मॉस्को सैन्य परेड में भारतीय सेना हुई शामिल, रुस से मिलने वाले हथियार से डरा चीन

  • मॉस्को सैन्य परेड में भारतीय सेना भी हुई शामिल 
  • रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा गर्व सीना हुआ चौड़ा
  • S-400 डिफेंस सिस्टम, सुखोई 30, मिग 29 से भारतीय सेना होगी मजबूत
  • चीन ने रुस से कहा भारत को ना दें हथियार
 

द्वितीय विश्व युद्ध(1941-45) में रुस ने जर्मनी पर जीत हासिल की थी जिसके 75 वर्ष पूरे हो गये और इस मौके पर सोवियत रुस ने जश्न मना रहा है। रुस की राजधानी मॉस्को में सैनिकों का एक भव्य परेड निकाला गया है जिसमें भारत की भी तीनों सेनाओं ने हिस्सा लिया है। मॉस्को गये भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसकी एक तस्वीर शेयर करते हुए कहा कि वह एक गर्व महसूस करने का समय है। भारत और रुस के आपसी संबंध बहुत पुराने है दोनों देशों में सत्ता परिवर्तन कई बार हुआ है लेकिन देशों के बीच दोस्ती अब भी कायम है।

भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोवियत रुस के दौरे पर है हालांकि यह उनकी पहले से निर्धारित यात्रा थी लेकिन यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और चीन के बीच सीमा विवाद अपने चरम पर है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद करीब वर्ष 1962 से ही चला आ रहा है लेकिन इस बार बात इसलिए बिगड़ गयी क्योंकि भारत ने चीन को मुहतोड़ जवाब दिया और सीमा पर हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए जबकि चीन को करार जवाब देते हुए उनके भी 45 से अधिक सैनिक मार गिराए। भारत चीन के बीच बन रहे युद्ध जैसे हालात को लेकर राजनाथ सिंह के दौरे को महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है और खबर यह भी है कि राजनाथ सिंह रुस के साथ कुछ बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर भी करने वाले है जिससे सेना को हथियार मिल सकते है।
रुस से इस बात पर सहमति जता दी है कि वह भारत को जल्द से जल्द विमानों और हथियारों की डिलीवरी कर देगा अब अगर भारत को एस-400 डिफेंस सिस्टम, सुखोई 30 और मिग 29 मिल जाता हैै तो भारतीय सेना और भी मजबूत हो जायेगी। भारत सरकार बिना देरी किये इन सभी हथियारों को हवाई मार्ग से लाना चाहती है जिससे यह सेना को तुरंत मिल जाए और अगर चीन फिर से आंख दिखाता है तो उसे भरपूर जवाब दिया जा सके। भारत रुस के बीच इस दोस्ती को देखकर चीन डरा हुआ है और उसे यह समझ आ गया है कि इस बार उसका भारत से भिड़ना गलत कदम साबित हो रहा है। खबर इस बात की भी है कि चीन ने रुस से भारत को हथियार ना देने का भी आग्रह किया है।
चीन ने भारत के साथ 1962 की लड़ाई को याद कर के हमला बोला था और उसे शायद यह उम्मीद रही होगी कि इस बार भी सेना पीछे चली जायेगी लेकिन इस बार दांव उल्टा हो गया और चीन को अब हर तरफ से मार खानी पड़ रही है। भारतीय सैनिकों ने सबसे पहले चीन को सीमा पर खदेड़ दिया और चीनी की दोगुने सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। सीमा विवाद के बाद अब चीन के सामानों का विरोध भी शुरु हो गया है भारत में भले ही 100 फीसदी सामानों पर रोक नहीं लगी हो लेकिन कुछ फर्क तो पड़ा ही है वर्ना चीन अपनी सेना को पीछे जाने का आदेश नहीं देता। कोरोना महामारी को लेकर चीन ने पूरी दुनिया से दुश्मनी मोल ले ली है और भारत के साथ दुश्मनी करके उसने अपने आप को और भी खतरे में डाल लिया है।
रुस ने भारत और चीन के विवाद पर बयान जारी करते हुए यह सुझाव दिया कि यह दोनों देशों का आपसी मुद्दा है इसलिए इस पर दोनों देशों को बैठकर बात करनी चाहिए किसी तीसरे को दखल देने की जरुरत नही है। रुस के विदेश मंत्रालय ने भारत-रुस और चीन के बीच एक वर्चुअल बैठक भी आयोजित की थी जिसमें सभी ने अपना अपना पक्ष रखा। रुस के विदेश मंत्रालय की तरफ से बयान जारी किया गया कि भारत इस मद्दे पर आसानी से निपट सकता है इसलिए किसी और को शामिल करने की जरुरत नही है।

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