26/11 हमले में सरकार को सफलता, आतंकी तहव्वुर हुसैन राणा अमेरिका में हुआ गिरफ्तार

  • मुंबई आतंकी हमले में सरकार को सफलता
  • तहव्वुर हुसैन राणा अमेरिका में हुआ गिरफ्तार
  • भारत लाया जा सकता है तहव्वुर हुसैन राणा
  • मुंबई आतंकी हमले में है वांटेड 
 
तहव्वुर हुसैन राणा अमेरिका में गिरफ्तार
26 नवंबर 2008 को आतंकवादियों ने मुंबई पर हमला किया था जिसे 11 साल हो गए। आतंकवादियों द्वारा किए गए इस हमले में करीब 160 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और 300 से अधिक लोग घायल हुए थे। मुंबई पुलिस के कई जांबाज़ पुलिस अधिकारी भी इस आतंकी घटना का शिकार हो गए थे। वहीं भारत सरकार को इस हमले को लेकर एक और सफलता हाथ लगी है। 26/11 हमले में वांटेड पाकिस्तानी आतंकवादी तहव्वुर हुसैन राणा करीब 10 साल की सज़ा काटकर 2 दिन पहले ही अमेरिका की जेल से रिहा हुआ था लेकिन भारत सरकार की अपील के बाद उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। दरअसल हुसैन राणा ने अमेरिकी सरकार के सामने यह गुहार लगाई थी कि वह कोरोना पॉजिटिव है इसलिए उसे जेल से रिहा किया जाए और अमेरिकी सरकार ने उसकी बात मान भी ली थी लेकिन जैसे ही भारत सरकार को इसकी जानकारी मिली भारत सरकार ने उसे फिर से गिरफ्तार करने की अपील की।
 
भारत लाया जा सकता है तहव्वुर हुसैन राणा
भारत सरकार हमेशा से अमेरिकी सरकार से हुसैन राणा के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है लेकिन अमेरिकी जेल में बंद होने की वजह से अमेरिकी सरकार इस पर कोई भी कार्यवाही नहीं कर रही थी लेकिन अब ऐसी उम्मीद की जा रही है कि हुसैन राणा को मुंबई हमले के आरोप में जल्द ही भारत लाया जा सकता है। हुसैन राणा अमेरिकी आतंकी डेविड हेडली का दोस्त बताया जाता है। राणा ने मुबंई आतंकी हमलों में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई थी। जानकारी के मुताबिक मुंबई के ताज होटल में मुनव्वर राणा रुका था और यहीं से उसने आतंकी हमले का पूरा प्लान तैयार किया था।
 
तहव्वुर हुसैन राणा आतंकियो की करता है मदद
तहव्वुर हुसैन राणा को 10 जून 2011 को अमेरिका ने एक हमले की साजिश के आरोप में दोषी ठहराया था इसके साथ ही राणा पर लश्कर-ए-तैयबा की मदद करने का भी आरोप लगा था हुसैन राणा करीब पिछले 10 सालों से अमेरिका की जेल में बंद था क्योंकि उस पर अलग-अलग कई आरोप तय किए गए थे।
 
26/11 मुंबई आतंकी हमला
26 नवंबर को मुंबई में हुए आतंकी हमले में करीब 10 आतंकी शामिल थे हालांकि पुलिस और एनएसजी ने मुठभेड़ के दौरान नौ आतंकवादियों को मौके पर ही मार दिराया जबकि एक आतंकी अजमल कसाब जिंदा पकड़ा गया था। कड़ी पूछताछ के बाद 21 नवंबर 2012 को पुणे की यरवदा जेल में कसाब को फांसी दे दी गई थी इस आतंकी हमले में 160 लोगों की जान गई थी जिसमें ताज होटल पर हुए आतंकी हमले की वजह से कई विदेशी भी इसमें शामिल थे।

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