कर्मवीर सुजय कुलकर्णी

सुजय कुलकर्णी इस समय आशिदा में सबसे कम आयु के डायरेक्टर हैं। उनका पूरा परिवार उच्च शिक्षा प्राप्त है। बड़े भाई श्री सुयश कुलकर्णी हार्डवेयर कम्प्यूटर इंजीनियर हैं। उन्होंने आशिदा का रिले डेवलप किया था। अपने बड़े भाई का प्रभाव सुजय कुलकर्णी पर बहुत गहरा पड़ा।

नहार बिरवान के होत चिकने पात’’ इस उक्ति का तात्पर्य है कि जो पौधा आगे चलकर अच्छा वृक्ष बनेगा, उसके पत्ते सुंदर, चिकने और बड़े होते हैं। यही बात किसी होनहार बालक को देखकर कही जाती है। जो बालक पढ़ने-लिखने में खेलने-कूदने में आदत-संस्कार में, बुद्धि और स्वास्थ्य में उत्तम कोटि का होता है, उसके उज्ज्वल भविष्य की सहज की कल्पना की जा सकती है। ऐसी ही उज्ज्वल भविष्य की कल्पना सुजय कुलकर्णी के माता-पिता, बंधु-बांधव और शुभचिंतक किया करते थे, जब अध्ययन के सम उच्चांकों के साथ कक्षा-दर-कक्षा आगे बढ़ते जा रहे थे। अपने मातापिता की सबसे छोटी संतान सुजय कुलकर्णी का जन्म महाराष्ट्र के ठाणे जिले में सन् 1974 में उस कालखंड में हुआ, जब उनके पिता श्री भाऊ कुलकर्णी अपनी कंपनी आशिदा को विस्तार देने में जुटे हुए थे। उनके साथ सुजय कुलकर्णी की मां सौ. आशालता कुलकणा पूरे मनोयोग से जुटी थीं। उन्होंने बच्चों, परिवार और आशिदा परिवार की देखभाल के लिए अपनी जमी-जमाई स्कूल की नौकरी छोड़ दी। उनकी त्यागपूर्ण मेहनत का सुफल ही था कि आज आशिदा कंपनी एक ख्याति प्राप्त कंपनी बन गयी है।

सुजय कुलकर्णी इस समय आशिदा में सबसे कम आयु के डायरेक्टर हैं। उनका पूरा परिवार उच्च शिक्षा प्राप्त है। बड़े भाई श्री सुयश कुलकर्णी हार्डवेयर कम्प्यूटर इंजीनियर हैं। उन्होंने आशिदा का रिले डेवलप किया था। अपने बड़े भाई का प्रभाव सुजय कुलकर्णी पर बहुत गरे पड़ा। उनके पिताजी श्री भाऊ कुलकर्णी ने कुछ नया निर्माण करने का ध्येंय उनके सामने रखा। उन्होंने बड़े भाई से प्रेरित होकर उनकी ही की तरह साफ्टवेअर को अपना कार्यक्षेत्र बनाया और कम्प्युटर इंजीनियरिंग में डिप्लोमा उन्होंने कालेज में सर्वोच्च अंकों के साथ उत्तीर्ण किया। स्काडा तथ ईआरपी उन्होंने स्वयं विकसित किया। उनकें पिता श्री भाऊ कुलकर्णी का इंडेजेनियस टेक्नालाजी तथा इम्पोर्ट सब्स्टीट्यूट का भार उन्होंने ठाहण किया। आशिदा को एक बड़ी कंपनी के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य के साथ ही उन्होंने कम्प्यूटर इंजीनियरिंग में शिक्षण प्राप्त किया। किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिभा, मेहनत और समर्पण के साथ ही गहन अनुभव की आवश्यकता होती है। उद्योग और व्यवसाय ऐसा क्षेत्र है, जिसमें जितने अधिक प्रतिष्ठानों में काम किया जाए, उतने ही तरह के अनुभव मिलते हैं। यही अनुभव आगे चलकर अपनी कंपनी के विस्तार में काम आता है। शिक्षा पूरी करके सुजय कुलकर्णी समय की मांग के अनुरूप एचसीएल-एचपी (उस समय की देश की सर्वाधिक पे पैकेज देने वाली कंपनी) में नौकरी स्वीकार की। उनके पिताजी हमेशा कहा करते थे, ’’बाहर कार्य करते हुए हमें जो मिलता है, वही हमारी वास्तविक कीमत होती है।’’

