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आज के दौर में युद्ध की संकल्पना बदल रही है. आधुनिक युग में युद्ध  सिर्फ आमने सामने लड़ें  जाएं यह आवश्यक नहीं है. जमीन से लेकर अंतरिक्ष तक कहीं भी युद्ध की संभावनाएं हो सकती है. ऐसी स्थिति में बुधवार को भारत के डीआरडीओ और इसरो ने मिलकर पृथ्वी की कक्षा से 300 किलोमीटर दूरी पर संचार कर रहे पुराने और उपयोग से बाहर हो चुके उपग्रहों को ध्वस्त किया है. इस सफल परीक्षण से यह बात साबित हो रही है कि अंतरिक्ष में संचार कर रहे किसी भी गलत तत्व को  ध्वस्त करने की क्षमता  भारत देश ने विकसित कर ली है. बुधवार की घटना भारत के समर्थ का प्रमाण देनेवाली घटना है. यह माना जाता है कि भविष्य में युद्ध जमीन, जल, आकाश और अंतरिक्ष में भी लड़े जा सकते हैं अतः उसका मुकाबला करने के लिए भारत तैयार है.

 अंतरिक्षा में एंटी सेटेलाइट को लक्ष्य करने वाले मिसाइल  बनानेवाले देशों की श्रृंखला में भारत का शामिल होना एक बड़ी उपलब्धि है. बुधवार को  देश को  संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया ” पृथ्वी से 300 किलोमीटर दूर संचार कर रहे लो अर्थ ऑर्बिट मे सेटेलाइट को सिर्फ 3  मिनट में  मार गिराया गया.” 

इस तरह के अभियान में हर एक पहलू अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. एक छोटी सी गलती भी कम तमाम कर सकती है. अत्यंत जलद गति से  संचार कर रही सैटेलाइट को निशाना बनाना तकनीकी रूप से मुश्किल बात मानी जाती है. इस तरह के ऑपरेशन में तीन बातें होती है. पृथ्वी अपनी गति से संचार करती है. जिस सैटेलाइट को टारगेट करना है वह भी बहुत तेज गति से अंतरिक्ष में संचार करता  है और जिस हथियार से हम सेटेलाइट को निशाना बनाना चाहते हैं उसकी भी एक गति होती है.

ताजा परीक्षण बताता है कि हमारे वैज्ञानिकों ने इन सभी हेतु अत्याधुनिक  प्रणाली विकसित कर ली है. इसी सफल परीक्षण के साथ भारत, अमेरिका, रशिया, चीन  जैसे देशों की कतार में शामिल हो चुका है, जिनके पास यह अत्याधुनिक प्रणाली है. अच्छी बात यह है कि भारत ने उपग्रह ध्वस्त करने की जो तकनीक  विकसित की है वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय संधि का उल्लंघन नहीं करती. अंतरिक्ष मे हथियारों की तैनाती को लेकर अंतरिक्ष संधि 1967 में  स्थापित हुई थी. जिसमें भारत शुरू से ही शामिल था. यह संधि ऐसे हथियारों को अंतरिक्ष में तैनात करने पर पाबंदी लगाती है, जो जनसंहारक है. कल भारत द्वारा अंतरिक्ष में   जिस प्रकार की प्रणाली का उपयोग किया है. वह तकनीक किसी भी तरह के अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन नहीं करती है.

इससे पहले चीन ने यह उपलब्धि हासिल की थी.  चीन के द्वारा किए गए प्रयोग के बाद दुनिया भर में तरह-तरह  की प्रतिक्रियाएं सामने आई थी. अमेरिका उस समय नाराज हुआ थी. भारत ने जिस दिन अंतरिक्ष विज्ञान में दाखिल होने का फैसला किया था तभी से नई-नई क्षमताएँ  हासिल  करने का  बुनियादी काम शुरू हो चुका था. आज अंतरिक्ष में संचार कर रहे उपग्रह ध्वस्त करने का हथियार विकसित कर के भारतीय वैज्ञानिकों ने  यह बात साबित कर दी है कि  भारत भावी रक्षा चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए तैयार है. इस सफलता का अर्थ यह नहीं है कि हम अब दूसरे देशों के सेटेलाइट को निशाना बनाने लगेंगे. अब तक ऐसा कोई भी उदाहरण नहीं है कि तकनीक का इस्तेमाल  किसी ने युद्ध के समय किया हो. यह अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ का भी मामला नहीं है. यह मुख्यतः किसी गतिशील ऑब्जेक्ट को मार गिराने की तकनीकी श्रेष्ठता हासिल करने का मामला है. जिसका उपयोग विभिन्न  सकारात्मक उद्देश्य को भी हासिल करने के लिए हो सकता है.

 भारत ने एंटी सैटेलाइट हथियार का सफल परीक्षण करके साबित कर दिया है कि वह अब भविष्य की रक्षा  चुनौतियों के लिए तैयार है, बल्कि उसके लिए अंतरिक्ष भी ऐसा क्षेत्र है जहां अब कोई चुनौती शेष नहीं है.

यह तकनीक हासिल करने  के लिए हमारे वैज्ञानिकों को बधाई देनी चाहिए साथ ही इस तकनीक को उपयोग में लाने का निर्णय लेने वाले भारत सरकार के प्रधान मंत्री  नरेंद्र मोदी जी का भी अभिनंदन करना अत्यंत जरूरी है. यह तमाम भारतीयों में विश्वास निर्माण करने वाली घटना है. भारत देश सुरक्षा के तमाम मुकाम  हासिल करने के पुरजोर प्रयास कर रहा है यह संदेश पूरे विश्व तक पहुंच रहा है.

 

This Post Has 4 Comments

  1. Very informative article. Thank you Amol ji. Our scientists and our leadership deserves a lot of appreciation and credit.

  2. We the Indians have the capacity to explore any new things. Only we need to have support and direction. Under the guidance of Shri Narendra Modiji we are moving towards the right direction. Undoubtedly we will be super power by 2024 & NAMO again in 19 & 24. Bharat Mata Ki Jai.

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