बरसात और फैशन


बरसात का मौसम किसे अच्छा नहीं लगता? पहली बारिश के बाद वातावरण में भिन जाने वाली मिट्टी की सोंधी गंध से हर एक का मन प्रफुल्लित हो जाता है। बारिश के मौसम के खुशनुमा माहौल, हरे-भरे वातावरण और शीतल हवाओं का इंतजार सभी को होता है। लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी होता है: बरसात का जिक्र होते ही हर तरफ पानी-ही-पानी, कीचड़, मिट्टी और माहौल में व्याप्त बेहद आर्द्रता की कल्पना से शरीर में पैदा होने वाली झुरझुरी का भी भान होने लगता है। खास कर महिलाओं सोचना पड़ता है कि बारिश के इस मौसम में कैसे कपड़े पहनें; जिससे कि कीचड़ या गंदे पानी के दागों से बचा जा सके।

हालांकि बरसात में अपनी खास स्टाइल का जलवा दिखाना थोड़ा मुश्किल काम होता है। इसलिए इस मामले में थोड़ा ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत होती है। इन बातों को देखते हुए महिलाओं को वही कपड़े पहनने चाहिए, जिसमे वे सहज महसूस करें। बरसात में आपके पहनावे जितने सादे होंगे, उतने ही अच्छे लगेंगे। इसके विपरीत जितने ही महंगे, जरीवाले और तड़क-भड़क कपड़े धारण करेंगी, बारिश में उनके खराब होने की आशंका उतनी ही बढ़ जाती है। इन पर लगे कीचड़ के दाग कभी नहीं जाते। इसलिए जरीवाले कपड़े पहनने से बचना चाहिए। जितना हो सके सफेद, गुलाबी, पीला, जामुनी जैसे रंगोंवाले कपड़ों से परहेज करें। बेहतर यही है कि हल्के रंगोंवाले कपड़ों का इस्तेमाल ही न करें। क्योंकि इन पर कीचड़ के दाग बिलकुल साफ दिखाई देते हैं और इन्हें आसानी से निकाल पाना भी संभव नहीं होता। कितना भी रगड़-रगड़ के साफ करें, पर दाग रह ही जाते हैं। यही नहीं, कपड़े के जिस हिस्से पर ये दाग लगते हैं, वे कड़े हो जाते हैं। इसके साथ कपड़े की चमक और सुंदरता भी नष्ट हो जाती है। इसलिए बरसात में ऑलिव ग्रीन, चॉकलेटी, गहरे नीले, काले, नीले और लाल जैसे ज्यादा-से-ज्यादा चटख रंगों वाले परिधान धारण करने चाहिए। ऐसे कपड़ों पर दाग दिखाई भी नहीं देंगे और आसानी से निकल भी जायेंगे।

यह तो कपड़ों के रंगों की बात हुई। अब कपड़ों की बुनावट की बात करते हैं। बारिश में ऐसे कपड़ें हों, जो कि गीले होने पर आसानी से सूख जायें, जो पहनने में सहज और आरामदायक हों, जो न बहुत चुस्त हों और न ही ढीले-ढाले। सिंथेटिक कपड़े तो बिलकुल ही नहीं पहनना चाहिए। ऐसे कपड़े शरीर से चिपक जाते हैं। बारिश में ज्यादा कपड़ों से त्वचा-रोग पैदा होने का खतरा पैदा हो जाता है।

बारिश के मौसम में महिलाओं को ऐसे कपड़ों से भी परहेज करना चाहिए, जो भीगने पर पारदर्शी हो जाते हैं। सूती कपड़ों का इस्तेमाल बिलकुल नहीं करना चाहिए। इसकी जगह मोटे फैब्रिक जैसे पॉली नायलान, सिल्क या मिलावटी कॉटन का इस्तेमाल करना चाहिए। महिलाओं को जहां तक हो सके इस मौसम में पूरी बांह के कपड़े नहीं पहनना चाहिए। बगैर बांह के पहनें या फिर छोटी बांह के पहनना अच्छा रहेगा। बेहता हो कि आप जर्शी ड्रेस, सार्ट शर्ट ड्रेसेज़ और डीप ड्राय फैब्रिक निर्मित सलवार कमीज पहनें। चूड़ीदार कपड़े काफी बेहतर साबित हो सकते हैं।

महिलाओं को बारिश में ऐसे भी कपड़े नहीं पहनना चाहिए, जो कि गीले होने पर भारी हो जाते हैं जैसे कि जींस या फिर मोटे मैटेरियल से बने कपड़े। कॉलेज जाने वाली लड़कियों को भी इनसे बचना चाहिए। इसकी जगह कैपरीस या स्कर्ट का इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे कि उनकी स्टाइल भी बनी रहती है।

बरसात में कपड़ों के साथ पांव में पहने जानेवाले जूते-चप्पलों पर भी पर्याप्त ध्यान देना चाहिए। इस बात को ध्यान में रखा जाना चाहिए कि बरसात में जमीन की सारी धूल और मिट्टी कीचड़ में रूपांतरित हो जाती है। अगर इसके अनुकूल जूते-चप्पल नहीं पहनते तो उसका असर आपके पूरे व्यक्तित्व पर पड़ता है। बारिश में, रबर बूट्स, स्पोर्ट सैंडल, प्लास्टिक के बने जूते-चप्पलों का इस्तेमाल करना चाहिए। चमड़े के जूते पहनना जरूरी हो तो लैस वाले जूते पहनें- साथ में मोजे भी हों।

बरसात में छाते से ज्यादा कारगर रेनकोट होते हैं। रेनकोट कपडों को बचाने में छातों से ज्यादा बेहतर साबित होते हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि सही परिधान, सही स्टाइल हो तो बरसात की रिमझिम का आप भरपूर आनंद उठा सकती हैं।

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