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        प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी सामाजिक क्षेत्र में अतुलनीय कार्य करने वालों को सम्मानित करने की अपनी परम्परा को ‘सतीश हावरे फाउंडेशन’ तथा ‘हावरे परिवार’ ने आगे बढ़ाया है। स्व.सतीश हावरे के स्मृति दिन के अवसर पर इस वर्ष यह पुरस्कार पद्मश्री सुभाष पालेकर को दिया गया। पद्मश्री सुभाष पालेकर ‘जीरो बजट प्राकृतिक खेती’ के क्षेत्र में कार्यरत हैं। भयानक सूखा और अकाल, पानी के लिए लोगों का तरसना, किसानों की आत्महत्याएं आदि सभी प्रश्नों पर सुभाष पालेकर के कार्य कृषि संकल्पना को पुनरुज्जीवित करने वाले हैं।

       

 पुरस्कार प्राप्त करने के उपरांत दिए गए अपने व्याख्यान में सुभाष पालेकर ने कहा ‘यह पुस्कार मेरा नहीं बल्कि ८० लाख त्याज्य और बहिष्कृर किसानों का है।’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘मोदी सरकार की नीतियों पर हमने कुछ टीका टिप्पणी की थी; परंतु एक किसान को पद्मश्री देकर उन्होंने सभी किसानों के कार्यों का यथोचित मूल्यांकन किया है।‘ सुभाष पालेकर ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रोताओं से आव्हान किया कि ‘वे अनावश्यक वस्तुओं का उपयोग न करें क्योंकि इसे बनाने में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग होता है। अगर वस्तुएं आवश्यक नहीं हैं तो ये संसाधन भी व्यर्थ हो जाएंगे। इससे सभी को बहुत हानि होगी।’
          हावरे समूह के संचालक सुरेश हावरे ने स्व.सतीश हावरे के स्मृति दिन के अवसर पर उनकी स्मृतियों को उजागर करते हुए कहा कि ‘करुणा सतीश का स्थाई भाव था। उन्होंने सभी स्तर के लोगों का विचार करते हुए बेस्ट के कर्मचारियों के लिए साढ़े पांच हजार, पुलिस कर्मचारियों के लिए साढ़े तीन हजार घर बनाए। उनका विचार था कि घर बनाने वाले मजदूरों और रास्ते पर भीख मांगने वालों का भी खुद का घर हो।’ सुरेश हावरे ने सामाजिक सेवा जीवन गौरव पुरस्कार से सम्मानित सुभाष पालेकर के कार्यों की भी बहुत प्रशंसा की। कार्यक्रम में उपस्थित प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सिंधु ताई सपकाल का अभिनंदन करते हुए सुरेश हावरे ने कहा कि ‘सिंधु ताई नौ गज की साडी पहनने वाली शायद पहली महिला होंगी; जिन्हें डॉक्टरेट की उपाधी से सम्मानित किया गया है।‘‘
         

 कार्यक्रम में समाज के गणमान्य व्यक्तियों के साथ ही प्रमुख अतिथि के रूप में पद्मश्री मधु मंगेश कर्णिक, सामाजिक कार्यकर्ता सिंधुताई सपकाल, एस.एस. सालुंखे, विधायक रणजित सावरकर आदि उपस्थित थे।

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