भारत में ‘भारतीय’ बन कर रहें

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भारतीय होने का सीधा और स्पष्ट मापदंड है, भारत के अखंड भूगोल, सनातन संस्कृति और गौरवशाली अतीत के प्रति आस्था/विश्वास और इसी के साथ जुड़े रहने का दृढ़ संकल्प. अपनी जाति, क्षेत्र और महजब से ऊपर उठ कर ‘हम भारतीय’ कहने में गौरव की अनुभूति यही तो है भारतीयता. सर्वप्रथम…

सामाजिक समरसता के प्रेरक संत रविदास

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संत रविदास का जीवन मानव विवेक की पराकाष्ठा का सर्वोत्तम प्रतीक है। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन सनातन धर्म के उत्थान तथा भारतीय समाज में उस समय फैली हुई कुरीतियों को खत्म करने में लगा दिया था। उनके शिष्यों में राजपरिवार में जन्मी मीराबाई से लेकर सामान्य जन तक शामिल थे।…

स्वरभास्कर पंडित भीमसेन जोशी

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1985 में दूरदर्शन पर अनेक कलाकारों को मिलाकर बना कार्यक्रम ‘देश-राग’ बहुत लोकप्रिय हुआ था। सुरेश माथुर द्वारा लिखित गीत के बोल थे,‘‘मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा।’’ उगते सूर्य की लालिमा, सागर के अनंत विस्तार और झरनों के कलकल निनाद के बीच जो धीर-गंभीर स्वर और चेहरा…

राम शिला यात्रा से चीन के एजेंडे को आघात कैसे लगा ?

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चीन सदैव भारत और नेपाल के रिश्तों में खलल डालने की कोशिश में लगा रहता है वो चीन को अपने करीब लाकर भारत को साइडलाइन करने की मंशा पर लगातार काम करता रहा है लेकिन राम शिला यात्रा ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया है। दरअसल अयोध्या के अंदर…

सम्यक विवेचन में समग्र विचार आवश्यक

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अंश पूर्ण नहीं होता। सदा अपूर्ण होता है। अंश के आधार पर पूर्ण का विवेचन नहीं हो सकता। विवेचन में देश काल के प्रभाव का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। सम्यक विवेचन में समग्र विचार आवश्यक होता है। देश काल के प्रभाव में समाज बदलते रहते हैं। मान्यताएं भी…

हिंदी विवेक के सनातन भारत ग्रंथ की रिकार्डतोड़ बिक्री जारी

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हिंदी विवेक द्वारा सद्यःप्रकाशित ग्रंथ सनातन भारत प्रकाशित होने के साथ ही बिक्री के नित नए रिकार्ड बना रहा है। प्रकाशित होते ही ग्रंथ के प्रथम संकरण को लोगों ने हाथों हाथ लिया और एक महीने के अन्दर ही उसका दूसरा संस्करण भी आ चुका है। सनातन भारत ग्रंथ की…

बाल गोकुलम् के संस्थापक एम.ए कृष्णन

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भारत की सबसे बड़ी विशेषता उसकी परिवार प्रणाली है। घर से ही बालक के मन पर संस्कार पड़ते हैं; पर इन दिनों संयुक्त परिवार के विखंडन, शहरीकरण तथा भौतिकता की होड़ के कारण लोग इस ओर ध्यान नहीं दे पाते। केरल में बच्चों को धर्म, संस्कृति और देशप्रेम के संस्कार…

ब्राह्मण ऋषियों की खोज और अविष्कार

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5000 साल पहले ब्राह्मणों ने हमारा बहुत शोषण किया ब्राह्मणों ने हमें पढ़ने से रोका। यह बात बताने वाले महान इतिहासकार यह नहीं बताते कि 500 साल पहले मुगलों ने हमारे साथ क्या किया। 100 साल पहले अंग्रेजो ने हमारे साथ क्या किया।हमारे देश में शिक्षा नहीं थी लेकिन 1897…

“जीवन विद्या” को सीखें और जिंदगी का स्वरूप समझें

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"असुर", "मनुष्य" और "देवता" देखने में एक ही आकृति के होते हैं । अंतर उनकी प्रकृति में होता है। "असुर" वे हैं, जो अपना छोटा स्वार्थ साधने के लिए दूसरों का बड़े से बड़ा अहित कर सकते हैं, "मनुष्य वे हैं", जो अपना "स्वार्थ" तो साधते हैं पर "उचित अनुचित"…

देसी वृक्षारोपण से भारत होगा प्रदुषण मुक्त

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"श्री स्कंदपुराण" में एक सुंदर श्लोक है अश्वत्थमेकम् पिचुमन्दमेकम् न्यग्रोधमेकम् दश चिञ्चिणीकान्। कपित्थबिल्वाऽऽमलकत्रयञ्च पञ्चाऽऽम्रमुप्त्वा नरकन्न पश्येत्।। अश्वत्थः= पीपल। (100% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है) पिचुमन्दः = नीम (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है) नयग्रोधः = वटवृक्ष (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है) चिञ्चिणी = इमली (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है) कपित्थः = कविट…

भगवान श्रीनाथजी के भक्त कुम्भनदास जी

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एक भक्त थे कुम्भन दास जी, गोवर्धन की तलहटी में रहते थे । एक बार की बात है कि भक्त कुम्भन दास जी भगवान श्रीनाथजी के पास गये जाकर देखा कि श्रीनाथजी अपना मुँह लटकाये बैठे हैं । कुम्भन दास जी बोले - प्रभु क्या हुआ है, मुँह फुलाये क्यों…

भारतीय चिंतन में सूर्य ब्रह्माण्ड की आत्मा हैं

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सूर्य सभी राशियों पर संचरण करते प्रतीत होते हैं। वस्तुतः पृथ्वी ही सूर्य की परिक्रमा करती है। आर्य भट्ट ने आर्यभट्टीयम में लिखा है, ‘‘जिस तरह नाव में बैठा व्यक्ति नदी को चलता हुआ अनुभव करता है, उसी प्रकार पृथ्वी से सूर्य गतिशील दिखाई पड़ता है।" सूर्य धनु राशि के…

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