एचसीएल-एचपी में एक वर्ष तक दिल्ली, बंगलुरु तथा मुंबई में कार्य का अनुभव प्राप्त करने के उपरांत सुजय कुलकर्णी ने अपनी घरेलू कंपनी आशिदा में प्रवेश किया। उस समय तक यह कंपनी आशिदा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बन गयी थी, जिसका टर्नओवर एक करोड़ रुपए तक पहुंच गया था।

वैश्वीकरण के साथ ही पूरी दुनिया में तकनीकी विकास हुआ। संचार विकास के साथ ही नयी-नयी तकनीकी खोज के चलते कम्प्यूटर साइंस का नवोत्कर्ष भी हुआ। इस विकास की गति के साथ कदम मिलाकर चलने से ही विशाल औद्योगिक संसार में टिका रहा जा सकता है, यह बात भाऊ कुलकर्णी जानते थे। इसलिए वे आशिदा प्रा.लि. में भी कुछ नया करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने सुजय को कंपनी में नये की शुरूआत करने का दायित्व सौंपा। सुजय ने उस समय की सबसे नयी तकनीक इलेक्ट्रिकल सबस्टेशन आटोमेशन सिस्टम (एस सी ए डी ए) था। इसलिए उन्हें अथ से इति तक सारी व्यवस्था करनी पड़ी। उन्होंने कड़ी मेहनत करके आशिदा में इन हाउस ईआरपी तैयार किया। यह सब करते हुए सुजय कुलकर्णी को उनके परिजनों- मामा श्री श्रीकृष्ण नाईक, चाचा सुशील कुलकर्णी भाई-भाभी, चाची, मामी, पत्नी सभी का पूरा सहयोग मिलता रहा। उनका पूरा परिवार आशिदा में कार्यरत है। सुजय कुलकर्णी अपने चाचा डा. सुधीर कुलकर्णी से विशेष रूप से प्रभावित हैं। जब भी उहापोह की स्थिति उत्पन्न होती, तो वे कहते, ’’डरना मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ।’’ इससे उन्हें बड़ा प्रोत्साहन मिलता।

कम्प्यूटर उद्योग में राम-लक्ष्मण की जोड़ी की तरह सुयश कुलकर्णी और सुजय कुलकर्णी आशिदा प्रा. लि. के हार्डवेयर और साफ्टवेयर टीम में ख्याति प्राप्त हैं। इनकी मेहनत, योजना और दूरदृष्टि की बदौलत ही आज आशिदा प्रा.लि. अंतरराष्ट्रीय कंपनी के रूप में पहचान पाने की ओर अठासर है। एक छोटी सी शुरूआत से इम्पोर्ट सबसिट्यूशन में आशिदा की उड़ान निर्यात में एक ऊंचाई प्राप्त कर रही है। आज आशिदा का कुल टर्नओवर 60 करोड़ रूपए का तथा निर्यात का कुल टर्नओवर 15 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। यह सब प्राप्त करने में सुजय कुलकर्णी को 10 वर्षों का अथक प्रयास और अनेक देशों के भ्रमण का अनुभव काम आया। उन्होंने अपने प्रयत्नों से आईईसी 61850 जैसे अंतरराष्ट्रीय साफ्टवेयर स्टैंडर्ड आई.एस.ओ. प्राप्त किया। यह जानकारी विशेष उपलब्धि है।

कार्य के अनुभव के साथ ही सुजय कुलकर्णी ने नई-नई खोज व अनुसंधान की सदैव जानकारी रखी। वर्ष 2010 में उन्होंने आई.आई.एम. अहमदाबाद से पंद्रह दिवसीय मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोठााम (एम डी पी) पूरा किया। यह उनकी लगन का परिचायक है। वे केवल आशिदा प्रा. लि. नहीं अपितु अन्य कंपनियों को भी अपने बहुमूल्य सुझाव से लाभ पहुंचाते हैं। इसी साल (वर्ष 2011) उनका बंगलुरु की सेंट्रल पावर रिसर्ट (सी.पी.आर.आई) की स्टार्ट ठिाड कमेटी में टेक्निकल एडवाइजर के पद पर चयन हुआ है। आशिदा प्रा.लि. में डायरेक्टर पद पर होते हुए उन्होंने स्टोर्स में खरीदी विभाग (परचेज डिपार्टमेंट) का महत्वपूर्ण दायित्व संभाल रखा है। उनकी अपनी प्रतिभा का परिचय उनके कार्य, व्यवहार, आचरण और संबंधों में पूर्णतया परिलक्षित होता है।

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