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ग्रुप ए में कई मजबूत टीमें थी और ऐसा माना जा रहा था कि यह ग्रुप ऑफ़ डेथ साबित होगा और अच्छा मुकाबला देखने को मिलेगा। इस ग्रुप से ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के सेमीफइनल में जाने के मौके ज्यादा दिख रहे थे। लेकिन जिस तरह से इस ग्रुप में उलटफेर हुआ,उसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। टूर्नामेंट के दौरान बारिश हमेशा विलन की भूमिका अदा करती रही। इसका सबसे ज्यादा नुकसान ऑस्ट्रेलिया को उठाना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया के दो मैच बारिश की भेंट चढ़ गए और उसे अपनी विपक्षी टीम से अंक बांटने पड़े,जबकि अगर बारिश नहीं आई होती तो उसकी जीत दोनों मैचों में पक्की थी

कहते हैं कि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल होता है और इसमें जब तक आखिरी गेंद न फेंक दी जाये,तब तक कुछ भी अंदाजा लगाना बेमानी होता है। इंग्लैंड में १८ जून को सम्पन्न हुई चैंपियंस ट्रॉफी २०१७ में यह कहावत कई बार सच भी साबित हुई। इस साल की चैंपियंस ट्रॉफी को सिर्फ इसी कहावत के लिए नहीं,बल्कि कई अन्य मायनों में याद किया जाए तो शायद गलत नहीं होगा। पहला ये कि इस चैंपियंस ट्रॉफी में कई बड़े उलटफेर देखने को मिले,दूसरा जिस टीम को ख़िताब का दावेदार क्रिकेट पंडित नहीं समझ रहे थे,वही ख़िताब लेकर उड़ गई और तीसरा इस टूर्नामेंट में कई मैच ऐसे भी रहे,जिन्हें देखकर लोगो ने यहां तक कह दिया कि यह फिक्स था यानि फिक्सिंग का साया यहां भी मंडराता दिखा। आईसीसी के इस टूर्नामेंट में दुनिया की ८ सबसे अच्छी टीमों को २ ग्रुप में बांटा गया था। ग्रुप ए में इंग्लैंड,ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ एशियाई टीम बांग्लादेश थी,जबकि ग्रुप बी में भारत,पाकिस्तान,साउथ अफ्रीका और श्रीलंका की टीम। दोनों ग्रुप्स को देखकर क्रिकेट के तमाम पंडित यही कह रहे थे कि टॉप फोर टीमें ही सेमीफइनल में पहुचेंगी। एक जून से शुरू हुए इस टूर्नामेंट में पहला मुकाबला मजबूत इंग्लैंड और कमजोर समझी जा रही बांग्लादेश के बीच हुआ। बांग्लादेश की टीम को बहुत ही कमजोर माना जा रहा था,लेकिन जिस तरह से उसके बल्लेबाजों ने खासकर तमीम इक़बाल ने खबर ली,उसने यह साफ़ कर दिया कि उसे हलके में लेना खतरे में डाल सकता है। इंग्लैंड के गेंदबाजों की जमकर धुनाई करते हुए बांग्लादेश ने ३०८ का स्कोर खड़ा कर दिया,हालांकि इंग्लैंड ने बल्लेबाजों के दमदार प्रदर्शन के बल पर मैच को जीत लिया। ग्रुप ए में कई मजबूत टीमें थी और ऐसा माना जा रहा था कि यह ग्रुप ऑफ़ डेथ साबित होगा और अच्छा मुकाबला देखने को मिलेगा। इस ग्रुप से ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के सेमीफइनल में जाने के मौके ज्यादा दिख रहे थे। लेकिन जिस तरह से इस ग्रुप में उलटफेर हुआ,उसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। टूर्नामेंट के दौरान बारिश हमेशा विलन की भूमिका अदा करती रही। इसका सबसे ज्यादा नुकसान ऑस्ट्रेलिया को उठाना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया के दो मैच बारिश की भेंट चढ़ गए और उसे अपनी विपक्षी टीम से अंक बांटने पड़े,जबकि अगर बारिश नहीं आई होती तो उसकी जीत दोनों मैचों में पक्की थी और वह आराम से सेमीफइनल में पहुंच जाता। पहला मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ और दूसरा बांग्लादेश के खिलाफ। बारिश के विलेन बनने से ऑस्ट्रेलिया के सेमीफइनल में पहुंचने के लिए दूसरी टीमों की हार-जीत पर निर्भर होना पड़ गया। यहां भी उसकी किस्मत ने उसे दगा दिया। ऑस्ट्रेलिया को सेमीफइनल में पहुंचने के लिए इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी लीग मैच में जीत दर्ज करना बहुत ही जरुरी था और दूसरी तरफ न्यूजीलैंड के खिलाफ बांग्लादेश की जीत होनी जरुरी थी। उलटफेर का सिलसिला देखिये,ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड के खिलाफ अपना मैच हार गई,वही दूसरी तरफ बांग्लादेश ने न्यूजीलैंड को हरा दिया। यानि बहुत बड़ा उलटफेर यह कि ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसी मजबूत टीमें टूर्नामेंट से बाहर और कमजोर समझी जाने वाली बांग्लादेश की टीम ४ अंकों के साथ सेमीफइनल में पहुंच गई,जबकि इंग्लैंड इस ग्रुप से पहले ही अपने तीनों लीग मैच जीतकर सेमीफइनल में पहुंच चुकी थी।

अब बात अगर ग्रुप बी की करे तो इसमें भारत और साउथ अफ्रीका के पकिस्तान और श्रीलंका के मुकाबले सेमीफइनल में पहुंचने का अंदाज़ा क्रिकेट पंडित लगा रहे थे। यह अंदाजा इसलिए भी लगाया जा रहा था क्योंकि पाकिस्तान और श्रीलंका की टीमें बदलाव के दौर से गुज़र रही थी और दोनों टीमों में नए खिलाडियों की संख्या ज्यादा थी और उनके पास इंटरनेशनल क्रिकेट का कोई अनुभव नहीं था। पहला मुकाबला साउथ अफ्रीका और श्रीलंका के बीच हुआ,जिसमें साउथ अफ्रीका ने जीत दर्ज की। इस टूर्नामेंट का सबसे हाई वोल्टेज मुकाबला भारत और पाकिस्तान के बीच ४ जून को हुआ और जिसके बाद से चैंपियंस ट्रॉफी में रौनक आ गई और जो टूर्नामेंट के अंत तक बनी रही।इस हाई वोल्टेज मैच में भारत ने पाकिस्तान को चारों खाने चित करते हुए १२४ रनों से जीत दर्ज की और पाकिस्तान से हिसाब बराबर कर लिया। इस ग्रुप में सबसे बड़ा उलटफेर तब हुआ,जब बारिश के विलेन बनने से डकवर्थ लुइस नियम के तहत पाकिस्तान ने साउथ अफ्रीका को हरा दिया और भारत ३२१ रनों का विशाल स्कोर खड़ा करने के बावजूद श्रीलंका से हार गया। यानि चारों टीमों के २-२ मैचों से २ अंक हो गए और सेमीफइनल में पहुंचने के लिए हर टीम को जीत बेहद जरूरी थी। भारत को साउथ अफ्रीका से भिड़ना था तो पाकिस्तान को श्रीलंका से। उस समय यह तय करना मुश्किल था कि कौन सी टीम सेमीफइनल में जाएगी और कौन सी बाहर ? ११ जून को हुए करो या मरो वाले मैच में भारत ने साउथ अफ्रीका को ८ विकेट से हराकर ग्रुप बी से सेमीफइनल में प्रवेश पाने वाली पहली टीम बनी। वही पाकिस्तान किस्मत और अंत में बल्लेबाजों द्वारा की अच्छी बल्लेबाजी के दम पर श्रीलंका को तीन विकेट से हराकर सेमीफइनल में पहुंच गया।

सेमीफइनल के लिए जो चार टीमें तय हुई,उसमें ग्रुप ए से इंग्लैंड और बांग्लादेश,जबकि ग्रुप बी से भारत और पाकिस्तान। ग्रुप ए की नंबर एक टीम इंग्लैंड का मुकाबला ग्रुप बी की दूसरे नंबर की टीम पाकिस्तान से था और ग्रुप बी की नंबर एक टीम का मुकाबला ग्रुप ए की दूसरे नंबर की टीम बांग्लादेश से। १४ जून को पाकिस्तान और इंग्लैंड सेमीफइनल मुकाबले में आमने-सामने थे और ऐसा माना जा रहा था कि इंग्लैंड की टीम का प्रदर्शन जिस तरह से लीग मैचों में रहा है,उसे देखते हुए पकिस्तान को हराना उसके लिए आसान होगा। मगर दांव