संजय राउत की गिरफ्तारी के मायने

प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी द्वारा शिवसेना नेता संजय राउत की गिरफ्तारी केवल समय की बात थी। पूरी छानबीन और कार्रवाई बता रही थी कि संजय राउत ,उनके परिवार और दोस्तों के विरुद्ध भ्रष्टाचार धोखाधड़ी तथा धन शोधन का मामला गंभीर हो गया है। उच्चतम न्यायालय द्वारा ईडी की कुर्की , गिरफ्तारी आदि को सही ठहराने के बाद ईडी अधिकारियों का आत्मविश्वास बढ़ गया है। 22 जुलाई को ईडी ने पात्रा चाॅल मामले में सुजीत पाटकर की पत्नी स्वप्ना पाटकर से पूछताछ की तभी यह साफ हो गया कि संजय राऊत के इर्द-गिर्द शिकंजा कस चुका है।  स्वप्ना ने एक ऑडियो क्लिप रिलीज किया जिसमें एक व्यक्ति उसे धमकी और गालियां दे रहा है जिसके बारे में उसका कहना था कि वह संजय राउत है जिन्होंने बार-बार उन्हें और उनके परिवार को धमकी दी है। ध्यान रखने की बात है कि ने स्वप्ना ने पात्रा चाॅल एवं अन्य मामलों की अपनी गवाही में संजय को दोषी बताया था। उसने पुलिस में लिखित शिकायत दी कि संजय राउत ने उस पर दबाव बनाया कि तुम यह बोलो कि भाजपा नेता किरीट सोमैया के दबाव में तुमने बयान दिया है। ईडी ने संजय राउत को 27 जुलाई को पेश होने का सम्मन भेजा किंतु वे नहीं गए। उसके बाद ईडी के पास प्रतीक्षा करने का कोई कारण नहीं था। उनके घर आई तथा लंबी पूछताछ के बाद कार्रवाई शुरु की। संजय राउत गिरफ्तार किये जाने वाले अकेले व्यक्ति नहीं रहेंगे। इसके बाद उनके परिवार , और कई दोस्तों की गिरफ्तारी होनी है। इसके पूर्व उनके दोस्त और व्यवसायी प्रवीण राउत पहले महाराष्ट्र की आर्थिक अपराध शाखा और बाद में ईडी द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं। कोई दोषी है या नहीं है इसका अंतिम फैसला न्यायालय करता है लेकिन इन मामलों में कुछ बातें साफ दिखाई दे रही हैं।

 संजय राउत को गिरफ्तार करने से पहले ईडी ने कई संपत्तियां अटैच की हैं,जिनके बारे में उसका मानना है कि यह धनशोधन से प्राप्त रूपये से खरीदे गए। ईडी ने अलीबाग में आठ भूमि के टुकड़ों और दादर के गार्डन कोर्ट में एक फ्लैट को धनशोधन मुकदमे के तहत अटैच किया । अलीबाग के किहिम बिच के भूखंड संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत और स्वप्ना पाटकर के नाम से है तो दादर के गार्डन कोर्ट में वर्षा राउत के नाम।  ईडी ने संजय राउत के दोस्त प्रवीण राउत के 9 करोड़ की संपत्ति को भी इसमें अटैच किया।  5 अप्रैल ,2022 को ईडी की प्रेस रिलीज में कहा गया था कि इसने धन शोधन निषेध कानून के तहत 11.15 करोड़ की अचल संपत्ति अटैच किया है। ईडी ने आरोप लगाया है कि संजय राउत के परिवार ने इन संपत्तियों को पात्रा चौल की संपत्तियों धोखाधड़ी द्वारा बेचने से प्राप्त धन से खरीदा गया।  ध्यान रखने की बात है कि ईडी संजय राऊत उनके दोस्तों और साझेदारों तक तब पहुंची जब पीएमसी यानी पंजाब महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक घोटालों की जांच में शामिल हो गई थी। इसी में से वर्षा राउत के नाम रुपए हस्तांतरित किए गए थे और वहीं से जांच की दिशा उस ओर भी मुड़ी। वैसे यह मुकदमा मुख्यतः मुंबई के गोरेगांव पश्चिम के पात्रा चौल में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी से संबंधित है। उत्तरी मुंबई के गोरेगांव में सिद्धार्थ नगर है जो पात्र चाॅल के नाम से मशहूर है । गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पात्रा चौल के पुनर्विकास में अनियमितताओं धोखाधड़ी एवं संशोधन का विकराल तांडव देखने को मिलता है।  पीएमसी में निवेशकों के 4355 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ था और इसमें एचडीआईएल या हाउसिंग डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की बड़ी भूमिका सामने आई थी। आप सोच सकते हैं कि मामला कहां से कहां जुड़ा है। वर्षा को पीएमसी बैंक से बिना ब्याज के कर दिया गया था जिससे दादर का फ्लैट फ्लैट खरीदा गया।

 गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को 672 खरीददारों के लिए पात्रा चाॅल परियोजना के विकास का काम दिया गया था। उस समय राकेश कुमार वाधवा, सारंग वाधवा, जो कि एचडीआईएल के प्रमोटर हैं और प्रवीण राउत गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक थे। एक त्रिपक्षीय समझौता सोसायटी  ,महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी एमएचएडीए यानी महाडा और गुरु कंस्ट्रक्ट आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुआ था। इस समझौते के तहत डेवलपर को विस्थापित किरायेदारों को 672 फ्लैट देना था तथा महाडा के लिए 3000 फ्लैट बनाना था और शेष क्षेत्र को ये बेच सकते थे। गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन ने महाडा के साथ धोखाधड़ी करते हुए फ्लोर स्पेस इंडेक्स एफएसआई को 9 डेवलपर्स को बेच दिया जिससे 901 करोड़  79 लाख रुपए प्राप्त हुए। इसने 672 वह फ्लैट बनाए ही नहीं।गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने एक अन्य प्रोजेक्ट मीडोज लांच किया जिसमें फ्लैट खरीदारों से बुकिंग के रूप में 138 करोड़ रुपया प्राप्त किया। इस तरह गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों द्वारा किए गए अपराध से कुल 1039 करोड़ 79 लाख रुपया पात्रा चौल विकास के नाम पर प्राप्त हुए। जैसे पूरी कमाई सारे नियम कानूनों को ताक पर रखकर धोखाधड़ी से की गई वैसे ही इसमें से कुछ राशि निकटतम लोगों को स्थानांतरित किया गया।

 पैसे कहां कहां गए इसकी छानबीन से पता चला कि.करीब 100 करोड़ रूपया एचडीआईएल से प्रवीण राउत के खाते में भेजा गया। प्रवीन राऊत के खाते से राशि उनके निकट लोगों परिवारिक सदस्यों तथा व्यवसाय से जुड़े लोगों के अलग-अलग खातों में गया। वरेषा के खाते में इसमें से 83 लाख गए जिससे दादर का फ्लैट खरीदा गया। ईडी के अनुसार अलीबाग में टीम बीच पर 8 भूखंड इसी के पैसे से खरीदे गए जो वर्षा और सपना पाटकर के नाम से है। इस भूमि की खरीद में नगद भुगतान किया गया जिसका हिसाब कहीं नहीं लिखा है। इसी की छानबीन के बाद इनकी संपत्तियों को कुर्क किया गया। संजय राउत की बेटियां भी इन मामलों में जांच के दायरे में आ गईं। इसी में सुजीत पाटकर का नाम आया जो संजय राउत की दोनों बेटियों के व्यवसायिक साझेदार हैं। सुजीत पाटकर की शराब कंपनी मैगपी डीएफएस प्राइवेट लिमिटेड में 16 वर्षों से संजय राउत की बेटियां पूर्वसी और विधिता पाटनर है। पाटकर की पत्नी और संजय राऊत की पत्नी ने संयुक्त रूप से अलीबाग में जमीन खरीदा था। प्रवीन राउत पाटकर से जुड़ा हुआ था। यहां यह भी जानना जरूरी है कि गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड एचडीआईएल यानी हाउसिंग डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड का एक सहायक कंपनी है। एचडीआईएल पंजाब और महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक यानी पीएमसी के 4355 करोड रुपए के धोखाधड़ी मामले में ईडी तथा अन्य एजेंसियों द्वारा जांच के घेरे में है। जैसा ईडी ने माना है गुरु आशीश कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों प्रवीन राउत ने राकेश कुमार वाधवा और सारंग वाधवा के साथ मिलकर कई बिल्डरों को एफएसआई यानी फ्लोर स्पेस इंडेक्स बेच दिया।  गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक होने के कारण प्रवीण राउत ने राकेश कुमार और सारंग के साथ आपराधिक षड्यंत्र करते हुए पूरा घोटाला किया।  इसे राजनीतिक मामला बताने वाले जरा सोचे कि उन 672 किरायेदारों पर क्या गुजरी जब उन्हें पता चला कि बिना फ्लैट बनाए ही उस जगह को बेच दिया गया। उनके बारे में भी सोचे जिनके पैसे पीएमसी घोटाले में डूब गए। इन लोगों ने बिना कुछ किए कई बिल्डरों से 234 करोड़ रुपए प्राप्त किए तथा बैंकों से कर्ज भी पाया। बिना कुछ किए कैसे पैसे का खेल चल रहा था यह समझने की जरूरत है । प्रवीण राउत ने 2010 में कंपनी की इक्विटी एवं भूमि सौदे से अपने बैंक अकाउंट में 95 करोड़ प्राप्त किया,जबकि  कंपनी और प परियोजनाओं में कहीं से कोई आमदनी पैदा नहीं हुई थी। यह 95 करोड़ एचडीआईएल द्वारा हस्तांतरित किए गए। यह पीएमसी बैंक द्वारा एचडीआईएल को दिए गए कार्य या अग्रिम भुगतान के रूप में था। इस भुगतान के लिए प्रवीण राऊत की ओर से कोई सामग्री या दस्तावेज नहीं दिया गया था।

