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भारत : नेतृत्व, समाधान और संतुलन का प्रतीक

भारत : नेतृत्व, समाधान और संतुलन का प्रतीक

by हिंदी विवेक
in फरवरी 2026, विशेष, समाचार..
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वर्ष 2026 में भारत में होनेवाले एआई इम्पैक्ट समिट, वर्ल्ड सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट, भारत-अफ्रीका फोरम समिट, भारत-जापान समिट तथा ब्रिक्स की अध्यक्षता के माध्यम से भारत वैश्विक मंच पर मार्गदर्शक और निर्णायक भूमिका निभाएगा।

विश्व व्यवस्था इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। जलवायु परिवर्तन, तकनीकी असंतुलन, भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक विषमता और सांस्कृतिक टकराव जैसे जटिल प्रश्नों से जूझता विश्व आज ऐसे नेतृत्व की खोज में है, जो केवल शक्ति और प्रभुत्व का प्रदर्शन न करे बल्कि समाधान, संतुलन और संवेदना के साथ आगे बढ़ने की क्षमता रखता हो। शीत युद्ध के बाद बनी वैश्विक संरचनाएं आज अपनी सीमाएं प्रकट कर रही हैं और एक नए, अधिक समावेशी तथा मानवीय विश्व क्रम की आवश्यकता स्पष्ट रूप से महसूस की जा रही है। ऐसे समय में भारत का वैश्विक मंच पर बढ़ता हुआ प्रभाव किसी आकस्मिक घटना का परिणाम नहीं है बल्कि यह एक सुविचारित राष्ट्रीय दृष्टि, सुदृढ़ नेतृत्व और निरंतर कूटनीतिक प्रयासों का प्रतिफल है।

The Bharat Tribune

21वीं सदी को यदि भारत की सदी कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। आज भारत केवल अपनी आंतरिक प्रगति, आर्थिक विकास या तकनीकी विस्तार तक सीमित नहीं है बल्कि वैश्विक मंच पर नई दिशा, संतुलित मार्गदर्शन और जिम्मेदार नेतृत्व प्रदान करने की क्षमता भी प्रदर्शित कर रहा है। विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत को अब केवल एक उभरती शक्ति के रूप में नहीं बल्कि एक स्थिर, विश्वसनीय और समाधान-उन्मुख भागीदार के रूप में देख रही हैं।

आज भारत की मेजबानी में आयोजित हो रहे वैश्विक सम्मेलन इसी बढ़ते विश्वास और अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता का प्रतीक हैं। एआई इम्पैक्ट समिट के माध्यम से भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे अत्याधुनिक और प्रभावशाली क्षेत्र में नैतिकता, पारदर्शिता और मानव-कल्याण आधारित उपयोग की आवश्यकता को वैश्विक विमर्श के केंद्र में ला रहा है। भारत का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि तकनीक मानवता की सेवक बने, न कि उसका नियंत्रक। ऐसे समय में जब एआई से रोजगार, गोपनीयता और सामाजिक असमानता को लेकर गम्भीर प्रश्न उठ रहे हैं, भारत का मानव-केंद्रित दृष्टिकोण विश्व के लिए एक संतुलित मार्ग प्रस्तुत करता है।

The Future is Frontier: How India Can Lead the World in Human-Centric Technologies

इसी क्रम में भारत-जापान शिखर सम्मेलन एशिया में शांति, स्थिरता, तकनीकी सहयोग और आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का माध्यम बन रहा है। यह साझेदारी केवल रणनीतिक हितों तक सीमित नहीं है बल्कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम-आधारित व्यवस्था और नवाचार पर आधारित भविष्य की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। भारत और जापान का सहयोग यह संकेत देता है कि वैश्विक चुनौतियों का सामना द्विपक्षीय और बहुपक्षीय साझेदारी के माध्यम से ही प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

