उत्पादन के लिए उद्योंगों को मिले छूट

वसई पूर्व नवघर में बहुत बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है। वसई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन से मैं जुड़ा हुआ हूं। हमारे इंडस्ट्रियल एसोसिएशन की स्थापना 1989 में हुई थी। यहां पर लगभग 25,000 औद्योगिक इकाइयां हैं। हमारे एसोसिएशन में 250 के करीब आजीवन सदस्य हैं। यहां पर 150 के करीब औद्योगिक क्षेत्र हैं और इस पर 20 हजार के आसपास कर्मचारियों की आजीविका निर्भर है। सरकार ने कहा है कि अनिवार्य सेवाएं (एसेंसियल सर्विसेस) चालू कर सकते हैं। लेकिन यहां के उद्योग गैर-अनिवार्य सेवाओं (नॉन-एसेंसियल सर्विसेस) में आते हैं। हमारे यहां माइक्रो इंडस्ट्रीज की संख्या सर्वाधिक है। 90 से 95 प्रतिशत के करीब माइक्रो इंडस्ट्रीज हैं। बड़े-बड़े उद्योगों पर ही माइक्रो इंडस्ट्रीज आश्रित हैं। बड़े उद्योगों के बंद होने से
माइक्रो इकाइयों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

अनिवार्य और गैर-अनिवार्य सेवाएं एक ही सिक्के के दो पहलू

अनिवार्य और गैर-अनिवार्य सेवाएं एक दूसरे पर अवलंबित और पूरी तरह एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। आप कह सकते हैं कि दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। सरकार ने हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक आदि दुकानों को खुले रखने की छूट दी है। लेकिन उन दुकानों में आने वाले सामान गैर-अनिवार्य सेवाओं के अंतर्गत ही बनाए जाते हैं। उत्पादन को बंद कर के दुकानों को चालू करेंगे तो यह कैसे मुनासिब होगा? दुकानों में माल कहां से आएगा? एक ओर देश को उत्पादन केंद्र बनाने की बात हो रही है और दूसरी ओर उत्पादन को ही बंद रखा जाएगा तो कैसे हमारा देश उत्पादन के क्षेत्र में आगे बढ़ेगा?

वसई के उद्योगों में बनाए गए थे मंगलयान के पुर्जे

हमारे लिए यह गौरव की बात है कि भारत का जो मंगलयान प्रक्षेपित किया गया था उसके कुछ पुजेर्र् वसई के ही उद्योगों में बनाए गए थे। हमारे यहां एक प्रदर्शनी लगाई गई थी जिसमें महाराष्ट्र क उद्योग मंत्री सुभाष देसाई आए थे और उन्होंने इस बात का जिक्र किया था तथा हमारे कार्य को सराहा था।

लाखों मजदूरों पर आजीविका का संकट

वसई तालुका के नवघर, सातीवली, वालीव आदि औद्योगिक क्षेत्रों में कुल मिलाकर 10 हजार से अधिक उद्योग हैं और ढाई लाख के करीब कर्मचारी इससे जुड़े हुए हैं। उद्योग बंद होने से इन लाखों मजदूरों की आजीविका प्रभावित हो रही है। सरकार कह रही है कि मजदूरों को वेतन दो लेकिन हम वेतन कहां से दे? उदाहरण के तौर पर मैं बताना चाहता हूं कि यदि किसान खेतों में खेती नहीं करेगा, अनाज नहीं उगाएगा तो अनाज मिलेगा कहां से?

