उद्धव ठाकरे की कुर्सी पर संकट के बादल, मोदी से लगाई मदद की गुहार

  • उद्धव ठाकरे की कुर्सी पर संकट के बादल
  • राज्यपाल के पास मनोनीत के लिए दो बार दिया आवेदन
  • उद्धव ठाकरे ने पीएम मोदी से की फोन पर बात, मोदी ने हल निकालने का दिया आश्वासन
  • उद्धव कैबिनेट ने बुधवार को राज्यपाल से की मुलाकात
  • बीजेपी ने लगाया राज्यपाल पर दबाव बनाने का आरोप 
महाराष्ट्र कोरोना की वजह से परेशानी से गुजर रहा है लेकिन इसी बीच सरकार के लिए एक और बुरी खबर है उद्धव ठाकरे ने बिना विधायक बनें मुख्यमंत्री की शपथ ग्रहण की थी जिसके 6 महीने के अंदर उन्हे किसी भी सदन का सदस्य बनना होता है लेकिन कोरोना ने यह सारा खेल बिगाड़ दिया और उद्धव सरकार के 6 महीने पूरे होने वाले है लेकिन अभी तक वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं बन सके है। महाराष्ट्र कैबिनेट की तरफ से राज्यपाल के पास मनोनीत करने का प्रस्ताव भेजा था लेकिन अभी तक राज्यपाल ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। उद्धव सरकार की तरफ से राज्यपाल के पास दो बार सिफारिश की है लेकिन अभी तक राज्यपाल की तरफ से कोई फैसला नहीं लिया गया है जिसके बाद अब उद्धव सरकार पर संकट के बादल मडरा रहे है।
वहीं उद्धव ठाकरे ने इस पूरे मामले पर संकट को देखते हुए बुधवार को प्रधानमंत्री से बात की और इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा है जिस पर पीएम मोदी ने आश्वासन दिया कि वह जल्द से जल्द इसका हल निकालने के लिए कहा है।
उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री से कहा कि राज्य सरकार कोरोना संक्रमण को लेकर पहले से ही परेेशान है और ऐसे में राज्य में किसी भी तरह का राजनैतिक परिवर्तन जनता में गलत संदेश देगा साथ ही इसका असर राज्य के कामों पर भी पड़ेगा। इससे पहले बीजेपी और शिवसेना वालों  से साथ में सरकार बनाती आयी है लेकिन इस बार राजनीतिक में कुछ तालमेल नही बैठा और शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। 
बुधवार को महाराष्ट्र अघाड़ी संगठन की तरफ से कुछ नेताओं ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की और उनसे निवेदन किया कि उद्धव ठाकरे को सदस्य के तौर पर जल्द से जल्द नामित किया जाए। इसके साथ ही नेताओं ने राज्यपाल से कारण बताने का भी आग्रह किया कि आखिर उद्धव ठाकरे को अभी तक मनोनीत क्यों नही किया गया। वहीं राज्यपाल से मुलाकात के बाद बीजेपी ने यह आरोप लगाते हुए कहा कि राज्यपाल पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाया जा सकता। बीजेपी नेताओं के मुताबिक महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार राज्यपाल से मुलाकात कर उन पर दबाव बना रही है जिससे फैसला गलत लिया जा सकता है।
उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री की शपथ लेने के 6 महीने के अंदर ही सदन का सदस्य बनना जरुरी है और इसकी आखिरी तारीख 28 मई है अगर इस तारीख तक उद्धव ठाकरे किसी सदन के सदस्य नहीं होते तो उनको मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ेगा। लेकिन आखिरी फैसला राज्यपाल के पास सुरक्षित है अब सभी दलों की निगाहें राज्यपाल के फैसले पर टिकी हुई है जबकि राज्यपाल ने अभी तक कुछ साफ नहीं किया है कि वह फैसला किस के पक्ष में लेगे वहीं पीएम मोदी के साथ उद्धव ठाकरे की बातचीत के बाद इस पर अब जल्द ही हल निकलने की उम्मीद जताई जा रही है साथ ही पीएम ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को यह आश्वासन भी दिया है कि वह जल्द ही इसका कुछ हल निकालेंगे।

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