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समाज, संस्था और सरकार मिल कर करें नए भारत का निर्माण – गिरीश भाई शाह

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केवल सरकार देश की सारी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती। उसमें समाज को भी अपना योगदान देना होगा। इसलिए सरकार और सामाजिक संस्थाओं का समन्वय जरूरी है। इसके लिए गिरीश भाई लगातार प्रयासरत हैं।

छात्र – छात्राओं ने किया २५००० सूर्यनमस्कार

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विश्व सूर्यनमस्कार दिन एवं ‘रथसप्तमी’ के उपलक्ष्य में सामूहिक सूर्यनमस्कार अभियान का आयोजन किया गया. जिसमें पुणे क्षेत्र के १३ विद्यालयों के कुल १००० एवं १०० विशेष सामर्थ्यवान दिव्यांग छात्र – छात्राओं ने २५००० सूर्यनमस्कार कर एक भव्य नजारा पेश किया.

सूर्या फाउण्डेशन द्वारा खेलकूद के माध्यम से हो रहा युवा निर्माण

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सूर्या फाउण्डेशन आदर्श गांव योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष भारत यूथ क्लब के युवाओं की खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है।

आनंदयात्री प्रतिष्ठान

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.जो हो वृद्धों को अपनापन दें, उनके दुखों को समझे, उनके मन में समाज के प्रति यह विश्वास जगाए कि मानवता अभी भी जिंदा है। इसी उद्देश्य को सामने रखते हुए आनंदयात्री प्रतिष्ठान कार्य कर रहा है।

हर गांव बने ‘धर्मज’

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गांव को गोकुल बनाने का आसान तरीका है- गोचर को पुनर्जीवित करें। गोचर से पशुओं को चारा मिलेगा, पशुओं से दूध और गोबर मिलेगा, गोबर से ईंधन के रूप में कंडे मिलेंगे, खाद भी मिलेगी। पानी के लिए तालाबों को सफाई करें तो उसकी मिट्टी खेतों में काम आ जाएगी। इस तरह पानी, चारा, दूध, खाद सबकुछ गांव में ही मिल जाएगा। इसका नमूना देखना हो तो धर्मज आइये....

‘‘समस्त महाजन’’-सेवा कार्य

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जन सेवा कार्य को मूल उद्देश्य मानने वाली समस्त महाजन संस्था ने समय-समय पर राष्ट्र पर आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के समय महती योगदान दिया है. अगले १२ महीनों तक लगातार प्रत्येक अंक में उनके प्रमुख कार्यों का शाब्दिक विवेचन करने के क्रम के इस प्रथम भाग में संस्था के अध्यक्ष गिरीश भाई शहा ने हिंदी विवेक को महाराष्ट्र में हुए अकाल के समय किए गए कार्यों की चर्चा की. प्रस्तुत है उसका शाब्दिक अंकन..

संक्रांति पर्व

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संक्रांति का त्यौहार सामाजिक संबंध दृढ़ करने, आपस में मिलने जुलने, तनाव दूर कर, खुशियां फैलाने वाला त्यौहार है. यह पर्व केवल भारत ही नहीं, थाईलैंड, म्यांमार, कंबोडिया और श्रीलंका में भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है.

सामूहिक वृद्धि के गुणात्मक प्रयत्न – रिजवान आड़तिया फाउंडेशन

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उन्होंने समाज की सामान्य आवश्यकताओं अर्थात् भरण-पोषण और विकास दोनों में सहयोग हेतु प्रदाता के तौर पर कार्य किया । रिजवान आड़तिया फाउंडेशन गठन के साथ ही समाज की क्षमता बढ़ाने जैसे और योग्य बनाने की दिशा में परिश्रम करना शुरू किया । वैश्विक स्तर पर सर्व समभाव

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