शरणार्थियों को मिलेगी भारत में नागरिकता

भारतीय नागरिकता बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भारत में शरण हेतु आए प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को दी जाएगी। इनमें वे हिंदू, सिख, जैन, बुद्धिस्ट, पारसी और क्रिश्चियन शामिल हैं जो कि 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हैं।

मोदी सरकार ने नागरिकता कानून को अभी लागू नहीं किया है। हालांकि, उन्होंने विदेशों से भारत की शरण में आए प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को देश की नागरिकता देने के लिए आवेदन मंगाए हैं। केंद्र सरकार ने विदेशों में प्रताड़ित हुए हिंदू, सिख, जैन, पारसी, ईसाई और बुद्धिस्ट से देश की नागरिकता लेने के लिए आवेदन मंगवाए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अभी तक भले ही नागरिकता कानून को नोटिफ़ाई नहीं किया है लेकिन, उन्होंने प्रताड़ित समाज की भलाई के लिए काम शुरू कर दिया है। गृह मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है।

यह नोटिफिकेशन सिटिज़नशिप एक्ट, 1955 और 2009 के अंतर्गत किए गए हैं। गौरतलब है कि सी.ए.ए. के अंतर्गत के नियम अभी मोदी सरकार ने लागु नहीं किए हैं। इसके चलते सिटिज़नशिप एक्ट, 1955 प्रोविजन के अंतर्गत भारत के 9 राज्यों के 29 ज़िलों में नागरिकता दी जा रही है। यह नागरिकता वर्तमान में उन लोगों को दी जा रही है जो भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर चुके हैं। जब सी.ए.ए. को 2019 में बनाया गया था तब देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन किया गया था। इतना ही नहीं, दिल्ली में दंगे भी हुए थे। सी.ए.ए. कानून के अंतर्गत भारतीय नागरिकता बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भारत में शरण हेतु आए प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को दी जाएगी। इनमें वे हिंदू, सिख, जैन, बुद्धिस्ट, पारसी और क्रिश्चियन शामिल हैं जो कि 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हैं।

नागरिकता कानून के नियम बनाने में देरी कोरोना महामारी और देश भर में लगे लॉकडाउन के चलते हुई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता कानून 1955 के अंतर्गत ऑर्डर जारी किए हैं न कि सिटीजनशिप एक्ट, 2019 के अंतर्गत। इसके पहले भी ऐसे नोटिफिकेशन 2018 में भी जारी किए जा चुके है। इसके पीछे कारण यह है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक इंटरव्यू में कहा था कि सी.ए.ए. को कोरोना वैक्सीनेशन ड्राइव पूरा होने के बाद लागू किया जाएगा। अमित शाह ने यह बातें हाल ही में संपन्न हुए बंगाल के चुनाव की एक रैली में कहा था। उन्होंने यह भी कहा था कि मोदी सरकार सी.ए.ए. को लेकर गंभीर है और वह इसे देश भर में लागू करेगी और इससे भारतीय अल्पसंख्यकों को डरने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकता कानून कोरोना महामारी के चलते अभी टाल दिया गया है। गौरतलब है कि भारत के विभाजन का दंश पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में रह रहे प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को समय-समय पर सहना पड़ा है और उन्हें अपना देश छोड़कर भारत आना पड़ा है। भारत में शरण मिलने के बावजूद उन्हें नागरिकता नहीं मिलने के चलते उनका जीवन बहुत ही कठिन परिस्थितियों में व्यतीत हो रहा था। इस बात का संज्ञान लेते हुए भारत की मोदी सरकार ने 2019 में नागरिकता कानून संसद में पास कर प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का काम किया है। हालांकि यह कानून कोरोना महामारी के चलते अभी तक लागु नहीं किया गया।

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