एचडीआईएल के लेजर के अनुसार पालघर क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण के लिए प्रवीण राउत को राशियां दी गई थी। ईडी ने संजय राउत की पत्नी से पीएमसी बैंक मामले में प्रवीण राउत की पत्नी के साथ संबंधों को लेकर पूछताछ की । इसके अनुसार प्रवीण राऊत ने अपनी पत्नी माधुरी प्रवीण राउत को एक करोड़ 60 लाख रुपया दिया। माधुरी राउत ने इनमें से 55 लाख 50 हजार 23 दिसंबर, 2010 को तथा 5 लाख 15 मार्च ,2011 को ब्याज मुक्त कर्ज के रूप में वर्षा राउत को दिया।छानबीन से स्पष्ट हुआ कि बर्षा राऊत और माधुरी राउत अवानी कंस्ट्रक्शन में पार्टनर हैं और वर्षा राउत ने इससे 12 लाख रुपया प्राप्त किया जो कर्ज में बदल दिया गया जबकि इनका योगदान केवल 5625 रुपया था। क्या इसके बावजूद कोई कह सकता है कि इन सब ने मिलीभगत कर भ्रष्टाचार नहीं किया या इसमें धन शोषण शोधन का मामला नहीं था तो क्या कहा जाएगा?

ईडी का तो इसमें बाद में प्रवेश हुआ। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा यानी ईएफओ ने सबसे पहले पात्रा चाॅल के पुनर्विकास की जांच के लिए प्राथमिकी दर्ज दर्ज किया था। प्राथमिकी में एचडीआईएल के प्रमोटरों तथा गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन के निवेशकों सहित कई अन्य पर पीएमसी बैंक को 4355 करोड़ रुपए की क्षति पहुंचाने तथा स्वयं को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया था। इसी के तहत प्रवीण एवं अन्य की गिरफ्तारियां हुई थी। जब इस में भारी पैमाने पर नकदी का मामला आया तो ईडी ने अक्टूबर ,2020 में मुकदमा दर्ज किया । इसमें उसने स्वयं को निर्दोष साबित करना है। एचडीआईएल और इसके प्रमोटरों राकेश कुमार वाधवान, उनका बेटा सारंग वाधवान, इसके पूर्व अध्यक्ष वारयाम  सिंह और पूर्व प्रबंध निदेशक जॉय थॉमस को पीएमसी बैंक कर्ज धोखाधड़ी में नामजद किया है।

पूरी छानबीन बताती है कि संजय रावत कि इनमें भूमिका थी। उनके प्रभाव से काम आसान होते थे तथा वैसे हस्तांतरण एवं सौदे आदि की बातचीत उनकी सहमति या उनके सुझाव पर किए जाते थे। इसमें संजय राउत ने ईडी के साथ जाते समय भगवा ध्वज लहरायें स्वयं को बालासाहेब ठाकरे का शिष्य बतायें मामले में कोई अंतर नहीं आने वाला। उन्हें स्वयं को निर्दोष साबित करना है। इसके राजनीतिक मायनों को कोई नकार नहीं सकता। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के वे एक मुख्य स्तंभ थे। उन्हीं के बयानों एवं कदमों से राजनीतिक हलचल मचती थी। तो उनका भ्रष्टाचार के ऐसे स्पष्ट मामले में गिरफ्तार होने से न केवल उनकी बल्कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना की भावी राजनीति पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के गठजोड़ के पीछे वे बड़ी शक्ति थे। जाहिर है , अगर वे जेल में लंबा रहते हैं तथा उनके परिवार के लोग भी अंदर जाते हैं तो महाराष्ट्र में भाजपा विरोधी राजनीति धीरे-धीरे काफी कमजोर हो जाएगी। मान लीजिए वे जेल से निकल जाएं या उन पर आरोप साबित नहीं हो तब भी आप अपना कमजोर नहीं हो जाता। राजनीति से बड़ी बात यह भ्रष्टाचार है। राजनीति में अपने पद और सत्ता की ताकत से आप किस तरह नियमों – कानूनों को धत्ता बताकर आम आदमी के हिस्से की राशि हड़पते हैं इसका एक भयावह और शर्मनाक उदाहरण है।

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