दिल्ली को शस्त्र नहीं, सौहार्द चाहिए

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दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से जो हालात बने हैं, वे न केवल त्रासद एवं शर्मनाक हैं बल्कि भारत की संस्कृति एवं एकता को धुंधलाने वाले हैं। इंग्लैण्ड एवं स्काॅटलैंड की दो सप्ताह की यात्रा से दिल्ली लौटने पर जो हिंसा, आगजनी, विध्वंस के उन्मादी हालात देखने को मिले, उससे मन बहुत दुःखी हुआ, वैसे इन भीषण अत्याचारों, तोड़फोड एवं हिंसा के हालातों से सभी बहुत दुखी हैं। इन विडम्बनापूर्ण हालातों ने अब एक ऐसा रंग ले लिया है कि इसका समाधान करना कठिन हो गया है।

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