डावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के माध्यम से मध्य प्रदेश ने विश्व आर्थिक मंच पर अपनी नीतिगत स्थिरता, प्रशासनिक पारदर्शिता और प्रभावी विकास यात्रा की प्रस्तुति दी। दावोस की इस सहभागिता से संपूर्ण विश्व को यह संदेश गया कि मध्य प्रदेश राज्य निवेशकों के लिये महत्वपूर्ण है। फोरम में मध्य प्रदेश की प्रस्तुति के बाद कुछ महत्वपूर्ण निवेश करार भी हुये।
दावोस स्विट्जरलैंड का एक पहाड़ी नगर है। यह नगर “स्की रिजॉर्ट” के तौर पर जाना जाता है और वर्ष भर संसार भर के सैलानी यहाँ पर्यटन के लिये आते हैं। लेकिन इस नगर की वास्तविक पहचान “वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम” के लिये है। इस फोरम के अंतर्गत प्रतिवर्ष जनवरी माह में यहाँ संसार भर के आर्थिक विशेषज्ञ, उद्योगपति और राजनेता अथवा उनके प्रतिनिधि एकत्र होते हैं। जिसमें संसार उन बड़ी समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा की जाती है। जो आने वाले समय में आर्थिक अथवा सामाजिक शैली पर आने वाली होती हैं।
“वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम” अर्थात “विश्व आर्थिक मंच” की स्थापना 24 जनवरी 1971 में एक जर्मन प्रोफेसर और अर्थशास्त्री क्लाउस श्वाब ने की थी। तब वे यहाँ अपने कुछ आर्थिक विशेषज्ञ मित्रों के साथ पर्यटन के लिये आये थे। चर्चा ने गंभीरता का मोड़ लिया और फोरम की स्थापना हो गई। चूँकि पहली चर्चा डावोस में हूई थी इसलिए इसका मुख्यालय प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर स्विट्जरलैंड के इस डावोस नगर को ही बनाया गया। तब से प्रतिवर्ष जनवरी माह में जनवरी माह में यह सम्मेलन होता है।
आरंभ में यह संगठन केवल यूरोपीय देशों तक ही सीमित था और इसका नाम भी “यूरोपीय प्रबंधन मंच” अर्थात “यूरोपीय मैनेजमेंट फोरम” था। वर्ष 1987 में इसका विस्तार हुआ और अब इसे “विश्व आर्थिक मंच” के नाम से जाना जाता है। यह एक स्वतंत्र संगठन है। इस पर संसार के किसी राजनैतिक सत्ता का नियंत्रण नहीं है।
समय के साथ विश्व आर्थिक मंच के (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) के वार्षिक सम्मेलन में एक विशेषता और आरंभ हुई। इसमें संसार और समाज के बदलते स्वरूप के आधार पर आने वाली चुनौतियों और आर्थिक विकास के स्वरूप पर चर्चा आरंभ हुई। अब इस फोरम पर चर्चा के लिये प्रतिवर्ष का एक विषय निर्धारित होता है। गत वर्ष 2025 का विषय “बुद्धिमान युग के लिए सहयोग” था। जबकि इस वर्ष “संवाद की संभावना” विषय पर चर्चा हुई।
इस वर्ष यह सम्मेलन 19 से 24 जनवरी के बीच आयोजित हुआ। इसमें संसार भर के प्रमुख अर्थशास्त्रियों के अतिरिक्त लगभग 400 से अधिक राजनीतिक नेता और संसार की प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों के 850 से अधिक प्रतिनिधि सम्मिलित हुये। राजनेताओं में 60 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष अथवा सरकार के प्रमुख शामिल हुये।
विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) के अब तक हुये किसी भी वार्षिक अधिवेशन में यह संख्या सर्वाधिक है। इस वर्ष विश्व आर्थिक मंच के अलग अलग सत्रों में ग्लोबल इकोनॉमी, विश्व की बदलती तकनीक, एआई का बढ़ता प्रभाव, गुणवत्ता, पर्यावरण और रोजगार की उपलब्धता आदि विषय एवं विकास की स्पर्धा से विश्व पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा हुई।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के इस आयोजन विशाल और विशिष्ट समागम में इस वर्ष मुख्य मंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधि मंडल की सहभागिता भी मध्य प्रदेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण आयाम जुड़ा।
मध्य प्रदेश की सहभागिता और प्रस्तुति
सामान्यतः मध्य प्रदेश ने विश्व स्तर इंवेस्टमेंट समिट भी आयोजित किये हैं और संसार के निवेशकों को आमंत्रित करने के लिये मध्य प्रदेश की विशेषता भी बताई है। लेकिन डावोस के इस आर्थिक मंच पर अपने विषय की प्रस्तुति अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है। इस वैश्विक आर्थिक मंच पर मध्य प्रदेश ने 20 जनवरी को अपनी प्रस्तुति दी, जो बहुत ही प्रभावी रही। इससे पूरा संसार मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास और भविष्य की संभावनाओं से परिचित हुआ। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम पर मध्य प्रदेश द्वारा जिन विषयों पर अपनी बात रखी गई- उनमें ऊर्जा, तकनीक, पर्यटन, कृषि, शिक्षा आदि विषय प्रमुख थे।
