फैशन के नाम पर फूहड़पन सिखा रहे जावेद हबीब!

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भारत में अभी पानी की समस्या इतनी नहीं हुई है कि पानी की जगह थूक का इस्तेमाल करना पड़े, लेकिन ऐसा ही एक विडियो वायरल हो रहा है जिसमें पानी ना होने पर थूक का इस्तेमाल करने की नसीहत दी जा रही है और यह नसीहत कोई आम आदमी नहीं दे…

नये कपड़े और सेल्फी, क्या यही है हमारी दिवाली ?

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भारतीय संस्कृति में दिए जलाना सिर्फ एक त्यौहार नहीं बल्कि एक श्रद्धा और आदर का भाव होता है। हम दिए सिर्फ बाहर प्रकाश या दिखावे के लिए नहीं जलाते हैं बल्कि इससे मन के अंधकार को भी कम करते है। तेजी से बदलते परिवेश में दिए की जगह को अब…

सर्दियों के लिये तैयार है ना…

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सर्दियों के मौसम में पिकनिक पर जाने का या घूमने जाने का मजा ही कुछ और होता है। अब जबकि धीरे-धीरे देश अनलॉक हो रहा है, आप पूरी अहतियात बरत कर घूमने जाने का प्लान बना सकते हैं, या आप एक दिन भर के लिये ही परिवार वालों के साथ कहीं पिकनिक पर जा सकते हैं या कहीं लाँग ड्राइव्ह पर जाकर आ सकते हैं। आप लंबी यात्रा भी कर सकते हैं, लेकिन कोरोना के समय में अधिक लंबी यात्रा ना करें तो ही अच्छा रहेगा।

स्टाइल का विज्ञान फैशन साइकोलॉजी

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फैशन शब्द पढ़ने या सुनने में जितना आसान प्रतीत हो रहा है, वास्तव में यह उतना आसान है नहीं। ’फैशन साइकोलॉजी’ का दायरा कपड़े और मेकअप से ज्यादा विस्तृत है।

फैशन का गृहप्रवेश, माध्यम फिल्में

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फिल्में, यद्यपि आती जाती रहती हैं फिर भी समाज से फैशन का रिश्ता कायम रहता है। समाज उसमें भी कुछ नया ढूंढ़ने की कोशिश करता है। फैशन को बढ़ाने में फिल्मों का बहुत बड़ा योगदान है।

रुपहले परदे पर बरकरार फैशन की चमक

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गुजरे ज़माने की फिल्मों में फैशनेबल कपड़ों का चलन काफी कम था और कलाकारों की ड्रेस कम बजट और स्थिति को देखते हुए तय की जाती थी, लेकिन आज ब्राण्ड का दौर है, कंपनियों की लाइन लगी हुई है और हर शुक्रवार यहां फैशन बदलता है।

फैशन उद्योग

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भारतीय फैशन उद्योग का देश के कुल औद्योगिक उत्पादन में 14 प्रतिशत हिस्सा है और सकल घरेलू उत्पाद का 8 प्रतिशत इसी उद्योग से प्राप्त होता है। इतना ही नहीं भारतीय फैशन उद्योग लगभग 38 मिलियन लोगों को स्वरोजगार एवं रोजगार प्रदान करता है। इस उद्योग में एक बार पहचान बन जाए तो अपार संभावनाओं के द्वार खुलते हैं।

कामकाजी महिलाओं की फैशन

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महिलाएं जॉब क्या करने लगीं, कई वर्गों में बंट गईं। गरीब, अर्ध-मध्यम और मध्यम वर्ग के अपने-अपने पैमाने बन गए। उनके फैशन के भी मानक बदल गए। माना कि हर सिक्के के दो पहलू हैं- नकारात्मक और सकारात्मक। जरा देखें कहां पहुंचना चाहते हैं हम-

मेंहदी लगा के रखना…

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मेंहदी केवल श्रृंगार की ही वस्तु नहीं है, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर है। मेंहदी शादी-ब्याह में रस्म का हिस्सा है। मेंहदी से मनपसंद टैटू भी आजकल बनाए जाते हैं। भारत समेत पूर्वी देशों में मेंहदी जीवन का अभिन्न अंग है।

फैशन की मारी दुनिया बेचारी

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“मुझे पहली बार पता चला कि आजकल कम कपड़ों में, नंगे या फटे कपड़ों में घूमना ही बड़े होने और फैशन की निशानी है। और वास्तव में यह शर्म का नहीं बल्कि गर्व का विषय है।”

मुस्लिम महिलाओं के पेहराव और फैशन

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इस्लामी संस्कृति में परिधानों के कई प्रकार हैं। उन पर भी तरह-तरह की कारीगरी से चार चांद लग जाते हैं। गत कुछ वर्षों से ब्यूटी कांटेस्ट- सौंदर्य स्पर्धाओं- में इस्लामी लिबास में महिला स्पर्धक भाग लेती दिखाई देती हैं। इस्लामी फैशन डिझाइनें भी बदलते समय के अनुसार बदल रही हैं।

फैशनेबल बचपन

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बच्चे भी फैशन के दीवाने हैं। रैम्प पर चलने वाले ये नन्हें कदम इतने आत्मविश्वास से भरे होते हैं कि इनके सामने हर फैशन फीकी दिखाई देती है।

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