रक्षा क्षेत्र का निजीकरण “विकास या सुरक्षा में सेंध”

  • सरकार के निजीकरण के फैसले पर उठा सवाल 
  • रक्षा क्षेत्र के निजीकरण पर कांग्रेस ने किया सवाल
  • निर्मला सीतारमण ने कहा निजीकरण से बढ़ेंगे रोजगार
  • भारत दूसरा सबसे बड़ा हथियार खरीदने वाला देश

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने आर्थिक पैकेज के घोषणा के दौरान रक्षा क्षेत्र में निजीकरण का जिक्र किया। निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस फैसले से ना सिर्फ मेक इन इंडिया प्लान को मजबूती मिलेगी बल्कि रोजगार के भी अवसर पैदा होंगे। सरकार के राहत पैकेज के चौथे प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयात देश है लेकिन भारत को इसके लिए अमेरिका, चीन, रुस जैसे तमाम देशों पर निर्भर रहना पड़ता है पिछली सरकारों ने इन क्षेत्रों को कभी भी आगे बढ़ाने का काम नहीं किया। जिससे एक बड़े बजट के बाद भी भारत की सैन्य ताकत उतनी मजबूत नहीं हो सकी जितनी कि हमें जरूरत है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में निजीकरण के होने से रोजगार के अवसर पैदा होंगे और उससे देश भी आत्मनिर्भर बनेगा।

निर्मला सीतारमण ने जानकारी देते हुए बताया कि धीरे-धीरे दूसरे देशों से आयात कम किया जाएगा और स्वदेशी उपकरणों का उत्पादन तेजी से किया जाएगा। रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को ऑटोमैटिक एफडीआई के तहत 49 फ़ीसदी से बढ़ाकर 74 फ़ीसदी तक की जाएगी इसके साथ ही भारत सरकार अपने बजट में स्वदेशी उपकरणों को लेकर अलग से बजट पेश करेगी। सरकार की नजर पूर्ण रूप से स्वदेशी कारोबार पर पड़ी है जिसे वह हर तरीके से और हर क्षेत्र में आगे बढ़ाना चाहती है इससे ना सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा बल्कि भारत एक आत्मनिर्भर देश बनेगा।

वही निर्मला सीतारमण के निजीकरण के बयान के बाद से कुछ विरोधी पार्टियों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस पार्टी ने सबसे पहले इसका विरोध किया और कहा की रक्षा क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देना निंदनीय है क्योंकि यह देश की सुरक्षा का सवाल है निजीकरण से सुरक्षा पर सवाल उठ सकते हैं और देश के गोपनीय उपकरणों की जानकारी दूसरे देशों तक आसानी से पहुंच सकती है। हालांकि यह पहली बार नहीं है इससे पहले भी कुछ और विभागों में सरकार के निजीकरण को लेकर कांग्रेस ने इसका विरोध किया था और यह कहा था कि सरकार पूरे देश को कुछ चुनिंदा हाथों में बेच रही है जबकि सरकार की तरफ से हर बार यह सफाई दी जाती है कि वह देश को एक नए नियम के तहत आगे बढ़ाना चाहती है क्योंकि पुरानी सरकारों ने किसी भी तरह का बड़ा परिवर्तन नहीं किया क्योंकि सरकार के खजाने में पैसे ही नहीं होते थे जबकि केंद्र की मोदी सरकार पैसे का हवाला ना देते हुए निजीकरण के रास्ते हर क्षेत्र का विकास कर रही है।

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