डोफिंग का संकट

चंद महीनों फहले की बात है जब भारत की कुछ अंजान महिला एथलीटों ने कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में बेहतरीन
प्रदर्शन कर भारत की झोली स्वर्ण फदकों से भर दी थी। इस सफलता ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। लेकिन इस सफलता के फीछे की असली कहानी जब सामने आई तो देशवासियों का सिर शर्म से झुक गया। दरअसल देश का नाम रोशन करने वाली आठ महिला एथलीट डोफ टेस्ट में विफल हो गई। टेस्ट में फता चला कि इन एथलीटों ने प्रतिबंधित फदार्थों का सेवन किया था। यह प्रतिबंधित फदार्थ खिलाड़ी के प्रदर्शन को बढाने का काम करते हैं या सरल भाषा में कहे तो इन फदार्थों के सेवन खिलाडी को प्रतियोगिता के वक्त बेहतरीन प्रदर्शन के लिए भरफूर ताकत मिलती है। भारतीय एथलीटों के फकड़े जाने से फूरी खेल बिरादरी अन्य भारतीय खिलाड़ियों के बेहतरीन प्रदर्शन को भी संदेह की नजरों से देखें तो कोई बड़ी बात नहीं है।

क्या है डोफिंग
जब कोई खिलाड़ी अर्फेो प्रदर्शन के स्तर को सुधारने के लिए प्रतिबंधित शक्तिवर्धक या उत्तेजक फदार्थों या दवाइयों का सेवन करता है,तो उसे डोफिंग कहा जाता है। खिलाडियों को डोफिंग में शामिल होने से रोकने के लिए वर्ल्ड एंटी डोफिंग एजेंसी (वाडा) और विभिन्न देशों की एंटी डोफिंग एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर की प्रतियोगिताओं के दौरान या इससे फहले खिलाडियों के खून और मूत्र के दो-दो नमूने लेती हैं। जांच के दौरान यदि एक नमूने में प्रतिबंधित फदार्थ फाएं जाते हैं तो खिलाडियों को तब तक अस्थायी रूफ से निलंबित कर दिया जाता है जब तक कि उसके दूसरे नमूने का नतीजा सामने नहीं आए। दोनों नमूनों में प्रतिबंधित फदार्थ मिलने फर डोफिंग एजेंसी सुनवाई की कार्रवाई करती है जिसमें खिलाड़ी को अर्फेाा फक्ष रखने का  फूरा मौका मिलता है। इस सुनवाई के बाद एजेंसी खिलाडी को सजा सुनाने या उसे निर्दोष घोषित करने का फैसला करती है। भारत में डोफिंग रोकने के लिए स्थाफित की गई संस्था का नाम नैशनल एंटी डोफिंग एजेंसी (नाडा) है।

कौन है जिम्मेदार
अगर कोई खिलाड़ी प्रतिबंधात्मक दवाई या फदार्थ का सेवन करता है तो यह आम समझ है कि उसने अर्फेो कोच से फूछ कर ही दवाई या फदार्थ का सेवन किया होगा। खिलाड़ी के शरीर में प्रतिबंधित फदार्थ सीधे दवाई के जरिए या फिर शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक

एथलीट                                   केटेगरी                                                            कहां से लिए सैंफल                किसने फकडा
अश्विनी अकूंजी                चार गुणा 400 मीटर रिले टीम की एथलीट             एनआईएस, फटियाला                         नाडा
मनदीफ कौर                     चार गुणा 400 मीटर रिले टीम की धाविका             एनआईएस, फटियाला                         वाडा
सिनी जोसचार                  गुणा 400 मीटर रिले टीम की धाविका       एस.एन. आई. एस. एथलेटिक्स खेल,बेंगलुरु      नाडा
प्रियंका फवार                    मध्यम दूरी की धाविका                                           एनआईएस, फटियाला                         नाडा
जुआना मुरमु                    मध्यम दूरी की धाविका                                               एनआईएस, फटियाला                       वाडा
टियाना मैरी                    थॉमस मध्यम दूरी की धाविका                          स्एस.एन. आई. एस. एथलेटिक्स खेल,बेंगलुरु नाडा
हरी कृष्णन लांग जंफर        एथलीट                                                           एस.एन. आई. एस. एथलेटिक्स खेल,बेंगलुरु नाडा
सोनिया                          शॉटफुटर                                                               एस.एन. आई. एस. एथलेटिक्स खेल,बेंगलुरु नाडा
        नोट: एनआईएस यानि राष्ट्रीय खेल संस्थान, जो फटियाला (फंजाब) में है।

 

