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अगर आप स्वस्थ हैं, आपकी काया कोमल और कांतिमय है, तो आपको अधिक मेकअप की जरूरत नहीं, क्योंकि यह मेकअप स्थायी नहीं होता। अतः अधिक मेकअप से परहेज करें। घरेलू प्रसाधनों का अधिक उपयोग कर अपने आप को सदाबहार बनाए रखें।

सौंदर्य सृष्टि का आकर्षण है। नारी को सुंदरता का प्रतीक माना गया है। पुरातन काल से आज तक उसने अपने सौंदर्य की रक्षा स्वयं की है। इसमें प्रकृति की अहम् भूमिका है। आज का युग वैज्ञानिक एवं आधुनिक युग है। इस युग में चमत्कारिक परिवर्तन हुए हैं, जो अतीत से चलते-चलते आज के फैशन युग तक पहुंचे हैं।

सुंदर दिखना किसे अच्छा नहीं लगता। अपने सौंदर्य को सम्भालना व कायम रखना, अपने आप में एक कला है। इसके लिए पुरातन काल से आधुनिक काल तक नारी प्रयत्नशील रही है। हम भारतीयों के घरेलू नुस्खे इतनी एहमियत रखते हैं, कि वर्तमान में उन्हीं के आधार पर बड़ी-बड़ी कास्मेटिक कम्पनियां और कारखाने चल रहे हैं।

सौंदर्य का साम्राज्य नख से शिख तक फैला हुआ है। बालों से चेहरे की खूबसूरती निखरती है। पुरानी समय में नियमित रूप से सिर में तेल लगाया जाता और नियम से बालों की देख-रेख होती थी। तब बाल काले, घने, लम्बे व खूबसूरत होते थे। बूढ़े होने तक न झड़ते थे, न पकते थे।

आजकल रूखे बालो का जमाना है। बालों से तेल नदारद है। लम्बे बाल मुसीबत लगते हैं। बाल कटवा कर खुले रखने का चलन है। इतना ही नहीं बालों की तो इतनी सत्यानाशी है, कि उसे कलरिंग, स्ट्रेट, कर्ली करवाकर बेजान सा कर चुके हैं। जब झड़ने लगते हैं तो चिंता होने लगती है कि समय से पहले टकले न हो जाए। तब टी. वी. के इस्तेहारों का सहारा ले, तरह-तरह के तेल लगाकर पार्लर जा बालों को बचाने की कोशिश व सर्च प्रारम्भ हो जाता है। आप गंजे होने से बचना चाहते हैं, तो इसे अवश्य ही आजमाइये-“नारियल के तेल में” एक प्याज बारिक काटकर प्याज काला होने तक तेल गरम करें। ठंडा होने पर छान लें। इस तेल से बालों की रोज़ अच्छी मालिश करेें, कम से कम एक घंटा रखें, बाद में धो लें। बालों का झड़ना शर्तिया बंद हो जाएगा।”

साफ्ट स्किन किसे अच्छी नही लगती। पहले तेल की मालिश से शरीर लाभान्वित होता था, क्योंकि त्वचा की खूब अच्छी देख-रेख स्वाभाविक तौर पर हो जाती थी। इसलिए स्किन प्रॉबलम् भी बहुत कम, नहीं के बराबर होते थे। आजकल स्किन की शिकायतों की भरमार है, क्योंकि स्वाभाविकता एवं बनावटीपन में अंतर तो होता ही है। उपभोक्ता रिएक्शन परेशान है, आए दिन समस्याएँ मुँह बायें खड़ी रहती हैं।

हमारे घरेलू उपचार या प्रसाधनों में उबटन का विशेष महत्वपूर्ण स्थान है। आजकल से महंगे प्रोडेक्टस् फेस पॅक, क्रीम, लोशन, लिक्विड आदि उबटन के आगे फीके हैं। क्योंकि इसके प्रयोग से हमारी त्वचा चमकदार, साफ सुथरी शुध्द व मुलायम हो उठती है। बेसन, दूध, दही, मलाई, हल्दी व शहद का कॉम्बिनेशन इतना जबरदस्त होता है कि फेशियल, पेडिक्योर आदि सब एक साथ हो जाते हैं। जिससे व्यक्तित्व में निखार आ जाता है। इसी संदर्भ में मिट्टी का विशेष उपयोग है। सुनने में बड़ी विचित्र व अटपटी लगने वाली काली चिकनी मिट्टी या मुलतानी मिट्टी से भी खूबसरती के फेस पैक तैयार किए जाते हैं। हमारे पूर्वज साबुन या शैंपू को जानते तक न थे। (इनसे शैंपू व साबुन का असरदार प्रभाव पड़ता है।)

फल, फूल व सब्जियां हमारी प्राकृतिक सम्पदा हैं। हमारे सौंदर्य प्रसाधनों में चार चांद लगाते हैं। फूल सौंदर्य निखारने का काम करते ही हैं; इनके रस से कई प्रकार के तेल, इत्र, सेंट, उबटन, रूम फ्रेशनर, अगरबत्ती, धूप, फेस पैक, पावडर क्रीम, वैसलीन, हेयर ऑयल आदि न जाने कितनी वस्तुएं बनती हैं। सुगंधित फूलों से वातावरण में ताजगी आ जाती है। मन प्रसन्न हो उठता है। गुलाब, मोगरा, जाई, जूही, चम्पा अनेक सुगंधित फूल सौंदर्य प्रसाधनों में उपयोग में लाए जाते हैं।