How India has emerged as leading voice of developing world- The Week

वर्ल्ड सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट जैसे मंचों पर भारत सतत विकास और पर्यावरणीय संतुलन को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में स्थापित कर रहा है। भारत का यह मानना है कि विकास तभी सार्थक और दीर्घकालिक हो सकता है जब वह प्रकृति, समाज और आने वाली पीढ़ियों के प्रति उत्तरदायी हो। इसी सोच के अंतर्गत भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत के नेतृत्व में स्थापित इंटरनेशनल सोलर अलायंस इसका उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने सौर ऊर्जा को केवल एक विकल्प नहीं बल्कि वैश्विक समाधान के रूप में प्रस्तुत किया है और विकासशील देशों को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित किया है।

ब्रिक्स की अध्यक्षता मिलना भी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और रणनीतिक उपलब्धि है। इठखउड जैसे मंच पर भारत की भूमिका यह स्पष्ट करती है कि वह बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में संतुलन, संवाद और सहयोग का पक्षधर है। भारत विकसित और विकासशील देशों के बीच सेतु बनकर आर्थिक न्याय, वित्तीय समावेशन और साझा प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। यह भारत की उस सोच को दर्शाता है, जो प्रतिस्पर्धा और टकराव की राजनीति के बजाय सहयोग और सह-अस्तित्व पर विश्वास करती है।

भारत की वैश्विक पहचान केवल राजनीतिक या आर्थिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत ने भी विश्व को गहराई से प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता मिलना इस बात का प्रमाण है कि भारत की प्राचीन परम्पराएं आज भी वैश्विक तनाव, मानसिक असंतुलन और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं का समाधान प्रस्तुत कर सकती हैं। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि मानसिक शांति, संतुलन और आत्मबोध का मार्ग है जिसकी आज तनावग्रस्त विश्व को अत्यंत आवश्यकता है।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को विभिन्न देशों द्वारा प्रदान किए गए ‘सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार सम्मान’ भारत के प्रति वैश्विक सम्मान और विश्वास का प्रतीक हैं। ये सम्मान किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हैं बल्कि भारत की लोकतांत्रिक परम्पराओं, शांतिपूर्ण दृष्टिकोण और विश्व-कल्याण की सोच को मान्यता देते हैं। यह इस बात का संकेत है कि भारत का नेतृत्व आज विश्व में विश्वास, स्थिरता और सहयोग उत्पन्न करने में सक्षम है।

आज का भारत अपनी विरासत से विकास की ओर बढ़ने वाला ऐसा राष्ट्र है, जिसने यह सिद्ध किया है कि परम्परा और आधुनिकता एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि पूरक हो सकते हैं। एक ओर भारत अपनी आध्यात्मिक दृष्टि और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेज कर रखे हुए हैं तो दूसरी ओर विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष अनुसंधान में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। अंतरिक्ष में भारत की उड़ानें, चंद्र और सूर्य मिशन यह दर्शाते हैं कि भारत ज्ञान, नवाचार और आत्मनिर्भरता के माध्यम से भी विश्व को दिशा देने की क्षमता रखता है। भारत का यह समग्र दृष्टिकोण जहां विकास, आध्यात्मिकता, विज्ञान और मानवता एक साथ चलते हैं, उसे अन्य राष्ट्रों से विशिष्ट बनाता है। भारत न तो केवल उपदेश देता है और न ही केवल शक्ति का प्रदर्शन करता है बल्कि अपने आचरण, अनुभव और उदाहरण से विश्व को प्रेरित करता है। यही कारण है कि वैश्विक संकटों, अनिश्चितताओं और संघर्षों के इस दौर में विश्व भारत की ओर आशा और विश्वास के साथ देखती है।

अंततः यह कहा जा सकता है कि भारत आज केवल एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था नहीं बल्कि एक उभरता हुआ वैश्विक मार्गदर्शक है। भारत की मेजबानी में होने वाले वैश्विक सम्मेलन, अंतरराष्ट्रीय संगठनों में उसकी सक्रिय भूमिका और मानवीय मूल्यों पर आधारित नेतृत्व यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि भारत 21वीं सदी में विश्व को नई दिशा देने की पूरी क्षमता रखता है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ता भारत न केवल अपने नागरिकों के लिए बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए आशा, संतुलन और सहयोग का प्रकाशस्तम्भ बनता जा रहा है।

–अजय धवले

 

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