एक खम्बे का तम्बू

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****राधाकृष्ण भागिया**** कुछ दिन पूर्व मुंबई की जुहू चौपाटी पर अपने परिवार के साथ घूम रहा था तो समुद्र की रेती पर दो तम्बू ग़ड़े हुए दिखाई दिए। उनमें से एक तम्बू काफी बड़ा ऊंचा एवं भव्य था। अच्छा सजाया हुआ था। कुछ कुर्सियां भी लगी हुई थीं। उस समय मात्र

निकाह अथवा शादी

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‘जिहाद’ हार गया, सच्चा ‘लव’ जीत गया। महमूद, मोहन बन गया और दुर्गा से निकाह नहीं; शादी कर ली। निकाह के बंधनों और विवाह की उदारता उसे समझ में आ गई। उसे लगा कि हिंदू धर्म तो इतना उदार है कि वह हिंदू बनकर भी मुस्लिम रह सकेगा। हिंदुओं में जैसे कोई कृष्ण की, कोई शिव की, कोई राम और कोई काली की पूजा कर सकता है; वैसे ही वह हिंदू बनकर खुदा की बंदगी कर सकता है और कुरान पढ़ सकता है।

सिंधु तीरे सिंधु भवन

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   संसार की सबसे लंबी २९०० किलोमीटर की लंबाई वाली सिंधु नदी है, जिसकी आवाज स्वर्ग तक पहुंचती है। इतनी विशाल और उपयोगी है यह सिंधु नदी कि अपने किनारों पर ४५,००० वर्ग मील में रहने वाले मानवों एवं प्राणियों की प्यास बुझाती है एवं अन्य आवश्यकताएं पूरी करती है।

सिंधियों का राजनीति में स्थान

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आजादी! जिसकी हकदार संपूर्ण जनता थी न सिर्फ कांग्रेस। लेकिन कांग्रेस मात्र खुद को ही उसका अधिकारी मान बैठी। वह नई रचना में इतनी व्यस्त हो गई कि निर्वासित सिंधियों की ओर विशेष ध्यान देने का खयाल उसे नहीं आया और न ही कोई सिंधी कांग्रेसी नेता इतना प्रभावी था कि सिंधियों के लिए सरकार पर अपना प्रभाव डाल सके।

सन्त श्रोमणी सत्गुरु स्वामी टेउनराम महाराज

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भारत भूमि आध्यात्मिक भूमि है। यह अवतारी पुरुषों एवं ब्रह्मग्यानी संतों की कर्म भूमि है। यहां हर प्रान्त तो क्या हर गाव संतों के जन्म से पवित्र हुआ है।

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