उद्योग जगत के लिए चुनौती भरा सफ़र

महाड इंडस्ट्रियल एसोसिएशन में कुल मिलाकर लगभग 150 यूनिट हैं, लेकिन मजदूरों के पलायन के कारण बहुत कम उत्पादन हो पा रहा है। आने वाले 5-6 माह उद्योगों के लिए संकट भरे होंगे। केंद्र सरकार ने जो पैकेज जारी किया है उसकी उद्योगों तक ठीक से जानकारी नहीं पहुंची है। इस दिशा में कदम उठाना जरूरी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉकडाउन घोषित करते ही देश भर के सभी उद्योग-धंधे अचानक बंद हो गए। इसके साथ ही मजदूरों का पलायन भी शुरू हो गया। सरकार ने कहा कि 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ उद्योग शुरू कर सकते हैं। फार्मा से जुड़े उद्योगों को शुरू करने को सरकार ने मंजूरी दी। हमारे महाड में कुल 22 इंडस्ट्रीज को काम करने की मंजूरी प्रदान की गई; लेकिन मजदूरों के पलायन के कारण उद्योगों को शुरू करने में काफी दिक्कतें आईं। कम कर्मचारियों के चलते उत्पादन में काफी कमी आ गई। मात्र 20 – 25 प्रतिशत उत्पादन ही हो पा रहा है। सरकार के सहयोग से फार्मा इंडस्ट्री चालू हो गई है। आने वाली बाधाओं को भी दूर करने में भी हमें कलेक्टर, तहसीलदार, एसपी आदि प्रशासनिक अधिकारियों से सहयोग मिल रहा है।

स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाए

महाड इंडस्ट्रियल एसोसिएशन में कुल मिलाकर लगभग 150 यूनिट हैं। तमाम तरह के एहतियात बरतने के साथ काम किया जा रहा है। मजदूरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हमने उन्हें इंश्योरेंस भी दिया है। इसके अलावा हमने सरकार से अनुरोध किया है कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य की उचित देखभाल के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए; ताकि किसी भी कर्मचारी में कोरोना वायरस के कोई भी लक्षण दिखने पर उसे तत्काल आइसोलेट किया जा सके और अन्य लोगों को संक्रमण से बचाया जा सके। कोरोना वायरस इतने जल्दी ख़त्म नहीं होने वाला है। काफी लम्बे समय तक कोरोना हमारे साथ ही रहेगा इसलिए तत्काल स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जानी चाहिए। महाड तालुका अंतर्गत हमारे इंडस्ट्रीज में 10 हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। उनकी सुरक्षा के लिए सरकार को पहल करनी चाहिए और सरकार को सहयोग करने के लिए हम भी अपना योगदान देने के लिए तैयार है।

उद्योग के लिए मुश्किल राह

आने वाले 5 – 6 माह या उससे अधिक समय तक हमारे उद्योग में आर्थिक नुकसान होने की अधिक संभावना है। कर्मचारियों को हम उनका पूरा वेतन दे रहे हैं। वेतन में कोई भी कटौती नहीं की जा रही है। कर्मचारियों के वार्षिक वेतन-वृद्धि को भी हम रोक नहीं सकते। क्योंकि कर्मचारियों का कहना है कि हमने पूरी निष्ठा से सालों साल काम किया है इसलिए वर्ष में एक बार बढ़ने वाली वेतन-वृद्धि पर हमारा अधिकार है। वह हमारी कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं है। आगामी 7 – 8 माह हमारे उद्योग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने वाला है। इससे उबरने में हमें डेढ़-दो वर्ष लगेंगे और आगे भी हमें कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

सरकार ने उद्योगों को पटरी पर लाने के लिए राहत पैकेज का ऐलान किया है। कर्मचारियों के पीएफ में कुछ सुविधाएं सरकार द्वारा दी जाएगी। लेकिन इससे उद्योगों को कितना लाभ मिलेगा, इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है। दूसरी बात यह है कि इंडस्ट्रीज को जो भी सामग्री की आपूर्ति हो रही है यदि हमें उसमें कुछ छूट सरकार देती है और टैक्स में कुछ सुविधाएं देती है तो मुझे ऐसा लगता है कि इंडस्ट्रीज को थोड़ी राहत जरूर मिल सकती है। इंडस्ट्रीज क्षेत्र में बिजली दर सर्वाधिक है। यदि बिजली बिल में 20 – 25 प्रतिशत की कमी की जाती है तो इससे भी कुछ राहत उद्योगों को मिल सकती है। इस तरह की कुछ सुविधाएं देने पर ही उद्योग जगत संघर्ष कर पाएगा। वरना एक बार उद्योग यदि ठप पड़ गया तो उसे फिर से उठाना बड़ा ही मुश्किल हो जाएगा।

राहत पैकेज की पूर्ण जानकारी दी जाए

मेरा सरकार से निवेदन है कि उद्योगों को राहत देने के लिए सरकार ने जो राहत पैकेज देने की बात कही है उस संबध में सारी जानकारी देने के लिए वह सरकारी प्रतिनिधि नियुक्त क रें और वह प्रतिनिधि सभी इंडस्ट्रीज एसोसिएशनों में जाकर इसकी जानकारी दें। राहत पैकेज में से कुछ हिस्सा वह उद्योगों को देने वाले हैं। इस संदर्भ में अलग – अलग जगहों पर जाकर बैठकें कर जानकारी साझा करनी चाहिए। कौन सा व्यवसाय किस श्रेणी में आता है? इससे सम्बंधित सारी जानकारी आगे आकर सरकार को देनी चाहिए; ताकि आर्थिक नुकसान झेलने वाले उद्योगों को भी राहत पैकेज का सही लाभ मिल सके। यदि ऐसा नहीं किया गया तो यह राहत पैकेज अमल में नहीं आ पाएगा और यह केवल खानापूर्ति के लिए बस घोषणा ही रह जाएगी। अभी तक उद्योग जगत से जुड़े हुए लोगों को राहत पैकेज से संदर्भ में उपयुक्त जानकारी नहीं मिली है।

 

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