सर्व समावेशी लोक कलाएं

Continue Readingसर्व समावेशी लोक कलाएं

लोगों के समूह की भावनात्मक दुनिया की कलात्मक अभिव्यक्ति ही लोककला है। ऐसे लोकजीवन में अभी तक जी जान से संभाल कर रखी हुई संस्कृति खंडित होती जा रही है। बदलती हुई ग्राम व्यवस्था, पर्यावरण में होने वाले अकल्पनीय परिवर्तन, विघटित सामाजिक संरचना, घटते हुए जीवन मूल्य ऐसे अनेक कारण परिवर्तन के लिए जिम्मेदार हैं।

खरीदारी सबसेऽऽऽ सुखद अनुभूति

Continue Readingखरीदारी सबसेऽऽऽ सुखद अनुभूति

किसी भी महिला के जीवन के सबसे सुखद क्षणों में से एक होता है, जब वह अपनी खरीदारी के शौक के पलों को जी रही होती है। उस समय उस महिला के चेहरे पर जो मुस्कान होती है, उसका मोल चुकाया नहीं जा सकता क्योंकि उसके कुछ क्षणों के पश्चात् ही उस परिवार के पुरुष की जेब ढीली हो चुकी होती है।

दिखावा तन ढंकने से ज्यादा जरूरी है…

Continue Readingदिखावा तन ढंकने से ज्यादा जरूरी है…

भौतिक जीवन हम सब पर इतना अधिक हावी हो चुका है कि हमने शरीर ढंकने वाले वस्त्रों को भी शानोशौकत की वस्तु बना लिया है। महंगे कपड़े और उनके दुहराव से बचने की प्रवृत्ति बेमतलब का बोझ लाद रही है। आवश्यकता है कि पश्चिम के अनुकरण के नाम पर बहने की बजाय भारतीय परिवेश और मौसम के अनुकूल कपड़ों का चयन करें।

संगीत स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर

Continue Readingसंगीत स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर

लता मंगेशकर को गायन के लिए देश और विदेश में हजारों पुरस्कार और सम्मान मिले हैं। कला के क्षेत्र में उनकी व्यापक सेवाओं को देखते हुए राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया। उन्हें पद्मभूषण, पद्म विभूषण और सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ भी दिया गया है। अधिक अवस्था के कारण अब उन्होंने गाना कम कर दिया है। फिर भी आध्यात्मिक रुचि होने के कारण वे धार्मिक भजन आदि गा लेती हैं।

क्रीएटिव फ़्रीडम के नाम पर बॉलीवुड का षड्यंत्र

Continue Readingक्रीएटिव फ़्रीडम के नाम पर बॉलीवुड का षड्यंत्र

आज समझ में आता है कि.... क्रीएटिव फ़्रीडम के नाम पर कोई षड्यंत्र चल रहा है ! अब यह षड्यंत्र असहय हो गया है ! महिला पायलट के जीवन पर उन्ही के नाम से बनी फ़िल्म  में ही वायुसेना अधिकारी महिला छेड़ते हैं।  महिला चीख चीख कर कह रही है कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई ! पर निर्लज्ज बोलिवुड हंस कर कहता है ,”क्रीएटिव फ़्रीडम है !!“ दुख इस बात का नहीं पैसे के लिए बालीवुड बिक गया  भोली जनता पैसे खर्च कर  बालीवुड के पास  जो भी जाता है उसे देशद्रोह प्यारा और देशभक्ति त्याज्य लगने लगती है !

फैशन के नाम पर फूहड़पन सिखा रहे जावेद हबीब!

Continue Readingफैशन के नाम पर फूहड़पन सिखा रहे जावेद हबीब!

भारत में अभी पानी की समस्या इतनी नहीं हुई है कि पानी की जगह थूक का इस्तेमाल करना पड़े, लेकिन ऐसा ही एक विडियो वायरल हो रहा है जिसमें पानी ना होने पर थूक का इस्तेमाल करने की नसीहत दी जा रही है और यह नसीहत कोई आम आदमी नहीं दे…

नये कपड़े और सेल्फी, क्या यही है हमारी दिवाली ?

Continue Readingनये कपड़े और सेल्फी, क्या यही है हमारी दिवाली ?

भारतीय संस्कृति में दिए जलाना सिर्फ एक त्यौहार नहीं बल्कि एक श्रद्धा और आदर का भाव होता है। हम दिए सिर्फ बाहर प्रकाश या दिखावे के लिए नहीं जलाते हैं बल्कि इससे मन के अंधकार को भी कम करते है। तेजी से बदलते परिवेश में दिए की जगह को अब…

सर्दियों के लिये तैयार है ना…

Continue Readingसर्दियों के लिये तैयार है ना…

सर्दियों के मौसम में पिकनिक पर जाने का या घूमने जाने का मजा ही कुछ और होता है। अब जबकि धीरे-धीरे देश अनलॉक हो रहा है, आप पूरी अहतियात बरत कर घूमने जाने का प्लान बना सकते हैं, या आप एक दिन भर के लिये ही परिवार वालों के साथ कहीं पिकनिक पर जा सकते हैं या कहीं लाँग ड्राइव्ह पर जाकर आ सकते हैं। आप लंबी यात्रा भी कर सकते हैं, लेकिन कोरोना के समय में अधिक लंबी यात्रा ना करें तो ही अच्छा रहेगा।

स्टाइल का विज्ञान फैशन साइकोलॉजी

Continue Readingस्टाइल का विज्ञान फैशन साइकोलॉजी

फैशन शब्द पढ़ने या सुनने में जितना आसान प्रतीत हो रहा है, वास्तव में यह उतना आसान है नहीं। ’फैशन साइकोलॉजी’ का दायरा कपड़े और मेकअप से ज्यादा विस्तृत है।

फैशन का गृहप्रवेश, माध्यम फिल्में

Continue Readingफैशन का गृहप्रवेश, माध्यम फिल्में

फिल्में, यद्यपि आती जाती रहती हैं फिर भी समाज से फैशन का रिश्ता कायम रहता है। समाज उसमें भी कुछ नया ढूंढ़ने की कोशिश करता है। फैशन को बढ़ाने में फिल्मों का बहुत बड़ा योगदान है।

रुपहले परदे पर बरकरार फैशन की चमक

Continue Readingरुपहले परदे पर बरकरार फैशन की चमक

गुजरे ज़माने की फिल्मों में फैशनेबल कपड़ों का चलन काफी कम था और कलाकारों की ड्रेस कम बजट और स्थिति को देखते हुए तय की जाती थी, लेकिन आज ब्राण्ड का दौर है, कंपनियों की लाइन लगी हुई है और हर शुक्रवार यहां फैशन बदलता है।

फैशन उद्योग

Continue Readingफैशन उद्योग

भारतीय फैशन उद्योग का देश के कुल औद्योगिक उत्पादन में 14 प्रतिशत हिस्सा है और सकल घरेलू उत्पाद का 8 प्रतिशत इसी उद्योग से प्राप्त होता है। इतना ही नहीं भारतीय फैशन उद्योग लगभग 38 मिलियन लोगों को स्वरोजगार एवं रोजगार प्रदान करता है। इस उद्योग में एक बार पहचान बन जाए तो अपार संभावनाओं के द्वार खुलते हैं।

End of content

No more pages to load