बंधुओ! जैसे-जैसे वामपंथियों को लगने लगा है कि CJP का यह आंदोलन सुपर फ्लॉप हो रहा है और इस चक्कर में सोनम वांगचुक भी घसीटे गए हैं, तो अब वह बड़ी चालाकी से सोनम वांगचुक को इस आंदोलन से अलग चेहरा बताने पर जुट गए हैं।
आइए! हम भी जानें कि आखिर यह सोनम वांगचुक असल में है कौन? इसलिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर 18 दिन से आमरण अनशन की नौटंकी करने वाले सोनम वांगचुक का असली परिचय लोगों को जानना बहुत आवश्यक है।

आमिर खान ने 3 ईडियट्स फिल्म में जिस बांगडू को सोनम वांगचुक दिखाया है, उसके बाद लोग इसे वैज्ञानिक समझने का भ्रम पालते रहे, जबकि इसने आज तक कोई वैज्ञानिक खोज नहीं किया है। यह केवल दूसरों की खोज को अपने नाम से प्रचारित कर झूठी प्रसिद्धि पाता रहा। जैसे सैनिकों के लिए बर्फ के ट्यूब बनाना या बर्फ को गला कर खेती योग्य जल उपलब्ध कराना, यह सब मूल शोध किसी और के हैं। इसके नाम पर एक भी पेटेंट नहीं है। यह तो केवल मैकेनिकल काम करता है। इसके झूठ का पिटारा तब खुला जब लद्दाख के किसानों ने इसके विरोध में आंदोलन किया। उनका कहना था कि यह ऊपर ही पानी रोक रहा है। जिसके कारण नीचे के किसानों के खेतों में पानी नहीं पहुंच रहा। यह उपलब्धि थोड़ी हुई। एक का पानी रोककर दूसरे को देना, तो मक्कारी कहलाती है।
पहली बात कि यह कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है। यह कांग्रेस के पूर्व एमएलए एवं मंत्री का बेटा है। इसलिए इसने अपने पिता की राजनीति का लाभ उठाया और कांग्रेस के शासन में मैक्ससे और कई विदेशी अवार्ड पाकर अपने को बहुत बड़ा वैज्ञानिक बताया। हालांकि बाद में इसकी विदेशी फंडिंग पर कांग्रेस सरकार ने भी जांच कराई थी। इसलिए यह कांग्रेस से भी नाराज है। फिर उसने जब भाजपा सरकार आई तो किरण रिजुजू और धर्मेंद्र प्रधान के निकट आकर लाभ लेना चाहा। लेकिन जब सत्ता में अमित शाह जैसे चाणक्य बैठे हैं, तो फिर इसकी चालाकी कहां तक चलती? अब जब FCRA के फंड पर आंच आ रही है, तो यह भी मिशनरी के लोगों की तरह बिलबिला रहा है और अब यह किसी भी तरह अपने को जननेता बनाने का स्वांग रच रहा है।
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यह कितना बड़ा धूर्त वैज्ञानिक है, यह तो मैंने बता दिया। अब जरा इसकी देशभक्ति पर भी आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं।
यह देशद्रोही गद्दार कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का विरोधी रहा है और अब यह कश्मीर में जनमत संग्रह की बात करता है। इसने खुलकर कहा है कि अब लद्दाख के लोग चीनी सेना को भारत का रास्ता दिखाएंगे। यह पर्यावरण के नाम पर पाकिस्तान जाने का बहाना ढूंढता है। हिंदू धर्म के प्रति इसकी कैसी भावनाएं हैं, तो बांग्लादेश का प्रधानमंत्री तारिक रहमान जिसके राज में हिंदुओं का कत्लेआम हुआ, उससे यह गले मिलता रहा है।
यह इतना नीचे तक गिर जाता है जब यह कहता है कि बीजेपी वालों ने राम की पत्नी सीता को लाकर उनके घर नहीं पहुंचाया बल्कि उसे बीच चौराहे में बेच दिया। यह एक झूठा वैज्ञानिक देशद्रोही और हिंदू विरोधी केजरीवाल की तरह नौटंकीबाज है, जबकि इसका असली उद्देश्य तो सियासत समाप्त होने के बाद अपने पिता की राजनीतिक विरासत को वापस पाना है। इसके लिए वह एक अच्छे समय की प्रतीक्षा कर रहा था।
इस हेतु सोनम वांगचुक बहुत पहले से ही आमरण-अनशन पर बैठना चाहता था। उसने बहुत पहले ही घोषणा कर दी थी कि अगर 6 जून को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली, तो वह आमरण-अनशन पर बैठ जाएगा। परंतु उसका दुर्भाग्य कि पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति दे दी और उस प्रदर्शन में जब 2000 तिलचट्टे भी नहीं पहुंचे, तो सीजेपी की किरकिरी हो गई। परंतु सोनम वांगचुक को तो आमरण-अनशन कर अपना एजेंडा चलाना था और इधर अभिजीत दीपके को अपनी नेतागिरी चमकानी थी।
