गाय बैल के प्रेम को ख़त्म करता मॉडर्न युग

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जहाँ लोग अब अपने और पराए में आकलन लगा रहे हैं वहीं 90 के दशक में लोग पराए को भी अपना मानते थे और पराए को भी इतना प्यार देते थे कि सामने वाला भी अपने और पराए में फर्क नहीं कर पाता था। लोगों की ऐसी संवेदना रहती थी…

भारत देगा दुनिया को अनाज

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ये ज्यादा पुरानी बात नहीं है 100 साल पहले भारत भुखमरी और अकाल का पर्याय था। इतिहास के हर पन्ने पर बस अकाल और उसके बाद पैदा होने वाली महामारियों से मरते लोगों का ब्यौरा है। 50 साल पहले थोड़ी हालत सुधरी लेकिन फिर भी अनाज की भारी कमी के…

बिहार के गांवों में बिना जुताई के होगी खेती

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किसानों के लिए कम लागत में अधिक मुनाफे के बनेंगे मॉडल 1) जलवायु अनुकूल खेती के लिए सभी जिलों में पांच-पांच गांव सहित कुल 190 गांव चयनित 2) कृषि वैज्ञानिक व कर्मचारी पांच साल तक 190 गांवों में रहेंगे उपलब्ध 3) केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के बाद आठ जिलों के…

मछली को जीआइ टैग दिलाने की पहल शुरू

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जून में बिहार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग केंद्र को भेजेगा प्रस्ताव बिहार सरकार मिथिला की रोहू और सोन की कतला मछली को जीआइ टैग दिलाने की तैयारी में जुट गई है। पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने स्कीम पर काम शुरू कर…

महान कृषि वैज्ञानिक सर गंगाराम

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श्री गंगाराम का जन्म 13 अप्रैल, 1851 को मंगटानवाला (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। वे बचपन से ही होनहार विद्यार्थी थे। अपनी सभी परीक्षाएँ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर वे पंजाब के सार्वजनिक निर्माण विभाग (पी.डब्ल्यू.डी.) में अभियन्ता के रूप में काम करने लगे।  इस दौरान पूर्ण निष्ठा एवं परिश्रम से काम…

महंगाई से त्रस्त सामान्य जनता !

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किसी भी वस्तु की मांग जब तेज होती है तो उसकी कीमत बढ़ने लगती है और उसे महंगाई का नाम दिया जाता है। यह व्यक्ति के हर दिन के खर्चे को भी प्रभावित करती है और उसका असर पूरे परिवार पर नजर आता है। महंगाई के कारण देश की अर्थव्यवस्था…

किसान आंदोलन : कृषि कानून से खुश थे 86% किसान

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केंद्र की मोदी सरकार द्वारा किसानों के लिए लाए गए तीन कृषि कानूनों को पिछले साल भले ही वापस ले लिया गया हो, लेकिन इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट की एक कमेटी ने जो रिपोर्ट पेश किया है वह काफी चौंकाने वाला है।  केंद्र सरकार की तीन कृषि कानूनों को…

सूखती नदियां, मिटते पहाड़ हमें कहां ले जाएंगे?

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प्रदूषित होती नदियां जितनी चिन्ता का विषय हैं उससे बड़ी चिन्ता वो मानव निर्मित कारण हैं जो इनका मूल हैं। निदान ढूंढ़े बिना नदियों के प्रदूषण से शायद ही मुक्ति मिल पाए। भारत में अब इसके लिए समय आ गया है जब इसके लिए जागरूक हुआ जाए। लोग स्वस्फूर्त इस…

बजट में अर्थव्यवस्था के सभी अंगो का ध्यान रखा गया

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वित्त मंत्री  निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत चौथे बजट के बारे में अगर थोड़े शब्दों में कहना हो तो यही कहा जाएगा कि नरेंद्र मोदी सरकार की पहले से चली आ रही दीर्घकालीन लक्ष्य से भारत को मजबूत आर्थिक शक्ति बनाने के लक्ष्य को ही साधने वाला है। उन्होंने अपने भाषण…

केंद्र सरकार की पहलों से आर्थिक उन्नती कैसे हो रही हैं?

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कोरोना संकट का अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। अब जब अर्थव्यवस्था फिर से सक्रिय हो रही है और सकारात्मक परिणाम दे रही है जैसे जीएसटी संग्रह में वृद्धि, विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि, यूनिकॉर्न स्टार्ट-अप में तीसरे स्थान पर, जीडीपी में सुधार, और इसी तरह बहुत सेक्टर्स... आइए प्रत्येक…

किसान आंदोलन में किस की जीत व किस की हार?

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सरकार और किसान के बीच चल रही आंदोलन की लड़ाई आखिरकार खत्म हुई और अब 11 दिसंबर से किसान दिल्ली के सभी बॉर्डर को खाली करना शुरु कर देंगे। सरकार द्वारा लागू किये गये तीनो कृषि कानून को लेकर यह लड़ाई जारी थी। करीब एक साल तक चले किसान आंदोलन…

छोटे खेतिहर किसानों से सशक्त होता कृषि क्षेत्र

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भारतीय कृषि हमारी संस्कृति की तरह विविधता से परिपूर्ण है। छोटी खेती और उसकी अंगभूत बहुजातीयता भारतीय आधुनिक खेती के लिए हितकारी है। छोटे स्तर पर मिश्र खेती हमारी शक्ति है। भारत में प्रति वर्ष एकक क्षेत्रफल में कुल कृषि उत्पादन विश्व में सर्वाधिक है। एफएओ के अनुसार विश्व की छोटी खेती मात्र 12% भाग पर होती है लेकिन 35% अन्न उत्पादन करती है।

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