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समृद्धि की लोकमाता हैं लक्ष्मी

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लक्ष्मी की पूजा में उस अनजानी स्त्री की महिमा और समन्वय का गुणगाण है, जो एक अज्ञात घर में आकर उसे अपने संस्कार और समर्पण से संवारती है। हम सब जानते हैं कि लक्ष्मी का प्रादुर्भाव समुद्र-मंथन से हुआ है। क्षीर-सागर के इस मंथन से जब समुद्र में पड़े अनेक तत्वों का आलोड़न और इस रस का संचार नाना रूपों में

दुनिया भर में दीपावली की धूम

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असत्य पर सत्य की जीत का पर्व दीपावली इस वर्ष कई मायनों में विशेष रहने वाला है। सनातन भारतीय परंपरा के पावन प्रतीक अयोध्या के श्रीराम मंदिर को लेकर लंबी सुनवाई के बाद माननीय उच्चतम न्यायालय का फैसला कुछ समय में आने ही वाला है। न्याय और अन्याय के बीच लंबे अरसे तक चले इस संघर्ष के बाद अब बहुत जल्द ’न्यायिक दीप’ जलने की प्रबल आशा दिखाई पड़ रही है। इसी बीच राम की नगरी अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी समूची सरकार के साथ

दुनिया के पहले चिकित्सा विज्ञानी धन्वन्तरि

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समुद्र-मंथन के अंत में आयुर्वेदाचार्य धन्वन्तरि देव और दानवों को हाथों में अमृत-कलश लिए मिले थे। दरअसल समुद्र-मंथन की इस वैश्विक घटना की जानकारी विश्व के उन सभी दूरांचलों में फैल गई थी, जिनकी अपनी सत्ता थी। उस समय धन्वन्तरि चिकित्सा क्षेत्र के बड़े अनुसंधित्सु और वैद्य के रूप में विख्यात हो चुके थे।

“कृष्ण जैसी महान विभूति हमारे लिये जन्म नही लेती।”

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कृष्ण जैसी  महान विभूति  हमारे लिए जन्म लेती है, यह हमारी धारणा है। कृष्ण जैसे महान विभूति के जन्म के लिए कोई समय, काल, परिस्थिति निर्भर हो सकता है ?  कोई काल,कोई  परिस्थिति या कोई समय कृष्णा जैसी विभूति के जन्म का कारण कभी नहीं हो सकती।

संस्कृति – सभ्यता की विरासत भारतीय नववर्ष शोभायात्रा

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मुंबई के निकट डोंबिवली से आबासाहेब पटवारी द्वारा आरंभ ‘भारतीय नव वर्ष यात्रा’, पूरे भारत वर्ष में, हर शहर, हर गांव में आयोजित की जानी चाहिए। जाति, धर्म, भाषा, भेदभाव से ऊपर उठकर वर्तमान और भविष्य के साथ साथ आधुनिकता से परंपरा और अतीत को जोड़ने वाली यह यात्रा नए भारत का निर्माण करेगी।

बेमिसाल भारतीय गहनें

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भारतीय गहनों ने विकास का एक बहुत लंबा सफर तय किया है। लोगों की आवश्यकता के अनुसार नए-नए डिजाइन बाजार में आ रहे हैं, फिर भी पारंपरिक डिजाइन के गहनें आज भी अपने मनमोहक प्रभाव के कारण सबके आकर्षण का केन्द्र हैं।

कला में परिवर्तन हो रहा है

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निजी तौर पर तो कला के क्षेत्र में हो तो बहुत कुछ रहा है जिसके कारण भारत के चित्रकारों को निरंतर पहचान मिल रही है किन्तु आवश्यकता है इस दिशा में सरकार द्वारा भी कोई ठोस कदम उठाने की। कलाकारों को महज सम्मानित कर देने से कला का सम्यक विकास नहीं होगा।कला तभी जीवित रह सकती है, जब कलाकार जीवित रहे और अपने जीवन निर्वाह के लिए किए जाने वाले प्रयासों से परे होकर विचार करने के लिए उसका मन स्वतंत्र हो।

हिंदी विवेक मासिक पत्रिका के ‘फैशन दीपावली विशेषांक’ हेतु आलेख आमंत्रित

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हिंदी विवेक मासिक पत्रिका के द्वारा इस वर्ष का दीपावली विशेषांक 'भारतीय फैशन' पर आधारित होगा. भारतीय परम्परा में सौंदर्य, श्रृंगार, परिधान, गहने आदि का बहुत महत्व है. फैशन के विभिन्न रूप जितने भारत में हैं उतने शायद ही कहीं और हों. भारतीय फैशन के इन्हीं विभिन्न पहलुओं को उजागर…

विश्व मूल निवासी दिवस: अमरीका की जनजातियों की ऐतिहासिक शोकांतिका

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सन 1492 में भारत की खोज में कोलंबस निकला और पश्चिमी द्वीप समूह में पहुंचा। स्पैनिश यात्रियों को सोने की खोज में भारत ((India) पहुंचने का भ्रम हुआ इसलिए उस नई दुनिया को उसने खपवळर नाम दे दिया तथा उनके निवासियोंको इण्डियन कहना प्रारंभ किया। किन्तु जब पूर्व दिशा से…

संक्रांति पर्व

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संक्रांति का त्यौहार सामाजिक संबंध दृढ़ करने, आपस में मिलने जुलने, तनाव दूर कर, खुशियां फैलाने वाला त्यौहार है. यह पर्व केवल भारत ही नहीं, थाईलैंड, म्यांमार, कंबोडिया और श्रीलंका में भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है.

बदलती परंपराओं और त्यौहारों का नया स्वाद

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आज की युवा पीढ़ी, परंपराओं के साथ भले ही हाथों में हाथ डाल कर ना चल रही हो परंतु उन्हें जिंदा रखने की हसरत उनमें है। बस उनका देखने का नजरिया बदल गया है। बदलाव और नयापन हमेशा अच्छा होता है। इससे समाज उन्नति की ओर बढ़ता है। ट्रिंग... ट्रिंग... ट्रिंग... कॉलबेल बजी। उत्साह से नेहा ने दरवाजा खोला। अपनी चारों सहेलियों को देख नेहा का चेहरा खिल उठा। ‘‘कौन आया है बेटी?’’ मां भी कमरे से बाहर आ गई। नेहा ने गांव से आई अपनी मां का सभी सहेलियों से परिचय कराया। बातचीत चल निकली तो त्यौहारों पर आ

भगवद्गीता सबके लिए

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गीता मनुष्यमात्र को आतंकवाद, भोगवाद, पर्यावरण ह्रास, बैरभाव, ईर्ष्या आदि से बचा सकती है। संप्रदाय निरपेक्ष शाश्वत सिद्धांतों को मानव धर्म के तौर पर सिखा सकती है। आने वाले समय मेंं विश्व भगवद्गीता को मानवता की विवेक ग्रंथ के रूप में स्वीकार कर लें तो आश्चर्य की बात नहीं होगी। कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में भयभीत एवं हताश हुए अर्जुन को भगवान श्रीकृष्ण ने गीता सुनाई। महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत महाकाव्य का गीता एक हिस्सा है। ‘अर्जुन को युद्ध करने हेतु प्रेरित करना’- यही कृष्ण का उद्देश्य था..

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