प्लंबर हो या डॉक्टर, पायलट हो या पंचर बनाने वाला, प्रोफेसर हो या नेता, इस्लाम में आखिर वह कौन-सी मानसिकता तैयार की जाती है, जो इंसान के हाथ में हुनर होने के बावजूद उसके भीतर से इंसानियत छीन लेती है? यह प्रश्न आज विश्व की मानव सभ्यता के सामने खड़ा है। विगत 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईट दुबई की उड़ान एफजेड 1073 में कॉकपिट के भीतर हुई हिंसक घटना ने कुछ क्षणों के लिए लगभग 200 यात्रियों की जिंदगी को अनिश्चितता में डाल दिया। विमान ने आपात संकेत दिए और अंततः उसे सऊदी अरब के तबूक में आपात रूप से उतारा गया।

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कॉकपिट में ओमानी मूल नागरिक सह पायलट ने विमान के मुख्य पायलट पर चाकू से हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि इस हमले के पीछे ओमानी नागरिकता वाले सह पायलट का मकसद इसराइली यात्रियों से भरे इस विमान को गिराना था। यात्रियों तथा भारतीय मूल के पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने अपनी जान की बाजी लगाई और और स्थिति को नियंत्रण में लिया। इस कट्टरता को इस्लाम धर्म की कट्टरपंथी आतंकवादी मानसिकता से जोड़कर देखा जा रहा है।

लेकिन इस घटना के बाद उठने वाला प्रश्न विमान से कहीं बड़ा है। दुनिया में जब कोई धर्म से जुड़ा आतंकी मामला सामने आता है, तब उस कांड से जुड़े व्यक्ति – चाहे वे प्लंबर हों या डॉक्टर, पायलट हों या पंचर बनाने वाले, प्रोफेसर हों या इंजीनियर, व्यापारी हों या नेता – इन सबकी मानसिकता धार्मिक कट्टरता के कारण अन्य धर्मों के लोगों को नुकसान पहुँचाने की होती है।
इस आतंकी मानसिकता से जुड़े व्यक्तियों के संदर्भ में एक बात स्पष्ट हो रही है कि कट्टरपंथी इस्लामी व्यक्ति कितना भी पढ़ा-लिखा क्यों न हो, उसकी धार्मिक कट्टरता से जुड़ी खुराफाती सोच आतंक पैदा करने का अवसर ढूँढ़ती रहती है। शिक्षा ज्ञान दे सकती है, पद अधिकार दे सकता है, तकनीकी क्षमता दे सकती है – लेकिन इनमें से कोई भी चीज़ अपने-आप यह गारंटी नहीं देती कि इस्लामी व्यक्ति के भीतर मानवता, विवेक और दूसरे मनुष्य के जीवन के प्रति सम्मान भी उतनी ही गहराई से मौजूद हो।
कट्टरता की सबसे बड़ी त्रासदी यही है कि वह व्यक्ति की पहचान बदलने से पहले उसकी दृष्टि बदलती है। पहले वह दूसरे धर्म के विचारों को गलत मानती है। फिर दूसरे धर्म, श्रद्धा और विश्वास को अस्वीकार करती है। फिर दूसरे व्यक्ति को विरोधी मानती है। और अंततः उसे शत्रु मानकर उसके विरुद्ध हिंसा को भी उचित ठहराने लगती है। यहीं से धार्मिक कट्टरता से जुड़े विचार, विचार नहीं रहते- विनाश की मानसिकता बन जाती है।
सच्ची धार्मिक आस्था मनुष्य को नैतिकता, संयम, करुणा, सेवा और आत्मानुशासन का मार्ग दिखाती है। लेकिन जब कोई व्यक्ति अपने ही धर्म की धार्मिक पहचान को मानवता से ऊपर रख देता है, जब उसे लगता है कि उसके धार्मिक विश्वास से अलग सोचने वाले अन्य धर्म के मनुष्य का जीवन कम मूल्यवान है, तो समस्या आस्था की नहीं, आस्था के विकृत और हिंसक राजनीतिकरण की होती है। आज अन्य धर्मोंऔर इस्लाम धर्म के बीच के इसी अंतर को समझना आवश्यक है।

आज प्रश्न यह है कि इस्लामी कट्टरवादी क्या वह दूसरे धर्म के समुदाय के जीवन के अधिकार को स्वीकार करते है? प्रश्न यह नहीं है कि वह कितना पढ़ा-लिखा है। प्रश्न यह है कि क्या उसकी शिक्षा ने उसके भीतर विवेक पैदा किया है? प्रश्न यह नहीं है कि वह किस पद पर बैठा है। प्रश्न यह है कि क्या वह अपने अधिकार का उपयोग समाज जीवन बचाने के लिए करता है, या समाज जीवन को खतरे में डालने के लिए?

