सामाजिक बुराइयां: देश के विकास में गिरावट का मूल कारण

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  कोई भी राष्ट्र समाज के सभी वर्गों की भागीदारी के बिना विकास पर विचार नहीं कर सकता है।  एक राष्ट्र का विकास सही दिशा में होता है जब उसके नागरिक, विशेष रूप से उसके युवा, इन दस बिंदुओं पर खुद को विकसित करते हैं: सत्य, महिमा, शास्त्रों और विज्ञान…

कोरोना से देश में बढ़ी बेरोजगारी

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सामान्य तौर पर बेरोजगार उस व्यक्ति को कहा जाता है, जो बाजार में प्रचलित मजदूरी दर पर काम तो करना चाहता है लेकिन उसे काम नहीं मिल पा रहा है। बेरोजगारी की समस्या विकसित और विकासशील दोनों  देशों में पाई जाती है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री कींस के अनुसार किसी भी देश में  बेरोजगारी अन्य किसी भी समस्या से बड़ी समस्या है।

आर्थिकी के 75 साल

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आज सभी देशों की अर्थव्यवस्था कोरोना महामारी के कारण तहस-नहस हो गई है, जिसमें भारत भी शामिल है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही और आगामी तिमाहियों में नकारात्मक वृद्धि दर्ज होने के बावजूद भारत की विकास दर वर्ष 2021 में 11% रहने का अनुमान है।

फिल्मों के लिए लोकप्रिय लोकेशन

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हाल ही में उत्तराखंड को नेशनल फिल्म अवार्ड में मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का अवार्ड भी मिला है। कुछ समय पहले फिल्म ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एफटीआई), पुणे और उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में एक कार्यशाला भी आयोजित की गई थी जिसमें बताया गया था कि प्रदेश में एक्टिंग, डिजिटल छायांकन, डिजिटल फिल्म प्रोडक्शन, स्टिल फोटोग्राफी और फिल्म मेकिंग कोर्स आरंभ किए जाएंगे जिससे, शूटिंग के लिए आने वाले निर्माताओं को दक्ष मैन-पावर भी उपलब्ध हो सकेगा।

उत्तराखंड मेरी आत्मा है मुंबई मेरा शरीर

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उत्तराखंड मेरी आत्मा है तो महाराष्ट्र का मुंबई शहर मेरा शरीर। जिस तरह आत्मा और शरीर एक दूसरे के बगैर नहीं रह सकते, उसी प्रकार उत्तराखंड और मुंबई इन दोनों के बिना मैं नहीं जी सकता।’ ऐसा कहना है मूवी मैजिक एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के एम.डी. राजेश नेगी का। मूलत: उत्तराखंड के राजेश नेगी ने अपने मुंबई तथा उत्तराखंड के अनुभव हिंदी विवेक के साथ साझा किए। प्रस्तुत है उसके सम्पादित अंश -

शिक्षण पर्यटन विकास की संभावनाएं

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शिक्षण संस्थाओं के खुलने व इन शिक्षण संस्थाओं की आवश्यकता पूर्ति हेतु बजार आदि निर्माण करना पड़ता है तो रोजगार के कई अवसर पैदा होते हैं। छात्रों के अभिभावक व रिश्तेदार भी कई बार उनके साथ पर्यटन करते हैं अतएव कई तरह के पर्यटन उत्पाद तैयार करने पड़ते हैं।

हमने बनाई किसान फ्रेंडली पॉलिसी – सुबोध उनियाल (कृषि मंत्री)

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कोरोना काल की विपरित परिस्थितियों में भी उत्तराखंड ने सर्वाधिक खेती करने का कीर्तिमान बनाया और कृषि पुरस्कार हासिल किया। इसके साथ ही जैविक खेती में उत्तराखंड देश का अग्रणी राज्य बन गया है। किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हे आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है, यह भरोसा देते हुए कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने अपने साक्षात्कार में कृषि से जुड़ी संभावनाओं, अवसरों एवं उपलब्धियों सहित सरकार की योजनाओं की चर्चा की। प्रस्तुत है उनके साक्षात्कार के प्रमुख अंश -

युवाओं को सिर्फ‘ डिग्री ‘ नहीं, रोजगार चाहिए

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नेशनल एसोशिएसन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज यानी नैसकाम के एक सर्वे के अनुसार  75 फीसदी टेक्निकल स्नातक नौकरी के लायक नहीं हैं। आईटी इंडस्ट्री इन इंजीनियरों को भर्ती करने के बाद ट्रेनिंग पर करीब एक अरब डॉलर खर्च करते हैं। इंडस्ट्री को उसकी जरुरत के हिसाब से इंजीनियरिंग ग्रेजुएट…

उत्तराखंड में उच्चशिक्षा का परिद़ृष्य

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राज्य निर्माण के समय उत्तराखंड में मात्र 34 राजकीय स्नातक एवं स्नातकोत्तर महाविद्यालय थे। सहायता प्राप्त एवं निजी महाविद्यालयों की संख्या 60 के लगभग थी जिनमें अधिकांश संस्कृत की शिक्षा से सबंधित थे। राज्य में वर्ष 2000 से पूर्व तीन राजकीय, एक डीम्ड विश्वविद्याालय और दो राष्ट्रीय महत्व के उच्चशिक्षा संस्थान थे। पिछले 20 वर्षों में उत्तराखंड में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में अभूतपूर्व संख्यात्मक वृद्धि हुई।

आप करामाती ऍप करिश्माई

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बीते डेढ़ वर्ष में कोरोना काल के दौरान जब लोग घरों में कैद रहने को विवश हो गए, तो ये ऐप उनका बड़ा सहारा बने और दुनिया को इसका एहसास हुआ कि अगर इंटरनेट न होता, वेबसाइट्स न होती और ये मोबाइल एप्स न होते, तो सच में दुनिया की चाल एकदम से थम जाती।

इंटरनेट : एक अंधेरी सुरंग

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वहां फर्जी दस्तावेज बनवाने के लिए लोग जाते हैं और नया पहचान पत्र मिल जाता है। अफगानिस्तान के लोगों को कई मुल्कों में प्रवेश नहीं है। उनका पासपोर्ट भारत में बनाकर उन्हें विदेश भेजने वाला गिरोह दिल्ली के जंगपुरा-भोगल इलाके में सक्रिय रहा है। बताया जाता है कि नए पहचान पत्र से लेकर पासपोर्ट बनाने तक की उनकी यात्रा में डार्क नेट का बहुत बड़ा योगदान है।

बस एक क्लिक की बात है…

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मानव ने अपनी सुविधा के लिए इंटरनेट का आविष्कार किया है। इसके आधार पर नित्य नूतन आविष्कार हो रहे हैं परंतु अगर मनुष्य इसकी मर्यादा भूलकर स्वयं को उसके अधीन कर दे तो निश्चित ही समस्या का सामना करेगा। इंटरनेट के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करने या कुछ देर के मनोरंजन तक उसे सीमित कर दें, उसे अपने ऊपर हावी न होने दें, क्योंकि बात केवल एक क्लिक की है जो या तो हमारे ज्ञान में वृद्धि करेगी या हमें उस्तरा थामने वाला बंदर बनायेगी।

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