अजमेर दरगाह में पसरा सन्नाटा

जियारत करने वाले हिंदुओं की संख्या 90 % घटी

– टाइम्स ऑफ इंडिया और लगभग सभी अखबारों और वेबसाइट में ये खबर छपी है कि अजमेर दरगाह पर जाने वाले हिंदुओं की संख्या में भारी गिरावट हुई है

– आज तक की वेबसाइट पर छपी खबर के मुताबिक अजमेर के होटलों में इक्का दुक्के कमरे ही भरे हैं । आज तक ने बताया कि उदयपुर हत्याकांड के बाद जायरीनों में दहशत भर गई और लोग अजमेर आने से घबरा रहे हैं । आज तक के ही मुताबिक एक होटल कारोबारी ने बताया कि पहले रमजान के महीने को छोड़कर बाकी दिनों में 90 फीसदी होटल के कमरे बुक रहते थे लेकिन अब हालात बदतर हो चुके हैं ।

-इसी वेबसाइट के मुताबिक अजमेर दरगाह के अंदर मौजूद फूलों की दुकानें वीरान पड़ी हैं यहां तक कि गुलाब की दुकानों पर भी जाले लग रहे हैं गुलाब मुरझा चुके हैं क्योंकि उन्हें कोई खरीदने वाला ही नहीं है ।

-अजमेर के दरगाह क्षेत्र में व्यापार 70 फीसदी कम हो गया है । एक कारोबारी ने बताया कि उदयपुर कांड के बाद और पूरे मामले में अजमेर दरगाह के खादिमों का नाम आने के बाद पूरा व्यापार तबाह हो गया है

– वहीं न्यूजनेशन ने भी अपने स्रोतों से जो खबर छापी है उसके मुताबिक पिछली बार के मुकाबले इस बार अजमेर दरगाह में सिर्फ 10 फीसदी कमाई हुई है ।
दरगाह के खादिम एनुद्दीन चिश्ती ने बताया कि 15-20 हजार लोग यहां रोज आते थे लेकिन अब यहां सूनसान हो गया है । उदयपुर की घटना के बाद से ही लोगों ने बुकिंग रद्द करने शरू कर दिए थे

– दरगाह के 3 खादिम अब तक भड़काऊ बयान दे चुके हैं… सलमान चिश्ती ने तो यहां तक कहा था कि जो नूपुर की गर्दन लाकर देगा उसे वो अपना घर ही दे देगा । पुलिस की जांच में कन्हैया लाल का सिर कलम करने वालों से भी दरगाह के रिश्ते सामने आए हैं ।

-दरगाह की सलाना कमाई 200 करोड़ है और 70 प्रतिशत हिंदू ही यहां पर आते हैं । मुसलमान दरगाह में इसलिए नहीं आते क्योंकि तसव्वुफ यानी सुफियाना विचार को शरीयत मान्यता देता ही नहीं है । ऐसे में अब जब हिंदुओं ने ही दरगाह से मुंह मोड़ लिया है तो ये अजमेर के चिश्तियों के लिए एक बहुत बड़ा झटका है

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