पू. गुरुजी का जीवन- मातृपूजा का महायज्ञ

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मानवीय जीवन में कृतज्ञता भाव का स्थान असाधारण है। आज मनुष्य प्रगति पथ पर तेजी से मार्गक्रमण की बातें करता है, मगर विद्यमान मनुष्य जीवन जिन समस्याओं ने घिरा दिखाई देता है उससे पता चलता है कि वह कृतज्ञता का भाव भूल कर पशुतुल्य बन गया है।

राव समाज के इतिहास की पहचान

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प्राचीन काल से ही हिंदू समाज के स्त्री‡पुरुषों का परिचय माता-पिता के नाम से होने की प्रथा रही है। राम दशरथ का पुत्र है इस नाते ‘दशराथी राम’ यह उसका पहचान है, इसी तरह कर्ण की पहचान भी ‘राधेय’ नाम से की जात है। राम के परिचय के साथ इक्ष्वाकु वंश यह नाम भी पड़ गया है। कुल और वंश का परिचय अपनी धरोहर ही है।

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