मिले हैं। मेरी कॉम का उदाहरण इस बात का सबूत है। पूर्वोत्तर में खेल में रूचि रखनेवाले प्रतिभावान खिलाड़ी है। इस बात का खयाल कर नरेंद्र मोदी जी की सरकार मणिपुर में सौ करोड़ रूपये खर्च कर स्पोर्टस युनिवर्सिटी बनानेवाली है। जिससे यहां के युवकों की प्रतिभा को प्रोत्साहित किया जा सके। मानव संसाधन मंत्री स्मृति इरानी ने ‘ईशान्य-उदय’ योजना के अंतर्गत पूर्वोत्तर राज्य के १०,००० विघार्थियों के लिए ३५०० से ५००० तक की छात्रवृत्ति देने की घोषणा की है। गरीब परिवार के विद्यार्थियों को यह छात्रवृत्ति मिलने लगी है। ‘ईशान्य विकास’ योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए ज्ञानार्जन सुलभ हो इसलिए सरकारी खर्चे पर उन्हें भारत के आय. आय. टी और आय.आय.एम में भेजा जाता है। पूर्वोत्तर में कई वनस्पतियां उपलब्ध हैं। आयुर्वेद में उपयोगी कई दुर्लभ वनस्पतियां (जड़ीबूटियां) इस प्रदेश में उपलब्ध है। सरकार ने ऑरगेनिक फर्मिंग के विकास के लिए १०० करोड रूपये आवंटित किये हैं। यहां के कृषि-क्षेत्र की विविधता को ध्यान में रखकर केवल सालभर में छ: कृषि-विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई हैं। १८ नए एफ.एम / रेडियो चैनल शुरू करने की घोषणा की गई है। पूर्वोत्तर के छ: शहरों में तीन चैनलों का प्रसारण प्रांरभ हुआ है। ‘अरूण प्रभा नामक’ स्थानीय दूरदर्शन चैनल शुरू होने जा रहा है। अटल जी की सरकार के कार्यकाल में रालोआ सरकार ने ‘नॉर्थ ईस्ट डेवलपमेंट’ नामक नए मंत्रालय की स्थापना की थी। कांग्रेस सरकार के इस ओर अनदेखा करने के कारण इस मंत्रालय में भ्रष्टाचार बढ़ गया था। मोदी सरकार के कार्यकाल में इस मंत्रालय के सूत्र जीतेंद्र सिंह के हाथ में आने पर उन्होंने इस मंत्रालय का भ्रष्टाचार समाप्त किया। विकास कार्यो को गति दी। अब हर १५ दिन में एक कैबिनेट मंत्री पूर्वोत्तर आता है। पूर्वोत्तर के विधायकों से साल में दो बार मिलना, उनकी मांगें और कठिनाइयां समझना और हर राज्य के गवर्नर और मुख्यमंत्री के साथ सतत विचारों का आदान-प्रदान इत्यादि सभी कुछ यह मंत्रालय करता है।

 मो.ः ९५९४९६१८४९

 

 

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