विश्व जनसंख्या दिवस: एनकंट्रोल्ड जनसंख्या विनाश की वजह!

विश्व जनसंख्या दिवस: एनकंट्रोल्ड जनसंख्या विनाश की वजह!
जनसंख्या किसी भी देश के लिए अच्छी और बुरी दोनों होती है लेकिन वह जब तक नियंत्रित होती है तभी तक उसका फायदा मिलता है बाद में बढ़ती जनसंख्या गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी की वजह बनती है इसलिए हर देश को अपनी जनसंख्या पर नियंत्रण करना जरुरी है। किसी भी देश की बड़ी जनसंख्या बाजार बनाने और काम करने के लिए लिहाज से ठीक है लेकिन अगर उसी जनसंख्या को काम और सामान नहीं मिलता है तो वह विनाश का कारण बन जाती है और इन्ही सब बातों को ध्यान में रख कर जनसंख्या नियंत्रण जैसे कानूनों को बनाया गया है।
 
11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की वजह यह है कि दुनिया के सभी लोगों का ध्यान बढ़ती जनसंख्या की तरफ आकर्षित किया जाता है क्योंकि बढ़ती जनसंख्या भी देश के लिए एक खतरा है और इसे समय रहते ही रोकना होगा। विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर देश और विदेश में कई कार्यक्रम किये जाते है जो लोगों को जनसंख्या के प्रति जागरुक करते है और जनसंख्या पर कैसे नियंत्रण लगाया जाए इसकी भी जानकारी देते है। 
 
 
विश्व जनसंख्या दिवस मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र परिषद के द्वारा की गयी है। दरअसल 1987 तक पूरी दुनिया की जनसंख्या 5 अरब के पार हो चुकी थी जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने इस पर विचार करना शुरु किया और कई बैठकों के बाद 11 जुलाई 1989 को हुई संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के साथ ही इसकी शुरुआत हुई तभी से हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। इस विशेष दिन पर तमाम देशों में सोशल कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक और तमाम तरह के कार्यक्रम किये जाते है जिससे लोगों को जागरुक किया जाता है। हर साल जनसंख्या दिवस पर अलग अलग थीम भी लांच की जाती है और उसी के आधार पर कार्यक्रम किये जाते है। पिछले साल 2020 में विश्व जनसंख्या दिवस की थीम कोरोना महामारी थी जबकि इस वर्ष 2021 में विश्व जनसंख्या दिवस की थीम अधिकार और विकल्प है।   
 
 
पूरे विश्व की जनसंख्या लगातार बढ़ती जा रही है और इस किसी भी प्रकार से विराम लगता नजर नहीं आ रहा है। हर देश इस पर रोक लगाने से बच रहा है क्योंकि जनसंख्या पर रोक लगाने से सबसे अधिक मुसलमान समुदाय प्रभावित होता है और वोट की राजनीति की वजह से इस रोक नहीं लगाया जा रहा है। विश्व में चीन जनसंख्या के लिहाज से पहले नंबर पर है जबकि भारत का दूसरा स्थान है। चीन और भारत में जनसंख्या अधिक होने से इन दोनों देशों को बड़े बाजार के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा रहा है और दुनिया के बाकी देश अपना सामान बेचने के लिए चीन और भारत की तरफ रुख कर रहे हैं।  

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