काशी विश्वनाथ : राष्ट्र पुनर्जागरण की दृष्टि

करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र बाबा विश्वनाथ के मंदिर का विहंगम दृश्य मात्र एक भवन का नवीनीकरण नहीं है। यह हमारी मान्यताओं, प्रतीकों और संस्कृति के संरक्षण का ऐतिहासिक उत्सव है। काशी में विश्वनाथ धाम परियोजना के भव्य लोकार्पण ने यदि कुछ इंगित किया है तो यही कि हमारे धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों में देश की आस्था के साथ उसका गौरव भी बसता है और उसे सहेजने-संवारने की आवश्यकता है। देश के प्रधानमंत्री मोदीजी ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए काशी में भगवा वस्त्रों के साथ गंगाजी में डुबकी लगाई, ऐसा लगा जैसे मां गंगा की कलकल करती लहरें विश्वनाथ धाम के लिए उन्हें आशीर्वाद दे रही हैं। नरेन्द्र मोदी ने 340 करोड़ रुपए से बने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन किया। हमारे धार्मिक सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व वाले सभी शहरों को उनके प्राचीन वैभव के साथ विकसित करने की आवश्यकता इसलिए बढ़ गई है क्योंकि हमारे अधिकांश धार्मिक स्थल भीड़भाड़, अव्यवस्था और नागरिक सुविधाओं के अभाव से ग्रस्त हैं।

8 मार्च, 2019 को इस कॉरिडोर का शिलान्यास मोदीजी ने किया था। अब कॉरिडोर में 24 इमारतों को बनाया गया है। इन इमारतों में बहुत सारी सुविधाएं होंगी। इस परियोजना के लिए मंदिर के आसपास की 300 से ज़्यादा संपत्तियों को ख़रीदा गया है। 1400 दुकानदारों, किरायेदारों और मकान मालिकों को दूसरी जगह बसाया गया है। परियोजना के दौरान पुरानी संपत्तियों को तोड़ा गया। इस दौरान 40 प्राचीन मंदिरों को फिर से बनाया गया है।इसे पूरा करने मे हर बाधा को सफलतापूर्वक पार किया गया और इस क्रम मे कही कोई असंतोष भी नहीं पनपने दिया गया।

कॉरिडोर लोकार्पण को लेकर पूरे काशी में उत्सव का माहौल बना रहा। सरकारी भवनों, चौराहों को बिजली के रंग-बिरंगे झालरों से, दीपावली की तरह अपने घरों को दीपों से सजाकर काशी में शिव दीवाली मनाई गई। यह माहौल सिर्फ काशी तक  सिमित न होकर भारत सहित विश्व भर के हिन्दुओं के मानस पटल पर था। पहले अयोध्या में दीवाली मनी, अब काशी में। अयोध्या के बाद बनारस को पूरे देश के सामने धर्म और विकास के एक मॉडल के रूप में पेश किया जा रहा है। ऐसे समय वहां जयपुर की रैली से राहुल गांधी ने हिंदू और हिंदुत्ववादियों, सत्याग्रही और सत्ताग्रही, का फर्क जनता को समझा रहे थे। भारतीय जनता राहुल गांधी के इस वक्तव्य को हलके में ले रही है। अगले वर्ष होने वाले उत्तर प्रदेश के चुनावों कों लेकर कांग्रेसी हिंदुत्व को लांछित करने की कोशिश कर रहें हैं। राहुल गांधी भी हिंदुत्व को हिंदू से अलग करने की कवायद कर रहे है।

जब हम बनारस के विकास की बात करते हैं तो इससे पूरे देश के विकास का रोड-मैप भी बन जाता है। काशी में विकास का लाभ पर्यटन के साथ-साथ कला क्षेत्र को भी मिलेगा। काशी के कौशल को नई ताकत मिल रही है। काशी में जो काम चल रहा है, वह कार्य देश को नई दिशा दे रहा है। 2014-15 के मुकाबले 2019-20 में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या दोगुनी और हवाई पर्यटकों की संख्या 30 लाख तक पहुंच गई है। अगर इच्छाशक्ति हो तो परिवर्तन आ सकता है इस बात का यह जीवंत उदाहरण है। स्पष्ट है कि इस परियोजना के क्रियान्वयन को एक आदर्श मानकर देश के अन्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का विकास होना चाहिए।

हमारा देश इतना अद्भुत है कि यहां जब भी समय विपरीत होता है, कोई ना कोई संत, विभूति समय की धारा को मोड़ने के लिए अवतरित हो जाती है। सदियों से इस भूमि ने मानवता को राह दिखाई है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के संकल्प के साथ संपूर्ण विश्व के कल्याण का संदेश दिया है। समग्र संसार के कल्याण के लिए देश के कोने-कोने में स्थापित आध्यात्मिक ऊर्जा के इन सशक्त केंद्रों को आक्रांताओं द्वारा पद्दलित किया गया, उसके जीर्णोद्धार का कार्य आगे कौन करेगा? क्योंकि ये केवल मिट्टी, पत्थर-धातु के ढांचे नहीं हैं, ये हमारी संस्कृति, सभ्यता व सनातनी मानस के प्रतीक हैं। ये जीवंत और जागृत ऊर्जा केंद्र हैं।

अब काशी विश्वनाथ के लोकार्पण से यह विश्वास भी बन रहा है कि महान सनातन परंपरा के प्रतीक इन आध्यात्मिक शक्ति केंद्रों से असीम ऊर्जा के प्रवाह में कभी कमी नहीं आएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमारी इस आशा और विश्वास के प्रतिबिंब बनकर आगे आए हैं। उनके नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर और परिपक्व कदमों से हर दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। आज भगवान राम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बन रहा है। धर्म के प्रति आस्था के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव का वातावरण एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे प्रधानमंत्री बखूबी निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारतवर्ष में सही अर्थोेंं में आध्यात्मिक, औद्योगिक, सामाजिक, वैश्विक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो रहा है। हमारी महान सभ्यता, संस्कृति और अध्यात्म के संस्कार को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं। भारत को सामर्थ्यशाली बनाने के लिए आज वर्त्तमान में आवश्यक सभी  अभियानों के जरिए समाज को आगे बढ़ाने का मार्ग तैयार किया जा रहा है। ये सभी अभियान राष्ट्र पुनर्जागरण की दृष्टि से देखे जाने चाहिए।

 

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