लालफीताशाही टूटे तो चमत्कार हो जाएगा- यशवंत सिंह

यशवंत सिंह – वाइस प्रेसिडेंट सेमसोनाइट साउथ एशिया

मैं सैमसोनाइट साउथ एशिया लिमिटेड में वाइस प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत हूं। सैमसोनाइट से जुड़े सभी उत्पादों के उत्पादन और वितरण का मैं प्रभारी हूं। पर्यटन से जुड़े हुए उत्पाद हम बनाते हैं। जिसमें सूटकेस, हैंड बैग आदि शामिल हैं। अमेरिकन टूरिस्टर ब्रांड भी हमारा ही है। कोरोना संकट एवं लॉकडाउन का पर्यटन पर सर्वाधिक परिणाम हुआ है। हमारा पूरा व्यापार पर्यटन पर ही आधारित है। इस वर्ष हमारे व्यापार पर प्रतिकूल परिणाम होंगे। लगभग एक वर्ष तक हमारे पर्यटन से जुड़े उत्पादों की मांग बेहद कम रहेगी। वर्ष 2021 के बाद से ही मांग में तेजी दिखाई देगी, ऐसा हमारा आकलन है। जैसे ही मांग बढ़ेगी हम अपना उत्पादन बढ़ा देंगे। जो बाजार में टिके रहेगा वही आने वाले मौका का लाभ उठा पाएगा।हमारे देश में टैलेंट और परिश्रम करने वालों की कोई कमी नहीं है। बस हमारी आत्मशक्ति, इच्छाशक्ति एवं विचारशक्ति को सही दिशा में आगे बढ़ाने की दरकार है। हमारे सामने आई सबसे बड़ी चुनौती को हम अवसर में तब्दील कर सकते हैं। अब समय आ गया है कि हम आयातक की भूमिका को छोड़कर निर्यातक बनने की ओर अग्रसर हो। हमें आत्मनिर्भर बनने के लिए स्वयं का एक इको सिस्टम विकसित करना होगा। माहौल भले ही हमारे खिलाफ दिखाई दे रहा हो लेकिन उसके पीछे बहुत बड़े अवसर हैं। इन मौकों का फायदा उठाने के बीच लालफीताशाही सबसे बड़ी अड़चन है। सरकार के विचार व योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने के दरम्यान काफी अंतर रह जाता है। यदि इस अंतर को खत्म किया जा सके तो मुझे लगता है कि देश के सामने बहुत अच्छा मौका है आगे बढ़ने का और दुनिया के सामने खुद को साबित करने का। दुनिया भारत के पहल का स्वागत करने को बेकरार है। भारत क्या कदम उठाएगा, दुनिया की नजरें इसी बात पर टिकी हुई हैं। चीन की जगह भारत दुनिया की जरूरतें पूरी
करे, यही अपेक्षा दुनिया भर के देश भारत से कर रहे हैं। कुछ लोग भारत की तुलना अमेरिका सहित अन्य देशों से कर रहे है जो कि बिल्कुल गलत बात है। विकसित देशों की तुलना विकासशील देशों से कैसे की जा सकती है? उनकी प्रति व्यक्ति आय हमसे बहुत अधिक है। भारत जैसे विकासशील देश के सामने समस्याएं व चुनौतियां बहुत अधिक हैं। लोग यह भूल जाते हैं कि हम 130 करोड़ आबादी वाले देश है। हम अभी 2.5 ट्रिलियन की इकोनॉमी है और हम 15 ट्रिलियन की इकोनॉमी से तुलना
नहीं कर सकते। दुनिया भारत को एक व्हाईट इलेफंट के रूप में देखती है उनका मानना है कि एक बार यह व्हाईट इलेफंट चल देता है तो इसको रोकना किसी के बस में नहीं है। मुझे भारतीयों की आत्मशक्ति, विचारशक्ति, इच्छाशक्ति एवं प्रतिभाशक्ति, युवाशक्ति पर पूरा भरोसा है। भारत सबसे कम समय में अपनी अर्थव्यवस्था को संभाल लेगा।

आपकी प्रतिक्रिया...