RBI: अगस्त तक लोन से छुट्टी, ब्याजदरों में कटौती लेकिन बढ़ेगी महंगाई

  • रिजर्व बैंक ने मोराटोरियम अवधि को अगस्त तक बढ़ाया
  • रेपो रेट में 40 बेसिस प्वाइंट की हुई कटौती
  • हर तरह के लोन की ब्याज दरें होंगी कम 
  • वर्ष 20-21 की जीडीपी दर होगी नकारात्मक

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक बार फिर से देश की जनता को लोन में राहत दी, लेकिन इस दौरान उन्होंने यह माना कि वर्ष 2020- 21 के दौरान जीडीपी ग्रोथ नकारात्मक हो सकती है यानी जीडीपी में गिरावट आना लगभग तय है। लॉक डाउन की वजह से लगातार अर्थव्यवस्था में गिरावट देखने को मिल रही है। आरबीआई से पहले कई और एजेंसियों ने जीडीपी को लेकर नकारात्मक रेटिंग दे दी है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी शुक्रवार को अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रेपो रेट में कटौती का ऐलान किया, आरबीआई की नई रेपो रेट में 40 बेसिस पवाइंट की कटौती की गई जिसके बाद यह 4.40 से घटकर 4 फ़ीसदी पर आ गई। रिजर्व बैंक के इस फैसले के बाद से सभी तरह की ब्याज दरें कम हो जाएगी जिसका सीधा फायदा लोगों को ईएमआई में मिलेगा।
 
अगस्त तक किस्त भरने की मिली छूट 
देश में जारी लॉक डाउन के चलते आरबीआई ने 3 महीने की मोराटोरियम की घोषणा की थी लेकिन बढ़ते लॉक डाउन के बाद शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को लोन पर मोरटोरियम की अवधि और आगे बढ़ा दी और यह अब अगस्त तक लागू रहेगा। अब अगस्त किसी भी तरह के लोन पर किस्त भरने की पाबंदी नहीं रहेगी और आप अपने बैंक से लोन भरने पर छूट पा सकते हैं। इससे पहले इसे जून तक लागू किया गया था शक्तिकांत दास ने कहा कि लॉक डाउन बढ़ने की वजह से लोग प्रभावित हुए ऐसे में बैंकों का कर्ज भरना एक बड़ी मुसीबत है जिस को ध्यान में रखते हुए रिजर्व बैंक ने 31 अगस्त 2020 तक के लिए लोन पर मोराटोरियम की अवधि बढ़ाने का फैसला किया है।
 
बाजारों पर संकट के बादल
कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया की इकोनॉमी खतरे में आ चुकी है तमाम एजेंसियां भारत सहित सभी बाजारों को नेगेटिव में दिखा रही हैं। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर शून्य बतायी है। शक्तिकांत दास के साथ-साथ कई और रेटिंग एजेंसियों ने भारत की जीडीपी को नेगेटिव में रहने की आशंका जताई है। सरकार की तरफ से करीब 20 लाख करोड रुपए के ऐलान के बाद भी बाजारों में तेजी देखने को नहीं मिली है जबकि सरकार को इस पैकेज से काफी उम्मीद थी।

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