भारतीय सभ्यता, समरसता और समतावादी मूल्यों को आगे लाने हेतु आज एक ‘राष्ट्रीय एकात्मिक कार्यक्रम’ की अत्यंत आवश्यकता है. इंद्रेश कुमार और पाल्गा रिम्पोचे समाज में आशा, समरसता और राष्ट्रीय एकात्मता के प्रेरणादायी स्त्रोत है, यह वक्तव्य राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने मुंबई स्थित सचिवालय जिमखाना में आयोजित राष्ट्रीय एकात्मिक समरसता सम्मान समारोह के दौरान दिया.

उन्होंने आगे कहा कि भारत भगवान गौतम बुद्ध की पावन भूमि है और गांधी जी के सत्य-अहिंसा के विचारों में एवं डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर के सामाजिक न्याय व राष्ट्र निर्माण के कार्य में भगवान बुद्ध के तत्वज्ञान की स्पष्ट छाप दिखाई देती है. भारतीय संविधान में समता, सामाजिक न्याय एवं बंधुता जैसे मूल्यों का समावेश है और यही भारतीय लोकतंत्र की असली शक्ति है. हजारों वर्षों के आक्रमण के बाद भी भारत की शाश्वत सांस्कृतिक मूल्य अबाधित रहे, इसलिए ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भारतीय संस्कृति की पहचान आज भी विश्व को दिशा दे रही है.


विश्व में जारी संघर्ष एवं तनाव की परिस्थिति में भारत की एकात्मता और विविधता में एकता विश्व के लिए एक आदर्श है. पूजा पद्धति विविध होने पर भी ईश्वर एक ही है, इसी भावना से समाज को परस्पर सम्मान व संवाद बढ़ाने की आवश्यकता है. इस प्रकार के सकारात्मक कार्यक्रम करने के लिए उन्होंने आयोजकों की प्रशंसा भी की.

इस कार्यक्रम में विशेष तौर पर रा. स्व. संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार और बौद्ध धर्मगुरु पाल्गा रिम्पोचे का गौरव सम्मान महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष अन्ना बनसोडे के हाथों किया गया. इस समय विविध पंथ के धर्म गुरु, गणमान्यजन एवं सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे.

अन्ना बनसोडे ने अपने वक्तव्य में कहा कि इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता मिलना, यह मेरे लिए गर्व की बात है. समरसता, सामाजिक एकता और राष्ट्र भाव जागरण हेतु कार्य करनेवाले मान्यवरों का सम्मान समाज को सकारात्मक दिशा देता है. इसके अलावा कार्यक्रम में इंद्रेश कुमार और पाल्गा रिम्पोचे ने भी अपने भाषण में राष्ट्रीय एकात्मता, बंधुता, सामाजिक समरसता, अध्यात्म और मानवीय मूल्यों पर प्रेरक मार्गदर्शन किया.
कार्यक्रम के समन्वयक दयानंद सावंत एवं संतोष निम्बरे ने उपस्थित जनों का आभार माना और प्रसाद राजापुरकर ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया.

