शरद पवार ने कांग्रेस को दिया करारा जवाब, कहा 1962 का युद्ध नहीं भूलना चाहिए

  • शरद पवार ने भारत-चीन सीमा विवाद पर दिया बयान
  • सरकार के फैसले का पवार ने किया समर्थन
  • शरद पवार की कांग्रेस को नसीहत, 1962 का युद्ध ना भूले
  • राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर ना करें राजनीति 

शरद पवार का सरकार को समर्थन
भारत चीन के बीच जारी सीमा विवाद को लेकर सरकार जहां एक तरफ पूरी मुस्तैदी से चीन को जवाब देने में जुटी हुई है तो वहीं कुछ विपक्षी पार्टियाँ सरकार से ही सवाल कर रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भारत चीन सीमा विवाद को लेकर एक के बाद एक सरकार से कई सवाल पूछे और सेना के कामकाज पर भी सवाल उठाया। राहुल गांधी को उनके सवालों को लेकर काफी विरोध भी झेलना पड़ा, सोशल मीडिया पर लोगों ने उनको 1962 वाले युद्ध की भी याद दिलाई।
 
 
कांग्रेस ना भूले 1962 का युद्ध 
महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ एनसीपी और कांग्रेस मिलकर सरकार चला रही है लेकिन भारत चीन मुद्दे पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने सरकार का समर्थन किया और कांग्रेस हाथों को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें याद दिलाया कि कांग्रेस को 1962 का युद्ध नहीं भूलना चाहिए। शरद पवार ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर किसी भी पार्टी को राजनीति नहीं करनी चाहिए। शरद पवार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि 1962 की लड़ाई के बाद चीन ने हमारे 45000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लिया था वह भारत के लिए एक बुरा समय था लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए किसी भी पार्टी या नेता को राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
 
 
भारत-चीन हिंसक झड़प
15 जून को भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें भारत के 20 बहादुर सिपाही शहीद हो गए थे जबकि चीन के भी 45 से अधिक सिपाही मारे गए थे हालांकि चीन ने आधिकारिक तौर पर अपने सैनिकों की मौत का आंकड़ा नहीं दिया जिसको लेकर चीन के अंदर भी विवाद चल रहा है। भारत चीन के बीच हुई इस हिंसक झड़प के बाद सेना के बड़े अधिकारियों की बैठक जारी है और भारत की तरफ से यह कोशिश की जा रही है कि हम मुद्दा बातचीत के जरिए सुलझाया जा सके लेकिन चीन की चलाकी और गद्दारी को ध्यान में रखते हुए भारत ने युद्ध की भी पूरी तैयारी कर ली है मतलब भारत पूरी तरह से चीन को जवाब देने के लिए तैयार बैठा है।

This Post Has One Comment

  1. अविनाश फाटक, बीकानेर. (राजस्थान)

    “जब जागो, तब सवेरा!”
    आशा करें कि शरदचन्द्रजी की यह जाग, पुनः सोने के लिये न हो.
    मोदीजी का जितना भी विरोध और आलोचना करनी हो,वह करें.परंतु यदि –
    राष्ट्रवादी हैं,तो राष्ट्र हेतु समर्पित हों.

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