फलों का रस पीने से शक्ति के साथ-साथ त्वचा में साफ्टनेस आती है। आंखों के नीचे कालेपन को दूर करने के लिए, चेहरे की त्वचा कोे गोरा बनाने के लिए इन फलों के फेस पैक तैयार कर उपयोग में लाए जाते हैं, जिससे चेहरे का रूप ही बदल जाता है। सौंदर्य प्रसाधनों में सब्जियां भी पीछे नहीं हैं। आलूू, टमाटर, ककड़ी, गाजर, मूली, प्याज, कच्चा पपीता आदि अनेक सब्जियां अपने गुणों और तासीर के कारण फेस पैक व अन्य के काम आती हैं। ये घरेलू प्रसाधन हैं जो अत्याधुनिक प्रसाधनों की अपेक्षा कम खर्च में हमारे सौंदर्य को निखार कर बहार ला देते हैं। जिसकी बराबरी आजकल का कोई भी प्रोडेक्ट नहीं कर सकता। उन महंगे प्रसाधनों से ये फायदे इतनी आसानी से प्राप्त होना सम्भव नहीं, उल्टे रिएक्शन का भय भी बना रहता है।

सभ्यता के विकास के साथ-साथ जीवन स्तर प्रगति की ओर बढ़ता चला गया। इस चहुंतरफा प्रगति ने मनुष्य को ऐसा घेर लिया कि उसके पास अपने आप के लिए वक्त ही न बचा। इस समयाभाव की कमी ने, एवं काम की अधिकता ने मनुष्य को आलसी बना दिया। धीरे-धीरे प्रगति की सीढ़ियां चढ़ते हम अपने आप से लापरवाह होनेेे लगे। अपने आप से दूर होने लगे। अधिक पैसा कमाने की लालसा ने अपने आप में ही जकड़ लिया।

पहले हमारे पास समय ही समय था। हम अपनी आवश्यकतानुसार अपनी देख-भाल स्वयं करते थे। घर में दादी या नानी होती थी। उनकी सलाह से हमारी अधिकांश समस्याएं हल हो जाती थीं किंतु अब न संयुक्त परिवार है, न कोई सलाह देने वाला।

इंसान की सम्पन्नता के साथ उसकी अनेक परेशानियां भी बढ़ती हैं। अब पैसा अधिक है, पर समय की कमी है। अपनी सुविधा के लिए बाजार की दौड़ लगाते हैं। कभी-कभी बजट नहीं होता, पर सुंदर तो दिखना है, और अपनी सुंदरता को कायम रख सम्भालना भी है। समय से पहले बूढ़ा होना किसे अच्छा लगता है?

समयाभाव की परेशानी हमें ब्यूटी पार्लर तक खींच ले जाती है, क्योंकि ब्यूटी पार्लर का सीधा सम्बध सौंदर्य से होता है। जहां हम बड़े सुकून से अपना फेशियल, पेडिक्योर, मसाज, बालों की शैंपू करवाते हैं। बालों को इच्छानुसार कटवाते हैं। किसी पार्टी, समारोह या शादी के रिसेप्शन में जाना हो, तो पूरा मेकअप करवाते हैं। निस्संदेह, मेकअप करने से खुबसूरती में चार चांद लग, चेहरे  पर निखार आ जाता है। व्यक्तित्व पर प्रभाव पड़ता है। सबके बीच आकर्षण का केन्द्र बन, मन भी प्रसन्न हो उठता है। किसे अपनी तारीफ अच्छी नहीं लगती? इसलिए ब्यूटी-पार्लर जा मेकअप करवाना अनिवार्य सा हो गया है। क्योंकि यहां प्रतिष्ठा का भी सवाल सम्मुख होता है।

ब्यूटी पार्लर का सुख अति सुखद होने के साथ काफी महंगा होता है। यह सम्पन्न परिवारों का शौक है। यह साधारण लोगों के बस के बाहर की बात है, किंतु आजकल यह आम बात हो गई है। इसलिए घर-घर में ब्यूटी पार्लर खुल गए हैं, जिसका अच्छा खासा व्यवसाय खड़ा हो गया है। महंगे व अच्छे पार्लर के अलावा सस्ते व साधारण पार्लर भी बड़ी रफ्तार से चल पड़े हैं। कभी-कभी इसके दुष्प्रभाव भी दृष्टिगोचर होते हैं। कामकाजी महिलाओं के पास तो दूसरा विकल्प भी नहीं है। बार-बार मेकअप तत्वों का प्रयोग स्किन पर दुष्परिणाम भी डालता है। स्थिति ये हो जाती है कि बिना मेकअप के चेहरा विकृत दिखने लगता है। फिल्म इंडस्ट्री के एक्टर, ऐक्ट्रेस को हम बिना मेकअप के पहचान भी नहीं पाएंगे।

अगर आप स्वस्थ हैं, आपकी काया कोमल और कांतिमय है, तो आपको अधिक मेकअप की जरूरत नहीं, क्योंकि यह मेकअप स्थायी नहीं होता। जैसे ही आप ‘फेस वाश’ करोगे, आपके पैसे पानी में बह जाएंगे। इसलिए अधिक मेकअप से परहेज करना जरूरी है। अत: घरेलू प्रसाधनों का अधिक उपयोग कर अपने आप को सदाबहार बनाए रखें।

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