मध्य प्रदेश में शिवराज कैबिनेट का हुआ विस्तार, 28 मंत्रियों ने ली शपथ, सिंधिया का दिखा वर्चस्व

  • मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह के कैबिनेट का हुआ विस्तार
  • 28 मंत्रियों ने ली पद और गोपनीयता की शपथ
  • मंत्रिमंडल में 14 मंत्री ऐसे है जो विधायक नही है 
  • सिंधिया का दिखा मंत्रिमंडल में दबदबा
 
मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट का विस्तार
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान ने मार्च में मुख्यमंत्री के पद की शपथ ली थी लेकिन उनके मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हुआ था हालांकि कि शिवराज के शपथ ग्रहण के कुछ दिनों बाद पांच मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था क्योंकि महामारी का कामकाज लगातार रुकता जा रहा था। गुरुवार को शिवराज सिंह के मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ इस दौरान कुल 28 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इसमें 20 कैबिनेट मंत्री और 8 राज्य मंत्री शामिल है। मंत्रिमंडल के दौरान सिंधिया समर्थक 9 विधायकों को कैबिनेट में जगह दी गयी है।
शिवराज सिंह चौहान ने कमल नाथ को पटखनी देने के बाद मध्य प्रदेश की सत्ता में वापसी की थी और इस पूरे दंगल में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूरी भूमिका निभाई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस का हाथ छोड़ा और मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिर गयी जिसके बाद से शिवराज सिंह चौहान फिर से सत्ता में वापस आ गये। मध्य प्रदेश की राजनीति में सिंधिया को बड़ा मोहरा माना जा रहा था क्योंकि उनकी बदौलत ही बीजेपी ने फिर से सत्ता वापसी की थी। वहीं मध्य प्रदेश बीजेपी में सिंधिया की पकड़ भी तेज दिखने लगी है शिवराज सिंह की कैबिनेट में सिंधिया समर्थक विधायकों को भी बराबर की जगह दी गयी है। 
 
सिंधिया समर्थकों का बड़ा फायदा
सिंधिया के भाजपा में शामिल होने से पार्टी को फायदा हुआ है और शिवराज सिंह ने फिर से सत्ता में वापसी कर ली है लेकिन इसके साथ कुछ ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिला है। शिवराज सिंह चौहान की कैबिनेट में कुल 34 मंत्री है जिसमें से 14 मंत्री उन लोगों को बनाया गया है जो कांग्रेस से बगावत कर के आये है लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब बिना विधायक बने 14 लोगों को मंत्री बनाया गया है। वैसे देखा जाये तो कांग्रेस छोड़ने से इन नेताओं को बड़ा फायदा मिला है और यह अब मंत्री का पद भार संभाल रहे है।
 
 
आखिर कैसे बदली मप्र की सियासत
मध्य प्रदेश में भाजपा शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में 15 साल तक सत्ता में रही लेकिन आखिरी बार हुए विधानसभा चुनाव में जनता ने कांग्रेस पर विश्वास जताया और बीजेपी को विपक्ष में बैठने का मौका दिया लेकिन खुद कागेस के नेता अपनी पार्टी पर विश्वास नहीं दिखा सके और ज्योतिरादित्य ने अपने समर्थकों के साथ पार्टी से बगावत कर ली और बीजेपी ने शामिल हो गये जिसके बाद ज्योतिरादित्य को उपहार के तौर पर उनके ही गृह राज्य से राज्यसभा उम्मीदवार घोषित कर दिया गया और अब शिवराज सिंह की कैबिनेट में उनके समर्थकों को बड़े पद से भी नवाजा गया है।

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