चीन ने सीमा पर बढ़ाई सेना, क्या है चीन की मंशा?

  • भारत-चीन के बीच विवाद कायम
  • चीन ने सीमा पर बढ़ायी सेना
  • भारत ने भी और सेना की तैनात
  • जल्द होने वाली है सेना के उच्चस्तर की बैठक
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है एक तरफ जहां भारत फिर से सैन्य स्तर पर वार्ता के लिए तैयार था तो वहीं दूसरी तरफ खबर यह आ रही है कि चीन ने एलएसी पर अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाना शुरु कर दिया है। भारत ने भी चीन के इस रवैया को देखते हुए हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में और सेना बल को रवाना कर दिया है। चीन का यह रवैया काफी पुराना है वह दोस्ती और दुश्मनी साथ साथ करता है इसलिए किसी भी देश को उस पर भरोसा कम होता है।
 
चीन का बदलता रुप
इससे पहले भारत और चीन के बीच सेना के उच्च अधिकारियों की बैठक हुई थी जिसके बाद से चीन की सेना करीब ढाई किलोमीटर पीछे हट गई थी जिस से उम्मीद लगाई जा रही थी कि अब दोनों देशों के बीच हालात सामान्य हो रहे हैं। भारत में चीन के राजदूत की तरफ से आधिकारिक बयान भी जारी किया गया था जिसमें कहा गया था कि सीमा विवाद काफी मामूली मुद्दा है जिसे हम आसानी से सुलझा लेंगे लेकिन अचानक से चीन की तरफ से सेना संख्या बढ़ाने पर भारत को फिर से विचार करना होगा।
चीन के निर्माण से शुरु हुआ विवाद
भारत और चीन के बीच विवाद लद्दाख में उस समय शुरू हुआ जब लद्दाख सेक्टर में चीन ने अपना निर्माण कार्य शुरू किया था। चीनी सेना की नाकुला क्षेत्र में भारतीय सैनिकों से भिड़ंत भी हुई थी जिसमें दोनों तरफ से सैनिक घायल हुए थे। आपको बता दें कि हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में भारत से लगी सीमा पर चीन ने निर्माण कार्य किया है जिसको लेकर भारत ने विरोध भी किया था और यही वजह रही कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद फिर से पैदा हो गया।
स्वदेशी से सुधरेगी आर्थिक रफ्तार
चीन से बिगड़े हालात को देखते हुए अब भारत की जानता ने भी चीन का विरोध शुरु कर दिया है। देश की जनता ने चीनी सामान का विरोध करना शुरु कर दिया है और ज्यादातर स्वदेशी सामान पर निर्भर हो रही है इससे पहले पीएम मोदी ने भी आत्मनिर्भर का नारा दिया था। मोदी ने कहा था कि स्वदेशी अपनाने से ना सिर्फ रोजगार का चिंता कम होगी बल्कि देश की आर्थिक रफ्तार भी तेज होगी।

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