उल्टा पड़ गया। जिस इंग्लैंड टीम के बल्लेबाजों ने लीग मैचों में शानदार बल्लेबाजी की थी,वे पाकिस्तानी गेंदबाजों के सामने असहाय हो गए और तू चल मैं आता हूं वाली कहावत पर एक के बाद एक आउट होकर पवेलियन चलते बने। इंग्लैंड के इस तरह के प्रदर्शन से मैच फिक्स होने की बात उठने लगी,जो कहीं न कहीं सही भी थी और उसका उठना लाज़मी था। इंग्लैंड से मिले २११ रनों का पीछा करते हुए पाकिस्तान ने बड़ी ही आसानी से इस लक्ष्य को हासिल कर लिया और फाइनल में प्रवेश कर लिया। इंग्लैंड के गेंदबाज भी पाकिस्तानी बल्लेबाजों के सामने जिस तरह की गेंदबाजी कर रहे थे,उसने मैच के फिक्स होने की बात पर मुहर लगा दी। १५ जून को दूसरे सेमीफइनल में भारत और बांग्लादेश आमने-सामने थे। बांग्लादेश के प्रदर्शन को देखते हुए उसे कमतर आंकना ठीक नहीं था। पहले बल्लेबाजी करते हुए बांग्लादेश ने अच्छी शुरुवात के बाद लय को गंवा दिया,वरना एक समय वह ३०० के पार जाते दिख रहे थे।अचानक से शुरू हुए पतझड़ के चलते वह ५० ओवरों में २६५ रन ही बना पाई। यह स्कोर भी बुरा नहीं था,लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने कुछ इस तरह से बांग्लादेशी गेंदबाजों की बखियां उधेड़ी कि ४० ओवरों में ही लक्ष्य को पा लिया और फाइनल में पहुंच गई। अब फाइनल में मुकाबला फिर से हाई वोल्टेज हो गया था,क्योंकि भारत और पकिस्तान फिर से आमने-सामने थे। हर क्रिकेट विशेषज्ञ,हर क्रिकेटर यही कह रहा था कि पाकिस्तान के मुकाबले भारत का पलड़ा भारी है और उसकी जीत निश्चित है। वहीं किस्मत के सहारे ही सही,मगर पकिस्तान की टीम पहला मैच हारने के बाद जबरदस्त वापसी करते हुए फाइनल तक पहुंची थी।१८ जून को फाइनल मैच में भारत ने टॉस जीता और गेंदबाजी करने का फैसला लिया। पकिस्तान ने इसका जमकर फायदा उठाया और इस मैच में भारत की गेंदबाजी बिलकुल लय में नहीं दिखी। पाकिस्तानी बल्लेबाजों ने इसका जमकर फायदा उठाया और बोर्ड पर ३३९ रनों का विशाल लक्ष्य टांग दिया। भारत की बल्लेबाजी फॉर्म को देखते हुए यह लक्ष्य भी मुश्किल नहीं माना जा रहा था,लेकिन एक बार फिर से मैच फिक्सिंग का साया मंडराया। भारत के बल्लेबाज जिस तरह से अपने विकेट फेंक कर पवेलियन की तरफ जा रहे थे,उससे यह साफ़ तौर पर प्रतीत हो रहा था कि मैच पहले से फिक्स है और इसकी कहानी पहले ही लिखी जा चुकी है। इसी का नतीजा था कि भारत फाइनल मैच १८० रनों से हार गया। पाकिस्तान के खिलाफ ऐसी करारी हार पहले कभी नहीं हुई थी। जिस बल्लेबाजी के दम पर भारतीय टीम फाइनल तक पहुंची थी,वही रोहित,शिखर,विराट, धोनी,युवराज अपना विकेट ऐसे फेंक कर चलते बने,जैसे क्रिकेट खेलना ही भूल गए हों। इस प्रदर्शन ने भारतीय फैंस की उम्मीदों को तोड़ दिया और उन्हें यह हार चुभ रही थी। जिस पाकिस्तान के लीग मैचों से आगे बढ़ने की उम्मीद नहीं थी वह फाइनल जीत गया। पाकिस्तान की इस जीत में सबसे बड़ी भूमिका उसके गेंदबाज हसन अली की रही,जिसने इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा १३ विकेट हासिल करते हुए गोल्ड बॉल जीता, जबकि टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारत के शिखर धवन को गोल्डन बैट का अवार्ड मिला। टूर्नामेंट तो ख़त्म हो गया,लेकिन अब यह चर्चा जोरों पर है कि फाइनल मैच फिक्स था और उस पर बहस जारी है।

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