निवेश पर विशिष्ट बैठकें
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम पर मध्य प्रदेश द्वारा की गई अपनी प्रस्तुति के साथ कुछ महत्वपूर्ण संस्थानों और प्रतिनिधियों से निवेश करार पर भी चर्चा हुई। इनमें मुख्य मंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा के बाद डीपी वर्ल्ड और मध्य प्रदेश सरकार के बीच पवारखेड़ा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स एवं इंडस्ट्रियल/फूड पार्क परियोजना के लिए कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए। यह परियोजना एग्री-इन्फ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और वैल्यू चेन को मजबूती देगी।
मुख्य मंत्री डॉ. मोहन यादव की मालदीव के आर्थिक विकास एवं व्यापार मंत्री मोहम्मद सईद से द्विपक्षीय वार्ता हुई जिसमें पर्यटन, चिकित्सा पर्यटन, शिक्षा, वन्यजीव संरक्षण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर सहमति बनी।

“रिन्यू पॉवर” के सीईओ के साथ संवाद में डेटा सेंटर, डिजिटल इकोनॉमी और स्वच्छ ऊर्जा आधारित विकास पर सहमति बनी।
मैनचेस्टर यूनाइटेड के निदेशक से खेल विकास और खेल पर्यटन पर चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश को उभरते खेल हब के रूप में विकसित करने की रणनीति तथा उज्जैन में अंतर्राष्ट्रीय योग सम्मेलन एवं स्थायी योग केंद्र की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
मुख्य मंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ गये अधिकारियों और प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों ने वैश्विक निवेशकों और तकनीकी नेतृत्व के साथ बहु-क्षेत्रीय सहयोग पर व्यापक संवाद भी किया। जिन महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई उनमें नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण पर अमारा राजा समूह, ग्रीन एनर्जी-3000, IREDA और पीस इन्वेस्ट के साथ महत्वपूर्ण चर्चा, मध्य प्रदेश की ओर से मुरैना में संचालित बैटरी स्टोरेज परियोजना और 24×7 नवीकरणीय ऊर्जा रणनीति को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुति, पंप स्टोरेज, हाइब्रिड ऊर्जा मॉडल (सौर-जल, सौर-तापीय) और को-इन्वेस्टमेंट आधारित परियोजनाओं पर निवेश की संभावना, जापान बैंक (JBIC) के साथ येन ऋण, विनिर्माण, सौर एवं नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग की संभावनाओं पर मंथन, रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ चंबल अंचल में बायो-एनर्जी परियोजनाओं पर चर्चा, मध्य प्रदेश की प्रस्तुति के बाद इजराइल इनोवेशन अथॉरिटी के साथ क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडटेक, रक्षा तकनीक और जल समाधान पर नवाचार सहयोग पर सहमति भी बनी।
भारत-इजराइल सहयोग के तहत पायलट प्रोजेक्ट्स, टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेशन और सह-निवेश मॉडल पर आगे बढ़ने का निर्णय हुआ। एआई और डीप-टेक क्षेत्र में टच लैब के साथ साइबर सुरक्षा, गेमिंग और डिजिटल इनोवेशन पर सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की गईं।
इसके अतिरिक्त नाट्रैक्स को एडवांस्ड मोबिलिटी, एआई-आधारित टेस्टिंग और नेक्स्ट-जेन टेक एप्लिकेशंस के लिए रणनीतिक परिसंपत्ति के रूप में प्रस्तुति, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा के साथ टियर-2 शहरों में आईटी, बीपीओ और जीसीसी/ओडीसी विस्तार पर संवाद, शिरू कंपनी के साथ एआई आधारित प्रोटीन नवाचार, कृषि-आधारित इनपुट्स और अनुप्रयुक्त अनुसंधान पर सहयोग पर चर्चा, विश्वविद्यालयों, कृषि अनुसंधान संस्थानों और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम के माध्यम से पायलट प्रोजेक्ट्स और सह-विकास पर चर्चा, जियोस्टार और ब्लूमबर्ग मीडिया के साथ पर्यटन ब्रांडिंग और वैश्विक नीति-व्यापार मंचों पर मध्य प्रदेश की उपस्थिति पर चर्चा हुई।

