लक्ष्मी आई मेरे द्वार

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“लक्ष्मी जी मेरी बात सुन कर अपने उल्लू पर सवार होकर अन्तर्धान हो गई और मेरे अंधेरे कमरे में गृहलक्ष्मी दरवाजा खोल कर बोली-“क्या उल्लुओं की तरह पड़े हुए हो? सवेरा हो गया है, अब उठो भी?” मैंने कहा-“जब भी मैं सुनहरे सपने देखता हूं तब तुम पता नहीं बीच…

मखमली शाल

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बहुत दिनों के बाद मेरा गांव जाना हुआ। वहां जाने पर मुझे पता चला कि मेरा लंगोटिया यार पीताम्बर भी आया हुआ है। उसके चाचा का तीन-चार दिन पहले ही देहांत हुआ है।

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