इस देशद्रोही व हिंदू विरोधी सोनम वांगचुक का असली परिचय जानने के बाद इसको आमरण-अनशन पर क्यों बैठना था? यह जानना भी आवश्यक है। नीट
परीक्षा में गड़बड़ी तो केवल एक झुंनझुना है, असली कारण है-
1- सोनम वांगचुक के लद्दाख में दो फर्जी इंस्टिट्यूट थे, जिसके लिए तत्कालीन सरकार ने उसको जमीन दी थी। लेकिन इंस्टिट्यूट किसी भी सरकारी संस्था से मान्यता प्राप्त नहीं थे। इसलिए यहां से पढ़ने वाले हजारों छात्रों का भविष्य चौपट हो गया। क्योंकि उनको प्राप्त प्रमाण पत्र की कीमत रद्दी के कागज के बराबर थी।
2- जब तक सोनम वांगचुक के दोनों फर्जी इंस्टिट्यूट चल रहे थे, इसके शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से अच्छे संबंध थे। लेकिन जैसे ही इसका भंडाफोड़ हुआ और सरकार ने वह जमीन वापस लेने का नोटिस दे दिया, यह धर्मेंद्र प्रधान का विरोधी हो गया। (नीट छात्र तो बहाना है)
3- इसी के साथ ही यह विदेशी फंडिंग के बल पर भी चुपचाप अपना साम्राज्य बढ़ा रहा था। लेकिन जैसे ही FCRA के तहत इसके जॉर्ज सोरस और अन्य (चीन आदि) की फंडिंग पर रोक लगने शुरू हो गए। यह बौखला गया है।
4- 3 ईडियट्स फिल्म में यह प्रचारित किया गया कि यह बहुत सामान्य घर से संघर्ष करने निकला है जबकि यहां लद्दाख के पूर्व कांग्रेसी मंत्री का बेटा है और उसकी नजर पूरे लद्दाख पर अपना साम्राज्य स्थापित करने का था।
5- यह भी मेधा पाटकर की तरह साधारण कपड़े पहनकर और बहुत धीमेधीमे बोलते हुए यह दिखाने का प्रयास करता है कि जैसा यह बहुत सामान्य व्यक्ति होगा। लेकिन जब इसका भंडाफाड़ हुआ, तो पता चला कि यह तो अंतरराष्ट्रीय स्तर का पहुंचा हुआ नटवरलाल है।
अब फोर्ड फाउंडेशन, जार्ज सोरास और चीनी एजेंसियां फंडिंग किसे करते हैं और क्यों करते हैं? यह बताने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन जब यह फंड ही मिलना बंद हो जाएगा या इस पर अंकुश लग जाएगा, तो सोनम ने जो पूरे देश में वक्त-बेवक्त पर भौंकने के लिए अपने गुर्गे पाले हुए हैं, यह उनका पालन पोषण कैसे करेगा? इसलिए इसका अपना एजेंडा है और वह उस एजेंडा के अनुरूप कार्य कर रहा है। इसीलिए जो एजेंडाधारी आंदोलनकर्ता इसके साथ
मंच पर बैठे होते हैं, वह अगले दिन चीनी दूतावास में भी देखे गए हैं। इससे बड़ा प्रमाण और क्या चाहिए?
अगर इसके अनशन का मुख्य उद्देश्य केवल छात्रों के प्रति हमदर्दी होती, तो इसके प्रदर्शन में छात्र और छात्र नेता ही आते। परंतु आ कौन रहे हैं?
1) अरुंधति रॉय, जो मानती हैं कि कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है।
2) कॉलिन गोंसाल्वेस, जिन्होंने 26/11 के आतंकवादी अजमल कसाब के लिए दया याचिका दायर की थी।
3) प्रशांत भूषण, जो आतंकवादी याकूब मेमन की फांसी रोकने के लिए आधी रात को सुप्रीम कोर्ट गया थे।
4) नंदिता नारायण, जिसने CJP मंच से “बस नाम रहेगा अल्लाह का” गाया था।
5) कुणाल कामरा, जिसने CJP मंच से कहा – “ये लोग सीता के पति का नाम लेकर, नीता के पति का काम कर रहे हैं”।
6) केजरीवाल और उसकी ठग पार्टी के भ्रष्टाचारी नेता।




कोई पूछे इनका छात्र आंदोलन से क्या संबंध?
यहां हर एक का अपना अलग एजेंडा है। अगर इस आंदोलन से कोई दूर बहुत दूर है, तो वह है दिल्ली के छात्र एवं छात्र नेता तथा भावी डाक्टर, इंजीनियर व आइएएस आदि। क्योंकि उन्हें अपना भविष्य निर्माण करना है। इन देशद्रोही व हिंदू विरोधियों घनचक्करों के चक्कर में अपना वर्तमान नहीं बिगाड़ना है।
– डॉ. राजेश्वर उनियाल

