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रक्षाबंधन के त्यौहार के पूर्व इस बार स्वदेशी राखियों की बहार मार्केट में देखीं जा रही है जबकि चीन की राखियाँ नदारद है. स्वदेशीकरण और खुद को स्वावलंबी बनाने के लिए वनवासी क्षेत्रों की बहनों ने २०,००० राखियाँ इस वर्ष तैयार की है. ‘विवेक रूरल डेवलेपमेंट’ की ओर से जरुरतमंद वनवासी महिलाओं को राखी बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था. यह संस्था प्रशिक्षण व रोजगार, शिक्षण और पर्यावरण इन तीन सूत्रों को लेकर कार्य करती है. इन राखियों की विशेषता यह है कि प्राकृतिक रंगों से ही पांच प्रकार की राखियाँ १० रंगों में बनाई जाती है. इनमें कुछ प्रमुख नाम क्रमशः गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी और कावेरी है. महाराष्ट्र के राज्यपाल विद्यासागर राव ने भी ‘विवेक रूरल डेवलेपमेंट’ के राखी उपक्रम की सराहना की है. उक्त संस्था की प्रशिक्षण विकास अधिकारी प्रगती भोईर ने बताया कि निराधार, अशिक्षित, जरुरतमंद महिलाओं के उत्थान हेतु हमने प्रशिक्षण व रोजगार शुरू किया है, उसमें ही राखी उपक्रम भी शामिल है. इसके माध्यम से अनेकानेक महिलाओं ने स्वयं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया और आज अपने परिवार का पालन – पोषण कर रहीं है.

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