अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस

अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस

हर साल जुलाई महीने के पहले शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2021 में यह 3 जुलाई को मनाया जा रहा है। वर्ष 1923 में जुलाई महीने के पहले शनिवार को पहली बार सहकारिता दिवस मनाया गया था। सहकारिता दिवस के तत्कालीन अध्यक्ष श्री जी जे डी सी गोदर्थ ने सहकारी आंदोलन के विकास में बाधा बने कारणों की तरफ सभी को दिखाते हुए यह प्रस्ताव रखा कि सभी देशों में प्रचार प्रसार दिवस आयोजित कर विश्व भर में यह बताए जाने की जरूरत है कि सहकारिता आंदोलन क्या कर रहा है जिसके बाद यह प्रस्ताव स्वीकार किया गया और वर्ष 1922 में हुई कार्यकारिणी की बैठक के बाद जुलाई के प्रथम शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस मनाए जाने का फैसला लिया गया। इसके बाद वर्ष 1923 से हर साल जुलाई के पहले शनिवार को सहकारिता दिवस मनाया जाता है। सन 1923 में हुई पहली सहकारिता बैठक में सहकारिता का संवर्धन, अंतर्राष्ट्रीय एकता, आर्थिक दक्षता, शांति और समानता की चर्चा हुई थी। 

अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस की शुरुआत के करीब 72 वर्ष बाद सन 1995 में सहकारिता के विश्वमान्य सिद्धांतों को नये रूप में मान्यता दी गयी। सहकारी आंदोलन ने  समाज के उपेक्षित वर्ग को संगठनात्मक शक्ति उपलब्ध करायी। सहकारिता के इस आंदोलन ने पीड़ित, जरूरतमंद,सामाजिक एकता और रोजगार के अवसर मुहैया कराने का प्रयास किया। इस दिवस पर सहकारिता के लोकतांत्रिक विचारों के अनुरूप मिलजुलकर सृजन और समान वितरण के लक्ष्य को लेकर कार्य करने का संकल्प किया जाता है। सहकारी संस्थान, आर्थिक उत्थान और विश्व शांति का संदेश भी दिया जाता है। 
 
देश में सहकारिता के क्षेत्र में कुछ संस्थाओं ने अपने कार्य से विश्व में अपनी अलग पहचान बनायी है। वैसे तो सहकारिता की जन्म स्थली भारत ही है इसके सभी गुण व संस्कृति यहां की रग रग में बसी हुई है। सहकारिता संगठन शक्ति, सृजन दृष्टि, एवं सर्वांगीण उन्नति का परिणाम है। सहकारिता की यह परंपरा अच्छी है कि इसमें शामिल सदस्य, पदाधिकारी, कर्मचारी, व अधिकारी सभी सहकारी कार्यकर्ता कहलाते है। सहकारी आंदोलन की दशा और दिशा बदलने के लिए सदस्यों की शक्ति आवश्यक होती है। यह हमेशा से प्रयास रहा है कि देश में सहकारिता सभी क्षेत्रों में बढ़े जिससे सभी को इसका लाभ मिले।
 
 
 
 
 
 
 
 

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