राज्य सभा में कांग्रेस नेताओं के सामने सिंधिया ने क्यों जोड़ा हाथ, सिंधिया व दिग्विजय हुए आमने-सामने

एक कहावत है कि राजनीति में ना कोई हमेशा के लिए दुश्मन होता है और ना ही कोई हमेशा के लिए दोस्त, यह कहावत आज उस समय में चरितार्थ हुई जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बीजेपी नेता के तौर पर राज्य सभा सदस्य के पद और गोपनीयता की शपथ ली। ज्योतिरादित्य सिंधिया कभी सदन में बीजेपी पर ही हमले करते थे और काग्रेस का बचाव करते थे लेकिन पार्टी के अंदरुनी हमलों की वजह से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी से ही किनारा कर लिया और बीजेपी में शामिल हो गये थे जिसके बाद बीजेपी ने फिर से मध्य प्रदेश की सत्ता में वापसी कर ली। 
बुधवार को राज्य सभा में नवनिर्वाचित सदस्यों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू के समक्ष 61 नवनिर्वाचित सदस्यों में से 45 लोगों ने शपथ ग्रहण किया। यह सभी सदस्य राज्यों से उच्च सदन के लिए चुन कर आये है। वैसे तो राज्य सभा में नये सदस्यों के शपथ ग्रहण का कार्यक्रम कई बार देखा गया है लेकिन आज का शपथ ग्रहण बीजेपी और कांग्रेस के लिए खास था क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने से कांग्रेस को राज्य के साथ साथ सदन में भी झटका लगा है।

 

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को राज्यसभा में पद और गोपनीयता की शपथ ली लेकिन आज खास यह था कि ज्योतिरादित्य ने शपथ से पहले गुलाम नबी आजाद और मल्लिकार्जुन खड़गे की सीट की तरफ बढ़े और उन्हे नमस्ते किया इस दौरान गुलाम नबी आजाद सिंधिया की पीठ थप थपाकर उन्हे बधाई दी इसके बाद सिंधिया दिग्विजय सिंह की सीट की तरफ बढे और उनका भी अभिवादन स्वीकार किया। वैसे तो भारत में बड़ों को नमस्कार करने की बहुत ही प्राचीन प्रथा है लेकिन आज राज्य सभा में ज्योतिरादित्य सिंधिया के नमस्कार को राजनीति के चश्में से देखा जा रहा है और इसके कई मायने निकाले जा रहे है।  
 
ज्योतिरादित्य सिंधिया को राहुल गांधी का काफी करीबी माना जा रहा था और सदन में दोनों ही युवा नेताओं की सीट भी पास पास थी। सदन में ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी का मजबूत पक्ष रखने के लिए भी जाना जाता था लेकिन दिग्विजय सिंह से साथ जारी शीत युद्द की वजह से सिंधिया को पार्टी से बगावत करनी पड़ी। कांग्रेस सहित सभी को जगजाहिर था कि मध्य प्रदेश की राजनीति में दिग्विजय सिंह और कमल नाथ सिंह कभी भी ज्योतिरादित्य सिंधिया को उपर नहीं आने देंगे और यही वजह रही कि कांग्रेस के दोनों वरिष्ठ नेताओं ने सिंधिया को मुख्यमंत्री पद से दूर रखा। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी से राज्य सभा के नवनिर्वाचित सदस्यों से मुलाकात की और सभी से कहा कि आने वाले समय में यह सदस्य पार्टी के पक्ष को मजबूती के साथ जनता के सामने पेश करेंगे। पीएम ने सभी से अपील करते हुए कहा कि आप सभी सदस्य जनता के बीच भी जायें और लोगों की समस्याओं को सुने। पीएम ने सभी एक ट्वीट भी किया और लिखा, राज्य सभा के नवनिर्वाचित सदस्यों से मुलाकात हुई सभी के विचार से प्रभावित हूं। सभी सदस्य सेवा भाव से भरे हुए है। 

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