यही वह कसौटी है जिस पर किसी भी हिंसक विचारधारा को परखा जाना चाहिए। कट्टरता की मानसिकता कहती है- पहले मेरा धर्म, फिर मेरा विश्वास, फिर मेरा विचार; अन्य मनुष्य बाद में। यहीं से सभ्यता का पतन शुरू होता है।
भारत की सनातन सांस्कृतिक दृष्टि इसीलिए महत्वपूर्ण है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ केवल एक सुंदर वाक्य नहीं, बल्कि मनुष्य को संकीर्ण पहचान से ऊपर उठाने वाली जीवन-दृष्टि है। विविधता के बीच सह-अस्तित्व, मतभेद के बीच संवाद और आस्था के साथ विवेक -यही किसी स्वस्थ समाज की पहचान है। फ्लाईदुबई की फ्लाइट एफजेड 1073 के कॉकपिट में हुए हमले के बाद भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की दुनियाभर में चर्चा और प्रशंसा हो रही है।
इजरायल के बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें सच्चा हीरो बताया है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लाईदुबई के पायलट को हीरो बताया है। घायल होने के बावजूद स्मित मच्छार ने हिम्मत नहीं हारी। भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ सांस्कृतिक दृष्टि का समस्त हिंदुओं पर हुए संस्कारों का परिचय स्मिथ मच्छार ने अपनी जान पर खेल कर 200 लोगों की जान बचाकर संपूर्ण विश्व को दिया है।
आज दुनिया को इस्लाम कट्टरता की सोच से सतर्क रहने की आवश्यकता है ।

पहली सतर्कता उन इस्लामी संगठनों, नेटवर्कों और व्यक्तियों के विरुद्ध, जो अन्य धर्मियों की हिंसा करने हेतु संगठित होते रहते हैं। दूसरी और उस मानसिकता के विरुद्ध, जो इस्लामी हिंसा को नैतिक वैधता देने का प्रयास करती है। क्योंकि कट्टरता अचानक विस्फोट नहीं करती। अक्सर वह पहले विचारों में जन्म लेती है, फिर शब्दों में दिखाई देती है और अंततः व्यवहार में हिंसा बनकर सामने आती है। इसलिए उसे रोकने का सबसे सही समय हिंसा के बाद नहीं, हिंसा से पहले है।
शालिन सभ्यता की असली परीक्षा तब नहीं होती जब सभी लोग एक जैसा सोचते हैं। परीक्षा तब होती है जब विचार अलग हों, आस्थाएँ अलग हों, रास्ते अलग हों, फिर भी मनुष्य दूसरे मनुष्य के जीवन और सम्मान की रक्षा करे। कट्टरता की मानसिकता से ग्रस्त पायलट की वर्दी कट्टरता को नहीं रोक सकती। डॉक्टर का स्टेथोस्कोप कट्टरता को नहीं रोक सकता।
प्रोफेसर की डिग्री भी नहीं। और किसी बड़े पद की प्रतिष्ठा भी नहीं। कट्टरता का वास्तविक प्रतिरोध केवल विवेक, मानवता और उस नैतिक साहस से होता है, जो कहता है, मेरी आस्था महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन दूसरे मनुष्य का जीवन उससे कम महत्वपूर्ण नहीं है। धर्म के नाम पर मनुष्य को मनुष्य से घृणा करना सिखाया जाए तो वही आस्था विकृत विचारधारा का औजार बन सकती है। जो आज इस्लामी कट्टर व्यक्ति अपने हिंसक करतूत से दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रही है।
इसलिए हमारी लड़ाई किसी धर्म के विरुद्ध होनी चाहिए। लड़ाई किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं होनी चाहिए। लड़ाई उस इस्लामी कट्टरवादी मानसिकता के विरुद्ध अपेक्षित है जो मनुष्य से पहले कट्टर विचारधारा को रखती है और मानव जीवन से ऊपर हिंसा को।
आज दुनिया को केवल सुरक्षित विमान प्रवास, सुरक्षित शहर और सुरक्षित सीमाएँ नहीं चाहिए।
उसे सुरक्षित मानसिकता भी चाहिए। क्योंकि आतंकवादी सोच को रोकना जरूरी है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी है उस विचार को चुनौती देना जो उस हाथ को हिंसा के लिए तैयार करता है। आखिर किसी भी सभ्यता की सबसे बड़ी जीत यह नहीं कि उसने अपने शत्रु को पराजित कर दिया, उसकी सबसे बड़ी जीत यह है कि उसने मनुष्य के भीतर के हिंसक अंधकार पर विवेक का प्रकाश बनाए रखा।
यही प्रश्न आज इस्लाम धर्म से विश्वास रखने वाले सबके सामने है, क्या इस्लामी आस्था उसके अनुयायियों को मनुष्य से बड़ा बना रही है, या मनुष्य को आस्था से छोटा कर रही है? इस प्रश्न का उत्तर ही तय करेगा कि आने वाली दुनिया इस्लामी कट्टरता की आग में जलेगी या विवेक के प्रकाश में आगे बढ़ेगी।
लेखक :- अमोल पेडणेकर
Indian Pilot Saved Plane, Flydubai Flight Cockpit Attack, Tabuk Airport Emergency Landing, Flydubai Pilot Fight Tel Aviv, Indian Captain Hero Flydubai, Flydubai Hijacking Alert Israel, Flydubai FZ1073 Latest