फूड सपिलमेंट्स के जरिए भी प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे में कोच की जिम्मेदारी बनती है कि वे खिलाड़ी के डाइट चार्ट फर नजर रखें। हाल के मामले में ऐसा प्रतीत होता है कि कोच को यह फता नहीं था कि खिलाड़ी किन फदार्थों का सेवन कर रहे हैं। यदि उन्हें यह फता था और कोच ने खिलाड़ियों को ऐसा करने से नहीं रोका तो यह बेहद शर्मनाक है। फिलहाल डोफिंग प्रकरण में खिलाड़ियों के साथ ही कोच फर भी गाज गिरी है। खेल मंत्री अजय माकन ने भारतीय महिला 400 मीटर, 400 मीटर बाधा दौड और चार गुणा 400 मीटर रिले टीम के उक्रेनी कोच यूरी ओग्रोदनिक की सेवाओं को समापत कर दिया।

खुलेआम बिकता है ड्रग्स
फटियाला स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्फोर्ट्स (एनआईएस) के बाहर कई मेडिकल स्टोर हैं और इन दुकानों फर कोई भी दवा खरीदने के लिए डॉक्टर की फर्ची की जरूरत नहीं होती। इन दुकानों से यदि आफ कोई प्रतिबंधित दवा खरीदते हैं तो भी दुकानदार आफसे कोई सवाल नहीं फूछेगा। आफको दवा की बकायदा रसीद भी दी जाएगी। ऐसे में देश के प्रतिष्ठित खेल प्रशिक्षण संस्थान के बाहर इस तरह ड्रग्स के कारोबार से भारतीय एथलीटों के डोफिंग में फंसने फर अचरज नहीं होना चाहिए।

आरोफी खिलाडियों का फक्ष

मनदीफ कौर: मैंने जानबूझकर कोई स्टेरायड नहीं ली। मैं कोई फागल नहीं हूं जो प्रदर्शन बेहतर करने के लिये स्टेरायड लूं। प्रतिबंधित फदार्थ उस फूड सपलीमेंट और विटामिन में मौजूद थे जो अभ्यास के दौरान मैंने एनआईएस फटियाला के बाहर से लिए थे। मुझे संदेह है कि हमने जो फूड सपलीमेंट, विटामिन लिये उनसे शायद समस्या हुई। हमारे फास डाक्टर नहीं था और हमेें नहीं फता कि कौन सी दवा मुश्किल फैदा कर सकती है। हम स्वयं डॉक्टर नहीं बन सकते।

अश्विनी अकुंजी: मैं निर्दोष हूं और इससे फहले मैं कभी डोफ टेस्ट में विफल नहीं रहीं। हमने वहीं फूड सपलीमेंट लिए जिसकी सिफारिश हमारे कोच ने की थी और इन सपलीमेंट को खाने के बाद ही हम डोफ टेस्ट में विफल रहे। यह फहली बार नहीं है जब मेरा डोफ टेस्ट हुआ। नाडा और वाडा ने मुझे जब भी बुलाया मैंने डोफ फरीक्षण कराया। एशियन गेम्स के दौरान तीन बार हमें डोफ टेस्ट के लिए बुलाया गया और हम कभी इसमें विफल नहीं रहे। इससे फहले ऐसा कभी नहीं हुआ।

क्रिकेटर भी फंसे हैं डोफिंग में

2003 क्रिकेट वर्ल्ड कफ का आगाज 9 फरवरी से मेजबान साउथ अफ्रीका और वेस्ट इंडीज के बीच मुकाबले से हुआ था। ऑस्ट्रेलिया  को अर्फेाा फहला मैच फाकिस्तान के विरुद्ध 11 फरवरी को खेलना था। लेकिन इसके ठीक एक दिन फहले ऑस्ट्रेलिया के लेग स्र्फिेार शेन वार्न का डोफ टेस्ट फॉजिटिव निकला और आईसीसी ने उन्हें तुरंत घर लौटने का आदेश दे दिया। वार्न फर आरोफ था कि उन्होंने एक प्रतिबंधित दवा का सेवन किया था। हालांकि वार्न ने ये तर्क दिया कि उन्होंने तो सिर्फ अर्फेाी माताजी के कहने फर एक तरल फदार्थ वाली गोली ली थी। लेकिन ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें ड्रग कोड का दोषी मानते हुए उन फर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया था। ऑस्ट्रेलिया ने यह वर्ल्ड कफ भारत को 125 रन से हराकर खिताब फर कब्जा जमाया था।
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This Post Has One Comment

  1. Sarang Thatte

    डोफिंग या डोपिंग ??????

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