भारत देगा दुनिया को अनाज

ये ज्यादा पुरानी बात नहीं है 100 साल पहले भारत भुखमरी और अकाल का पर्याय था। इतिहास के हर पन्ने पर बस अकाल और उसके बाद पैदा होने वाली महामारियों से मरते लोगों का ब्यौरा है। 50 साल पहले थोड़ी हालत सुधरी लेकिन फिर भी अनाज की भारी कमी के संकट में हम फंसे थे। अमेरिका से आता सड़ा हुआ लाल गेहूं और उससे भी भारी वो एहसान। कौन भूल सकता है 1965 का युद्ध और शास्त्री जी की सोमवार को व्रत करने की अपील को।

लेकिन आज देखिए

रूस-यूक्रेन युद्ध से सारी दुनिया भारी अनाज संकट से घिरी है और भारत की तरफ देख रही है और भारत भी सहर्ष दुनिया की थाली अपने खेतों में उगे अनाज से भर देना चाहता है। WTO भारत से अनाज निर्यात के रास्ते साफ कर रहा है और इससे पहले कोविड के समय भी भारत की मुफ्त अनाज बांटने की शक्ति को दुनिया ने देखा ही है।

और इससे अभी एक साल पहले हम सारी दुनिया को कोविड वैक्सीन बांट रहे थे और उससे पहले हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा बांट रहे थे।

हम अफगानिस्तान में चावल भेज रहे हैं।

और श्रीलंका को पैसा उधार दे रहे हैं ।

रूस से दोस्ती भी निभा रहे हैं और जरूरत पड़ने पर अमेरिका और यूरोप का आंख भी दिखा रहे हैं।

ऐसा ही एक मजबूत भारत बनाइये जो न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी कर सके बल्कि जरूरतमंदों के काम भी आ सके।

क्योंकि न हमारे लिए ये विश्व एक बाजार है और न हमें दूसरों की सभ्यताओं को कुचलकर अपने महल खड़े करने का शौक है।

एक मजबूत भारत विश्व के लिए कितना आवश्यक है आज ये बात दुनिया भी देख रही है।

हमारी थाली की रोटी चाहे सारी दुनिया ने छिनी हो लेकिन भारत जितना संभव होगा किसी की वाजिब मदद करने से पीछे नहीं हटेगा।

ये ही वो संस्कार है जो हमारे पूर्वजों ने हमारी संस्कृति में जड़ों तक सीचें है।

–  अविनाश त्रिपाठी

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