आसमानी आफत से परेशान बिहार और असम!

देश में कोरोना ने तो तबाही मचा ही रखी है इसी बीच बाढ़ ने भी दस्तक दे दी जिससे लोग और भी परेशान हो गये है। हर साल की तुलना में इस बार हर राज्य में बारिश करीब समय से पहले हो रही है और ज्यादा भी हो रही है। भारी बारिश की वजह से ज्यादातर राज्य में परेशानी देखने को मिल रही है लेकिन बिहार और असम में बाढ़ से जनता और सरकार पूरी तरह से परेशान है। बाढ़ की वजह से असम में करीब 84 लोगों की मौत हो गयी है जबकि बिहार में भी भारी बारिश के दौरान बिजली गिरने से 10 लोगों की मौत हो गयी। 
भारी बारिश की वजह से बिहार और असम के कई गांव डूब गये है। सरकार की तरफ से सहायता कार्य जारी है लेकिन लोग पूरी तरह से परेशान हो चुके है क्योंकि लॉकडाउन की वजह से लोग पहले से ही परेशान थे और लोगों के पास खाने पीने की कमी हो रही थी और फिर अचानक से आई बाढ़ ने मुसीबत और बढ़ा दी है। लॉकडाउन में लोगों के घर का अनाज खत्म होने की कगार पर था जिससे लोग अपनी खेती पर आश्रित थे लेकिन अचानक से आयी बाढ़ ने सब कुछ बहा दिया और लोगों को बेघर कर दिया। 
 
 
असम में भारी बारिश की वजह से करीब 70 लाख से अधिक लोग बेघर हो चुके है और बारिश और भूस्खल की वजह से 110 लोगों से अधिक की मौत हो चुकी है। सड़क, पुल सब कुछ एक जैसा दिख रहा है जहां तक नजर जाती है सब पानी ही पानी दिख रहा है। असम की 1 लाख हेक्टेयर से अधिक खेती की ज़मीन पानी में डूब चुकी है। 2500 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ गये है जहां ना तो किसी के घर का पता चल रहा है और ना ही उनके सामान का करीब 47 हजार से अधिक लोग राहत कैंप में अपना जीवन बिता रहे है। 
प्रकृति मानों असम से रुठ गयी है और प्रलय लाने पर तुली हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक अभी तीन दिन और बारिश की चेतावनी जारी की गयी है अब अगर यह बारिश होती है तो भगवान ही जाने क्या होगा। राज्य के लिए वरदान मानी जाने वाली ब्रह्मपुत्र नदी अब लोगों के लिए प्रलय बनी हुई है बारिश के बाद नदी की कोई सीमा नहीं रही और वह खुले में बह रही है। पीएम मोदी ने असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल से फोन पर बात की और राज्य के हालात का जायजा लिया। 
बिहार के साथ साथ नेपाल में जारी बारिश की वजह से बिहार के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे है। राज्य की नदियां लगातार अपनी सीमाएं बढ़ा रही है और एक के बाद एक गांव को अपनी चपेट में ले रही है। कोसी नदी का जल स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है जिससे निचले इलाके पूरी तरह से डूब चुके है।राहत और बचाव कार्य की टीम लगातार लोगों को बाहर निकालने में लगी हुई है। बिहार में जारी इस आसमानी आफत को लेकर बिहार सरकार लोगों के निशाने पर है क्योंकि जनता का आरोप है कि सरकार की तरफ से गैरजिम्मेदारी देखने को मिल रही है। नदी पर बने बांध पहले से ही कमजोर थे जिसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को दी गयी थी लेकिन प्रशासन इसे सुरक्षित बताते हुए बांध की मरम्मत नही करवायी आज उसी बांध के टूटने से राज्य के हालात बिगड़ रहे है। 
बिहार और असम के सामने समस्या यह है कि बाढ़ की वजह से अब लोगों की तबियत बिगड़ने लगी है लेकिन उनके पास डाक्टर के यहा जाने की भी सुविधा नहीं मिल रही है। लोगों के पास सिर्फ नाव का ही सहारा बचा है। बारिश की वजह से सांप और बिच्छू जैसे ज़हरीले जानवर भी सूखी जमीन खोज रहे है ऐसे में लोगों को अब हर दिन ऐसे जानवरों से भी बचना पड़ रहा है। फिलहाल दोनों ही राज्य की जनता अब इस मुसीबत को स्वीकार कर चुकी है और अपनी लड़ाई लड़ रही है।

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