असहाय पशुओं को चाहिए सहारा

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भारत में पशुओं की संख्या में निरंतर बढ़ोत्तरी होती जा रही है पर उस अनुपात में पशुचिकित्सकों की संख्या काफी कम है। लोगों का जीवन स्तर विकसित होने के साथ ही विगत दो दशकों से देश में कुत्ते, बिल्लियों समेत अन्य जानवर पालने का भी शौक बढ़ा है। इसलिए देशभर में पशु चिकित्सकों की नई पीढ़ी तैयार किए जाने की आवश्यकता है। 

सैनिक निर्माण करनेवाली संस्था-डॉ. दिलीप बेलगावकर

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स्वतंत्रता के 10 वर्ष पूर्व से ही एक संस्था भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिये, एक सशक्त सेना के निर्माण के लिए सैनिक तैयार कर रही है, उस संस्था का नाम है, भोंसला मिलिट्री स्कूल। प्रस्तुत है देश की सुरक्षा व्यवस्था तथा भोंसला मिलिट्री स्कूल की भविष्यकालीन योजनाओं के संदर्भ…

गौशाला-पांजरापोल की आधुनिक आदर्श व्यवस्था

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 अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि गोशाला-पांजरापोल की आधुनिक आदर्श व्यवस्था कैसे की जाए और उन्हें स्वावलंबी व आत्मनिर्भर कैसे बनाया जाए? जिससे उन्हें गोशाला संचालन में आसानी हो और सहजता से वह गोसेवा कर पाए। जिसमें सभी प्रकार की अत्याधुनिक सुख सुविधा भी मौजूद हो।

समस्त महाजन की आकाशगंगा का धु्रव तारा – परेश शाह

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भगवान की कृपा से समस्त महाजन संस्था में बड़ी संख्या में परोपकारी सज्जनों की लम्बी श्रृंखला है और उनमें से ही एक चमकता सितारा है समाजसेवी परेशभाई शाह, जो अपने सामाजिक कार्यों से पृथ्वी रूपी आकाशगंगा में ध्रुव तारे की तरह चमक-दमक रहे हैं।

गढ़वाल भ्रातृ मंडल, मुंबई 92 सालों का गौरवशाली सफर

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बांद्रा टर्मिनस, मुंबई से रामनगर उत्तराखंड जानेवाली ट्रेन के समय में मंडल के रेल्वे प्रकोष्ठ के संयोजक बाल कृष्ण शर्मा के प्रयत्नों से रूट में कटौती करके 10 घंटे की कमी की गई। यह मंडल के इतिहास में एक विशिष्ट उपलब्धि रही। साहित्य, कला, संगीत, खेल एवं समाजसेवा आदि क्षेत्र में विशिष्ट योगदान करनेवाले उत्तराखंड के मनीषियों को ‘गढ़रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित करना ‘मंडल’ की परंपरा का हिस्सा रहा है।

गौ रक्षा मेरा धर्म

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श्री मनोहरलाल जुयाल की जीवन यात्रा सचमुच में बहुत अद्भुत है। देहरादून में आकर व्यापार की तरफ रुख किया। अपनी मेहनत और लगन से धीरे-धीरे उन्होंने तरक्की करनी शुरू की और आज वे देहरादून के नामचीन होटलों के मालिक हैं। उन्होंने मायादेवी एज्युकेशन फाउंडेशन के माध्यम से उच्च विद्या का प्रसार करने में अपना योगदान दिया हैं। साथ में गौ भक्त मनोहरलाल यह उनकी विशेष पहचान हैं।

दान से बनी विद्या की राजधानी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय

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‘नवाब साहब क्षमा करें। मैं काशी से चलकर आपके पास आया हूूं। आपकी रियासत का पूरी दुनिया में नाम है। मैं अगर यहां से खाली हाथ गया तो आप की तौहीन होगी। इसीलिए सोचा की आप के जूतों को नीलाम करके कुछ धन एकत्र करलूं और उसके बाद काशी जाऊं, जिससे मैं काशी की प्रजा को बता सकूं कि हैदराबाद से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के लिए दान मिला है।’- महामना मालवीय

गाय: भारतीय संस्कृति का प्रतीक

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अनेक राज्यों में गाय और गोवंश संरक्षण के संबंध में अलग-अलग कानून बने हुए है इसलिए गोरक्षा के संबंध में ‘एक देश एक कानून’ की मांग तेजी से देश में होने लगी है। गोवंश रक्षा में अग्रणी भूमिका निभानेवाली समस्त महाजन संस्था इस विषय को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता अभियान भी चला रही है। संस्था का कहना है कि जैसे नेपाल के संविधान ने देश की बहुसंख्यक हिन्दू जनता की आस्था का सम्मान करते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया है, उसी तर्ज पर भारत में भी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए।

रॉयल इंडियन एयरफोर्स से इंडियन एयरफोर्स तक का सफर

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''नभः स्पृशं दीप्तम'' भारतीय वायु सेना की स्थापना आजादी से पहले ही हो चुकी थी लेकिन तब ब्रिटिश सरकार की तरफ से उसे रॉयल इंडियन एयरफोर्स नाम दिया गया था जबकि आजादी के बाद रॉयल शब्द को निकाल दिया गया और यह इंडियन एयरफोर्स यानी भारतीय वायुसेना बन गयी। 8…

डाकघर की स्थापना और टिकट का इतिहास

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भारत में डाक सेवा करीब 171 साल पुरानी है और यह ब्रिटिश राज के समय से लगातार सेवा देती आ रही है। डाकघर की स्थापना 1 अप्रैल 1854 को हुई थी लेकिन उसकी सेवाएं 1 अक्टूबर 1854 से शुरू हुई। यह काल ब्रिटिश सरकार का था और उनके अंतर्गत पहले से ही…

प्राकृतिक आपदा में ‘समस्त महाजन’ के राहत कार्य

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समस्त महाजन पिछले दो दशक से विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। जैसे- जीव दया, पशु कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, मानव सेवा, गौ संरक्षण, ऑर्गेनिक खेती, संसाधन विकास, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन एवं बचाव कार्य आज में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। संस्था के योगदान को देखते हुए उसे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा भी जा चुका है।

कोरोना काल में अंकित ग्राम द्वारा की गई सेवा

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निश्चित रूप से इस मार्ग पर चलने से चित्त की प्रसन्नता और परमात्मा के सानिध्य का अनुभव होता है कई एडजेस्टमेंट वाले दानदाता छूट जाते है, तो परमात्मा की कृपा से अनेक कठिनाईयों के बाद नई व्यवस्था हो जाती है। संस्था ने 35 एसी के समय भी किसी प्रकार का एडजस्टमेंट नही किया परिणाम स्वरूप 50 करोड़ के एकझम्शन में से 1.50 करोड़ भी एकत्र नही कर सके।

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