महिंद्रा ने सेना के लिए बनाया बेहतरीन ट्रक, आतंकियों के हमले होंगे नाकाम

  • महिंद्रा ने सेना के लिए बनाया बख्तरबंद ट्रक
  • आतंकी हमले से सेना को बचाएगा ट्रक
  • आनंद महिंद्रा ने ट्रक को बताया मीन मशीन
  • ट्रक में मौजूद है सभी आधुनिक सुविधाएँ
देश में आतंकी घटनाओं और नक्सली घटनाओं पर सरकार की तमाम कोशिश के बाद भी पूरी तरह से रोक नहीं लग पा रही है। सेना के जवान हर दिन अपने प्राणों की बाजी लगाकर आतंकियों से लड़ते है और देश को सुरक्षित रखते है लेकिन इसके बाद भी कभी कभी आतंकी अपने नापाक मंसूबों में कामयाब हो जाते है और जवानों को बड़ा नुकसान पहुंचा देते है जिसमें सेना के जवान शहीद तक हो जाते है या फिर बुरी तरह से जख्मी हो जाते है।

देश की आम जनता लेकर अमीरों तक के लिए आलीशान कार बनाने वाले आनंद महिंद्रा ने एक बड़ी पहल करते हुए सेना के लिए एक ऐसी ट्रक तैयार की है जिससे सेना के जवानों की पूर्ण रुप से सुरक्षा की जा सकती है। महिंद्रा की तरफ से तैयार यह ट्रक पूरी तरह से बख्तरबंद है जिस पर बाहर से किसी भी हमले का असर नहीं होगा, इतना ही नहीं यह ट्रक पूरी तरह से आधुनिक है और इसमें वह तमाम टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया गया है जो सेना की ज़रूरतों को पूरा करता है।
महिंद्रा का तरफ से इस ट्रक को पूरी तरह से सेना को ध्यान में रख कर बनाया गया है और इस ट्रक का सिर्फ एक ही मकसद लगता है कि इससे जवानों की रक्षा पूरी तरह से की जा सकती है और उन्हे किसी भी तरह के आतंकी हमले से बचाया जा सकता है। 
इस ट्रक को आतंकियों या फिर नक्सली क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जा सकता है जिससे सेना को फायरिंग, लैंड माइन्स या फिर हल्के बम से बचाया जा सकता है। इस ट्रक की यह भी ख़ासियत है कि इसके द्वारा लैंड माइन्स को भी आसानी से ढूंढ कर निकाला जा सकता है। ट्रक में लगे सीसीटीवी की मदद से पूरे इलाके की निगरानी ट्रक के अंदर से ही की जा सकती है। 

आनंद महिंद्रा ने इस ट्रक की फोटो को ट्वीट करते हुए इसे मीन मशीन बताया। कंपनी के मुताबिक इस ट्रक को संयुक्त राष्ट्र में भी इस्तेमाल के लिए भेजा जायेगा। महिंद्रा की तरफ से यह कोई पहला डिफेंस वाहन नहीं है इससे पहले भी कंपनी ने भारत की सेना को कई मजबूत और भरोसेमंद वाहन मुहैया कराया है। भारतीय सेना के तीनों अंग थल, जल और वायु ने महिंद्रा के वाहनों का इस्तेमाल किया है। भारत सरकार की तरफ से भी इस बात पर जोर दिया गया है कि डिफेंस में स्वदेशी इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाये।

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