अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक पर छिड़ी बहस

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  जब से कश्मीर फाइल्स फिल्म रिलीज हुई है तब से बहुत सारे प्रश्न सामाजिक विमर्श में उभर आए हैं तथा आम जनमानस उन प्रश्नों के उत्तर की तलाश कर रहा है । एक प्रश्न यह भी है कि अल्पसंख्यकों को विशेष अधिकार क्यों , भारत में अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक…

स्व की आध्यात्मिकता से राष्ट्रीय एकात्मकता और अखंडता आयेगी – डॉ. मोहन भागवत जी

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हम स्वाधीन हुये लेकिन अभी भी हम स्वतंत्र होने की प्रक्रिया में हैं।  इस स्वाधीनता के लिये सभी वर्ग क्षेत्र समाज के लोगों ने त्याग व् बलिदान दिया और स्वाधीनता को लेकर सबके मन  में समान भाव था. जो बातें कुंद्रा डिक्लेरेशन में सन 1830 में कही गई थी वही…

संघ प्रवाही है अत: प्रासंगिक है

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सामान्य तौर पर लोग इस वटवृक्ष को संघ परिवार भी कहते हैं, परंतु संघ का स्वयं का मानना है कि ऐसा कोई संगठनों का समूह उसने तैयार नहीं किया जिसे संघ परिवार कहा जाए। संघ समाज में एक संगठन नहीं है बल्कि समाज का संगठन करने वाला एक सतत प्रवाह है। इसीलिए समय के साथ-साथ इसकी प्रासंगिकता भी बढ़ती रही है।

जयंती: युगों युगों तक अमर रहेंगे महाराजा अग्रसेन

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भारतवर्ष में ऐसे तमाम देवी-देवताओं और राजाओं ने जन्म लिया है जिन्हे युगों युगो तक याद किया जाता रहेगा। ऐसे युगान्तर राजा के बताए मार्ग पर लोग आज भी चल रहे हैं। ऐसे लोगों को उनके सेवाभाव, प्रेम और उनकी नीति के लिए जाना जाता है। महाराजा अग्रसेन भी ऐसे…

सिद्धि और साधना का पर्व शारदीय नवरात्र

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केरल में नवरात्रि देवी सरस्वती के सम्मान के रूप में  मनायी जाती है। इन नौ दिनों को केरल में सबसे शुभ माना जाता है। तमिलनाडु में नवरात्रि के समय गुड़ियों का एक प्रसिद्ध त्योहार मनाया जाता है, जिसे बोम्मई कोलू कहा जाता है।

दाह-क्रिया एवं श्राद्धकर्म का विज्ञान

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मादा कौवा सावन-भादों यानी अगस्त-सितंबर में अंडे देती है। इन्हीं माहों में श्राद्ध पक्ष पड़ता है इसलिए ऋषि-मुनियों ने कौवों को पौष्टिक आहार खिलाने की परंपरा श्राद्ध पक्ष से जोड़ दी, जो आज भी प्रचलन में है। दरअसल इस मान्यता की पृष्ठभूमि में बरगद और पीपल वृक्षों की सुरक्षा जुड़ी है, जिससे मनुष्य को 24 घंटे ऑक्सीजन मिलती रहे।

संवेदनशील भारत की सेवागाथा

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कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए प्रधानमंत्री ने रविवार 22 मार्च 2020 को जनता कर्फ़्यू का आवाहन किया और 25 मार्च को सारे देश में लॉकडाउन की घोषणा हुई।

महारानी दुर्गावती ने जब अकबर को दिया था लोहा, जबलपुर में आज भी होती है इस वीरांगना की पूजा

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  आज हमारे देश की सभ्यता और संस्कृति बची है तो उसके लिए कुछ लोगों को अपना बलिदान देना पड़ा था जिसमें एक नाम महारानी दुर्गावती का भी है। महारानी ने अपने राज्य, देश और आत्मसम्मान के लिए शस्त्र धारण किया और अंतिम समय तक मुगलों से लड़ते हुए अमरत्व…

वैश्विक हिंदुत्व ख़त्म करने का षड़यंत्र

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इनके इस पूरे क्रियाकलाप को यदि आप टुकड़ों में देखेंगे तो वामपंथ समझ में नहीं आएगा परंतु जब अनेक घटनाओं, अलग-अलग परिदृश्य को एकसाथ जोड़कर देखेंगे तो समझ आएगा कि जो स्वयं पर सिविल सोसाइटी लबादा ओढ़े हैं। उस लबादे के पीछे कबीलाई या कहिए वहशी जानवर छिपे हैं। ये सभ्य समाज का हिस्सा नहीं है।

आधुनिक विज्ञान के अनुकूल वैदिक ज्ञान…

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हम भारतीय के रूप में महान संतों और हमारे पूर्वजों द्वारा लिखे गए पवित्र वेदों और हिंदू संस्कृति के ग्रंथों के गहरे और वास्तविक अर्थ को समझने में विफल रहे हैं।  मनोवैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो हमारे प्राचीन काल के किसी भी ज्ञान को कहानी के माध्यम से दिखाने…

जयंती विशेष: लक्ष्मणराव इनामदार से नरेंद्र मोदी को क्यों है इतना लगाव?

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संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक उन्हें 'वकील साहब' के नाम से जानता था जबकि संघ के बाहर के लोग उन्हें लक्ष्मणराव इनामदार के नाम से जानते थे। वह बहुत ही सरल जीवन व्यतीत करते थे और पूरा जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया था, वैसे तो उन्होंने बहुत सारे स्वयंसेवकों…

बाबुल सुप्रियो ने TMC के साथ शुरु की नई पारी, लेकिन क्यों छोड़ी BJP?

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राजनीति में एक कहावत है कि यहां कोई ना दोस्त होता है और ना ही कोई दुश्मन, समय सभी को दोस्त और दुश्मन बदलने का मौका देता रहता है। वह एक अलग दौर था जब लोग देश या पार्टी के लिए काम करते थे लेकिन वह उन लोगों के साथ…

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