उद्योगों पर दोहरी मार

उद्योग-धंधे बंद होने के कारण बड़ी संख्या में मजदूर पलायन करने पर मजबूर हैं और लगातार पलायन का सिलसिला जारी है। मान लीजिए यदि कुछ महीनों बाद औद्योगिक क्षेत्रों को काम करने की छूट दी जाती है तब हमारे पास हमारे उद्योग तो होंगे, मशीनरी भी होगी लेकिन उसे चलाने वाले प्रशिक्षित मजदूर नहीं होंगे। हमें हुनरबाज प्रशिक्षित मजदूर मिलना मुश्किल हो जाएगा। हमारे उत्पादन में तेजी आने में पता नहीं कितना समय लगेगा? इसके साथ ही सरकारी टैक्स, जीएसटी, लाइट बिल, भाड़ा आदि खर्च तो हमारे शुरू हो जाएंगे। हम तो उनसे यह नहीं कह सकते कि हमारे पास पर्याप्त संख्या में मजदूर नहीं हैं, जो थे वे अपने गांव चले गए हैं। इसके कारण हमारा काम सुचारू रूप से नहीं चल रहा है, कमाई नहीं हो रही है। बाजार से हमे पैसे नहीं मिले हैं। हमारी इस दयनीय हालत को सुनने वाला तो कोई नहीं है। कोरोना के संकट काल में भी और लॉकडाउन खुलने के बाद भी भुगतना तो हमें ही है। लॉकडाउन खुलने के बाद तो और भयानक स्थिति आने की संभावना है। अचानक हुए लॉकडाउन से हमारा सारा कच्चा माल धूल खा रहा है। हमारा मशीनरी निवेश, मटेरियल निवेश और तैयार माल बेकार पड़ा हुआ है। आगामी जून माह में मानसून आने वाला है। यदि तेज बारिश हुई तो पानी भरने से लोहे की सामग्री में जंग लग जाएगी। कच्चा माल और तैयार माल पूरी तरह से खराब हो जाएंगे। इससे करोड़ों रुपयों का नुकसान होगा।

आर्थिक नुकसान से बचने का उपाय

सत्ता का विकेंद्रीकरण और जरूरी एहतियात बरतने के साथ उद्योगों को शुरू करने से आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है। स्थानीय जन प्रतिनिधियों को कुछ अधिकार दिए जाए। सरकारी योजनाओं, सुविधाओं आदि निर्देशों का पालन कराने के लिए जन प्रतिनिधियों को नियुक्त किया जाए। इस कार्य में नगरसेवकों का सहयोग लिया जा सकता है। जो अपने क्षेत्र और स्थानीय लोगों से परिचित भी होते हैं। इस कदम से राज्य सरकार को फायदा भी होगा और उद्योगों को गति भी मिलेगी। मेरी सरकार से मांग है कि सभी प्रकार की आवश्यक सावधानियां, निर्देश एवं एहतियात बरतने के साथ उद्योगों को कम अधिक मात्रा में काम शुरू करने की अनुमति दी जाए। जिससे कामधंधा शुरू हो सके और लोगों को रोजी रोजगार की सुविधा सुलभ हो सके। इससे धीरे – धीरे उद्योग-धंधे अपनी रफ्तार पकड़ने लगेंगे।

माइक्रो इंडस्ट्रीज को आर्थिक पैकेज का लाभ कैसे मिलेगा?

मोदी सरकार ने उद्योग सेक्टर को राहत प्रदान करने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की है। एमएसएमई माइक्रो इंडस्ट्रीज को इसका लाभ कैसे मिलेगा? इसका वर्गीकरण कैसे होगा? इस संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी हमें नहीं मिली है। इसलिए मेरा सरकार से अनुरोध है कि इस संदर्भ में आवश्यक जानकारी देने की व्यवस्था की जाए।

कोरोना योद्धाओं को दिया जाए शस्त्र

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा था कि आप सभी कोरोना योद्धा हैं। यदि हम सभी सैनिक हैं और कोरोना के खिलाफ हम युद्धरत हैं तो मैं एक बात बताना चाहता हूं कि दुश्मन के सामने जंग के मैदान में सैनिकों को बिना अस्त्र-शस्त्र के मरने के लिए नहीं छोड़ा जाता। जब सैनिक युद्ध के मैदान में जाता है तो उसे हथियारों एवं अन्य युद्धक सामग्रियों से लैस किया जाता है। इसके पूर्व उसे युद्ध के नियम व अनुशासन सिखाए जाते हैं। सभी प्रकार का आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाता है। उसे दुश्मन के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है। युद्ध का ब्ल्यूप्रिंट उसके सामने रखा जाता है और रणनीति बताई जाती है। हम सरकार से बस इतना कहना चाहते हैं कि हम सब युद्ध करने के लिए तैयार हैं। सैनिक से जो आपकी अपेक्षा है उसी तरह सैनिकों की भी अपेक्षाओं की पूर्ति करें। लेकिन आपने हमारा शस्त्र ही हमसे छीन लिया है और हमें कहा जाता है कि जाओ युद्ध लड़ो, लेकिन हम बिना शस्त्रों के युद्ध कैसे लड़ेंगे?

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