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*****संदीप सिंह*****

अक्सर सुनने में आता है कि भारत का मानचित्र गलत दर्शाया गया। कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा नहीं दिखाया। इसका कारण है- गुगल। गुगल भारत का मानचित्र गलत दर्शाता है और अधिकांश भारतीयों को भारत का सही मानचित्र मालूम नहीं होता। भारत में धर्मनिरपेक्षता की आड़ में भारत के बारे में ही नहीं पढ़ाया जाता है।

आज भारत की जानकारी बच्चों को कक्षा में कम और इंटरनेट पर ज्यादा मिलती है। इसका फल यह होगा कि आनेवाली पीढ़ियों को भारत का गलत मानचित्र ही सही लगेगा।

सोशल मीडिया और इंटरनेट की चीजों को सही मानने का एक दर्दनाक उदाहरण सितम्बर २०१४ में बरेली में देखने को मिला। विजय मौर्य नामक एक २२ वर्षीय युवक केरल की एक महिला को, जो कि बहरीन में कार्यरत थी, अपनी असली मां कहने लगा। उस महिला से उसकी मित्रता फेसबुक पर हुई थी। उस महिला ने युवक के बैंक खाते में कुछ रुपये भी जमा करवाए थे। कुछ लोगों ने इसे धर्मांतरण का तरीका भी बताया।

बैंक खातों और सोशल मीडिया का गहरा संबंध है। भारतीय फौज के जूनियर से लेकर सीनियर अधिकारी भी पिछले कुछ वर्षों में गद्दारी के लिए गिरफ्तार हुए हैं। इन सैनिकों ने फेसबुक पर मिली महिला मित्रों को चंद रुपये के लिए सेना के गोपनीय दास्तेवाज दे दिए।

पिछले वर्ष असम में हुए दंगे भी पाकिस्तान द्वारा गलत तस्वीरों को सोशल मीडिया पर प्रदर्शित कर लोगों की भावनाओं को भड़काने के कारण हुए। पिछले कुछ महीनों में भारत समेत दुनिया भर से युवक युवतियां आई.एस.आई.एस. में शामिल होने गए। इन सभी को आई.एस.आई.एस. ने सोशल मीडिया के द्वारा संपर्क किया था।

इन सभी उदाहरणों से एक बात समझ में आती है कि देश, धर्म, संस्कार, संस्कृति, सेना एवं परिवार किसी भी समाज के आधार सहमत होते हैं और इन सभी को सोशल मीडिया के द्वारा ध्वस्त किया जा सकता है। आज के युग में सोशल मीडिया, युद्ध का एक शस्त्र हो चुका है।

अगर पूरा का पूरा देश गलत मानचित्र को देखकर बड़ा होगा तो न देश रहेगा न समाज।

ऐसा नहीं है कि सोशल मीडिया से कुछ अच्छा नहीं होता। कई खबरें जो टीवी पर या अखबारों में नहीं आतीं वे सोशल मीडिया के द्वारा समाज के सामने आती हैं। भारत में नई सरकार की ताजपोशी में सोशल मीडिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

समय की आवश्यकता है कि सोशल मीडिया पर भी अंकुश हो। एक मापदंड हो सोशल मीडिया के लिए। इस मामले में भारत सरकार को कदम उठाने की आवश्यकता है। चीन से भारत सरकार काफी कुछ सीख सकती है। उम्मीद है कि भारत सरकार समय रहते इस पर उचित निर्णय करेगी, वर्ना सोशल मीडिया, एंटी सोशल मीडिया का रूप ले लेगा। और एंटी सोशल मीडिया, असुरक्षा का कारण बनेगा।

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