राम मंदिर के लिए इस नेता ने छोड़ी राजनीति और काटी सजा

एक लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार राम मंदिर का निर्माण शुरु होने जा रहा है और इसका ज्यादातर श्रेय भी मोदी सरकार को दिया जा रहा है और सही भी है कि इस लंबी लड़ाई का अंत करने वाले प्रधानमंत्री मोदी ही है हांलाकि इसमें और भी लोगों को सहयोग और योगदान है लेकिन आज हम उस एक नेता की बात करने जा रहे है जिन्होंने राम मंदिर के लिए अपने राजनीतिक करियर को दांव पर लगा दिया था और सजा भी काटी थी उन पर अब भी केस चल रहा है और हाल ही में उन्होने अपना बयान भी दर्ज करवाया था जी हां हम बात कर रहे है बीजेपी के कद्दावर नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की जिन्होंने राम मंदिर के लिए अपने राजनीतिक करियर की बलि चढ़ा दी थी। 
 
 
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर तमाम हिंदू दल और बीजेपी प्रयास कर रही थी लेकिन सबसे पहली समस्या यह थी कि राम मंदिर की जगह पर मस्जिद का निर्माण पहले से ही फिर ऐसे में राम मंदिर का निर्माण करना मुश्किल था। संघ की तरफ से राम मंदिर की मांग लगातार जारी थी इसके लिए कार सेवकों का विरोध भी तेज हो रहा था जिसके बाद 30 अक्टूबर 1990 को उस वक्त के उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कार सेवकों पर गोली चलाने का आदेश दे दिया था जिसमें कई कार सेवकों की मृत्यु हो गयी थी। 
 
 
उत्तर प्रदेश के हालात को देखते हुए उस समय बीजेपी ने कल्याण सिंह को उत्तर प्रदेश की राजनिती में सक्रिय किया जिसका पार्टी को पूरी तरह से फायदा मिला और कल्याण सिंह ने लोगों को यह भरोसा दिलाया कि अगर बीजेपी की सरकार बनती है तो राम मंदिर का निर्माण जरुर करेंगे। कल्याण सिंह अपनी हिंदूवादी छवि और तेज तर्रार भाषण के लिए जाने जाते थे। सन 1991 में कल्याण सिंह का जादू चला और बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की की सत्ता में पूर्ण बहुमत से जगह बना ली। 
 
 
उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद कल्याण सिंह ने सबसे पहला दौरा अयोध्या का किया और जानकारों की मानें तो उन्होने उस दौरान शपथ ली कि वह राम मंदिर निर्माण करवा कर ही रहेंगे और इसके साथ ही कल्याण सिंह अयोध्या को लेकर रणनीति तैयार करने लगे। कल्याण सिंह की सरकार बनते ही प्रशासन का भी रवैया बदल गया और वह कार सेवकों के साथ नरमी से पेश आने लगी जिसके बाद अयोध्या में कार सेवकों का जमावड़ा शुरु होने लगा और फिर 6 दिसंबर 1992 को कार सेवकों ने मस्जिद का ढाँचा गिरा दिया। कार सेवकों ने कुछ ही समय में पूरी मस्जिद को ज़मीदोज कर दिया और वहां से एक एक ईंट तक गायब कर दी जिससे इसे फिर से खड़ा नहीं किया जा सके। 
 
6 दिसंबर 1992 को मस्जिद को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया गया और इसके लिए कल्याण सिंह को दोषी माना गया और उनकी आलोचना हुई। कल्याण सिंह ने भी इसकी ज़िम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया। इसके साथ ही केंद्र की नरसिम्हा राव सरकार ने यूपी सरकार को बर्खास्त कर दिया और कल्याण सिंह को मस्जिद विध्वंस के आरोप में एक दिन की जेल की सज़ा हुई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के बाद कल्याण सिंह ने कहा कि यह सरकार राम मंदिर के नाम पर बनी थी और अब उसका मकसद पूरा हो गया इसलिए हमें सरकार से बाहर होने का कोई दुख नहीं है। 
 
 
5 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में पैदा हुए कल्याण सिंह ने राजनीति में बहुत बड़ा मुकाम हो हासिल नहीं किया लेकिन राम मंदिर के लिए उनके योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकेगा। राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरु होने जा रहा है यह पूरे भारत के हिंदुओं के लिए एक बड़ी जीत है लेकिन इसके लिए जिन लोगों ने योगदान दिया है उनमें कल्याण सिंह का नाम सबसे पहले आयेगा। कल्याण सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही अपना राजनीतिक करियर शुरु किया था और अंत में वह राजस्थान के राज्यपाल बनें। अयोध्या मस्जिद विध्वंस विवाद के चलते उन्हे पार्टी से भी ज्यादा मौके नहीं मिल सके क्योंकि उन पर सीबीआई जांच चल रही थी जिसका हाल ही में उन्होने फिर से बयान दर्ज करवाया है। 

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