छोटे उद्योगों पर मंडराता संकट

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इस समय छोटे और मंझोले उद्योग, जिन्हें एमएसएमई कहते हैं, अपने सबसे बुरे दिनों में चल रहे हैं। अगर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया तो इस क्षेत्र की कई कम्पनियां बंद होंगी। उनमें एनपीए बढ़ेगा। किसानों की तरह इनके  भी आत्महत्या करने के दिन आ जाएंगे।

भारतीय दिवालिया और ॠण शोधन अक्षमता बोर्ड

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नामचीन उद्योगपति विजय माल्या के द्वारा बैंकों का कर्ज डुबा देने के समाचार कई दिनों तक सुर्खियों में रहे। जिन बैंकों का पैसा कार्पोरेट्स में डूबा है उनके लिए सरकार ने एक नया कानून बनाया है, इससे बैंकों को एनपीए से राहत मिल सकेगी। एक बात तो सभी मानेंगे कि मा. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदीजी के नेतृत्व में भारत सरकार एक के बाद एक बड़े फैसले ले रही है। मन्शा साफ हो, इच्छाशक्ति हो और कुछ कर गुजरने का माद्दा हो तभी एक के बाद एक बड़े फैसले लिए जाते हैं। इतने बड़े-बड़े फैसले राजनैतिक नफा-नुकसान देखने वाले नहीं ले सकते।&n

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