राम मंदिर निर्माण की गतिविधियां

5 अगस्त 2020 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का शिलान्यास किया और इसी के साथ ही कई वर्षों से चला आ रहा विवाद भी खत्म हो गया। अब सभी को सिर्फ इंतजार है राम मंदिर निर्माण के पूरा होने का और प्रभु श्री राम के दर्शन करने का। 5 अगस्त 2021 को मंदिर निर्माण के एक साल पूरे हो गये हालांकि लॉकडाउन की वजह से मंदिर निर्माण में तमाम परेशानियां आयी लेकिन फिर भी मंदिर का कार्य कभी नहीं रुका। एक साल बाद सभी को यह जानने की इच्छा हो रही है कि आखिर मंदिर का निर्माण कार्य कहां तक पहुंचा है और उन्हें मंदिर में कब तक दर्शन करने के लिए मिल सकता है? 
 
राम मंदिर निर्माण के एक साल पर मंदिर ट्रस्ट की तरफ से भक्तों को एक बड़ी सौगात दी गयी और कहा गया कि 2023 के दिसंबर तक श्री राम भक्तों को प्रभु के दर्शन मिल सकेंगे हालांकि 2023 तक मंदिर का निर्माण कार्य पूरा नहीं होगा यह सिर्फ भक्तों के लिए जल्दी खोला जायेगा। पूरे मंदिर के निर्माण के लिए 2025 तक का इंतजार करना होगा। ट्रस्ट से मिली जानकारी के मुताबिक राम मंदिर के गर्भगृह में प्रभु श्रीराम को बाल रूप में विराजमान किया जायेगा। पहली मंजिल पर राम दरबार रहेगा जिसमें माता सीता भी प्रभु के साथ विराजमान होंगी।  

 

दरअसल अयोध्या में सिर्फ मंदिर निर्माण नहीं हो रहा है बल्कि वहां पर म्यूजियम, डिजिटल आर्काइव और एक रिसर्च सेंटर भी तैयार किया जा रहा है जिसके माध्यम से लोगों को अयोध्या और श्री राम के इतिहास के बारे में पता चलेगा। राम मंदिर निर्माण पर करीब 1000 करोड़ का खर्च आ सकता है जबकि मंदिर ट्रस्ट को करीब 3000 करोड़ रुपये व 8 कुंतल चांदी चंदे में मिली है। मंदिर निर्माण के लिए हर बारीक चीज का ध्यान दिया जा रहा है जिससे मंदिर लम्बे समय तक विराजमान रहे और आने वाली पीढ़ियों को सनातन धर्म के बारे में जानकारी देते रहे। मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर राम के जीवन से संबंधित कहानियों की नक्काशी की जाएगी जो राम कथा को दर्शाएगें।  
 
 
भविष्य में भूकंप और किसी भी प्रकार की परेशानी से बचाने के लिए मंदिर के नींव की गहराई करीब 3 मंजिला नीचे तक किया गया है जिससे यह जल्दी गिर ना सके। मंदिर की नींव की खुदाई के दौरान देश के अलग अलग आईआईटी (IIT) संस्थानों से भी सुझाव लिया गया था जिससे इसे बेहतर तकनीक से बनाया जा सके। मंदिर में स्टील की जगह कॉपर का इस्तेमाल किया जा रहा है। मंदिर के पत्थरों को राजस्थान से मंगाया जा रहा है और उनकी तराशी का काम भी वहीं पर हो रहा है। फिलहाल मंदिर परिसर में करीब हर दिन 200 से अधिक मजदूर व इंजिनियर काम में लगे हुए है। 250 से अधिक ट्रक, रोलर और लोडर को इस्तेमाल में लिया जा रहा है। आप को बता दें कि मंदिर निर्माण में टाटा व एलएनटी मिल कर काम कर रहे है।  
 
 
अब भक्तों के लिए एक ऐसी जगह तैयार की जा रही है जहां से वह मंदिर निर्माण कार्य को देख सकेंगे। लोहे की राड से घिरा एक ऐसा स्थान जिसे व्यूपाइंट नाम दिया गया है और अयोध्या आने वाले भक्त यहां से ही राम मंदिर निर्माण कार्य को देख सकेंगे। नींव भराई का काम भी जारी है जिसमें करीब 5 परतों की भराई हो चुकी है और अक्टूबर तक नींव भराई का काम पूरा हो जाने की उम्मीद है। नींव में कंक्रीट लेयर 12 इंच की बिछाई जाती है और फिर उसे रोलर के माध्यम से दबा कर 10 इंच किया जाता है इसके बाद उस पर दूसरी परत बिछाई जाती है। एक परत का काम पूरा होने में करीब 5 दिन का समय लगता है।   
 
 
अयोध्या में मंदिर के साथ साथ पूरे अयोध्या को विकसित किया जा रहा है क्योंकि बहुप्रतीक्षित राम मंदिर बनने के बाद यह देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल होगा जिसको ध्यान में रखते हुए रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, एयरपोर्ट और आस पास के क्षेत्रों का भी निर्माण किया जा रहा है। रामनवमी के अवसर पर करीब 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है जिसको ध्यान में रखते हुए यह कार्य किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट से मिली 67 एकड़ भूमि के बाद मंदिर ट्रस्ट ने भूमि अधिग्रहण का काम किया है जिसके बाद मंदिर परिसर 107 एकड़ का हो चुका है। 

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