इन चर्चाओं में मध्य प्रदेश में भविष्य की संभावनाओं, यातायात के लिये विश्व कनेक्टिविटी और रेडी-टू-मूव-इन ऑफिस स्पेस की सुविधा को प्रमुखता के साथ रखा गया। मुख्य मंत्री डॉ. मोहन यादव और और मध्य प्रदेश प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों ने समग्र रूप से, मध्य प्रदेश में निवेश के लिये अनुकूल नीतियों, स्थिर प्रशासन और भविष्य-तैयार विजन वाले राज्य के रूप में प्रस्तुत किया। इससे प्रभावित होकर दुनियाँ के कई बड़े औद्योगिक संस्थानों और निवेशकों ने मध्य प्रदेश आने के लिये अपनी रूचि भी दिखाई।
मध्य प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल की इस डावोस यात्रा में ग्लोबल साउथ के लिए तैयार द मेरिडियन कलेक्टिव (TMC) प्लेटफ़ॉर्म का शुभारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य उप-राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा परिवर्तन और औद्योगिक डिकार्बोनाइज़ेशन को गति देना है। इसके माध्यम से निजी पूंजी, तकनीकी विशेषज्ञता और वैश्विक नेटवर्क को राज्यों से जोड़ा जाएगा। अनुमान है कि इससे इससे मध्य प्रदेश को 2030 तक 40–50% नवकरणीय ऊर्जा और 2050 से पहले नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने में सहयोग मिलेगा।
जिन विषयों पर मध्य प्रदेश की प्रगति और विकास नीति को इस वैश्विक मंच पर सराहा गया उनमें नवकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन पर मध्य प्रदेश की पारदर्शी नीति विशेष कर कैलेण्डर जारी करने जैसे विषय रहे।
मध्य प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने यह भी स्पष्ट किया कि लक्ष्य केवल निवेश आकर्षित करना भर नहीं है अपितु युवाओं को रोजगार, किसानों को समृद्धि, महिलाओं का सशक्तिकरण के द्वारा मध्य प्रदेश को आत्मनिर्भर और विकसित प्राँत बनाना है।
मध्य प्रदेश की इस प्रस्तुति से आने वाले समय में निवेश के लिये एक महत्वपूर्ण राह बनी है। वस्तुतः औद्योगिक निवेश के लिये तीन बिन्दु बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। जिनमें सबसे पहला बिजली पानी और यातायात की सहज उपलब्धता, दूसरी स्थानीय प्रशासन की पारदर्शी नीतियाँ एवं कार्यशैली और तीसरा महत्वपूर्ण बिन्दु उस क्षेत्र में उत्पाद की उपयोगिता एवं खपत। इन तीनों प्राथमिकताओं की दृष्टि से अब मध्य प्रदेश की गणना भारत के अग्रणी राज्यों में होने लगी है।
पन्द्रह वर्ष पहले मध्य प्रदेश ने बिजली के उत्पादन और सड़क निर्माण की दिशा में जो गति पकड़ी थी वह यथावत रही। इस दिशा में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में काम कर रही वर्तमान सरकार ने उसमें और तेजी प्रदान की है। डॉ. मोहन यादव ने न केवल इन प्राथमिकता को गति दी अपितु हवाई मार्गों का का भी विस्तार किया है। निवेशकों का विश्वास अर्जित करने के लिये नीति नियमों का सरलीकरण किया और अतिरिक्त सुविधाएँ भी बढ़ाई। यही बात निवेशकों को मध्य प्रदेश आने के लिए आकर्षित कर रही है।
डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस सरकार द्वारा किये गये नवाचारों का ही परिणाम है कि केवल 2 वर्षो में लगभग 33 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश करार हुये, जिसमें लगभग 30 प्रतिशत निवेश करार जमीन पर आकार भी लेने लगे हैं।
दावोस के विश्व आर्थिक मंच पर मध्य प्रदेश की इस सक्रिय, सशक्त और प्रभावी सहभागिता और उसके परिणामों से एक बात बिल्कुल स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश की छवि अब केवल भारत तक सीमित नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना स्थान बना रहा है।
मध्य प्रदेश की विकास यात्रा भारत के राज्यों में अग्रणी होने की ओर तेजी से आगे बढ़ रही। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विश्व का विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। यह तभी पूरा होगा जब भारत का प्रत्येक राज्य विकसित होगा।
मुख्य मंत्री डॉ. मोहन यादव ने उसी दिशा में कदम बढ़ाये हैं। डावोस से लौटकर उन्होंने इसका संकेत भी दिया और इसका श्रेय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को ही दिया। मुख्य मंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2025 को औद्योगिक वर्ष और वर्ष 2026 को कृषि विकास वर्ष के रूप में घोषित किया है। डावोस में हुई वाताएँ और उनके परिणाम इन दोनों उद्देश्यों की पूर्ति में एक महत्वपूर्ण आयाम है।
– रमेश शर्मा

