भारत-चीन वार्ता से अलग चीन फिर से सीमा पर बढ़ा रहा सैनिक!

  • भारत-चीन सीमा विवाद अब भी अनसुलझा
  • दोनों देशों के सैन्य अधिकारी लगातार कर रहे बैठक
  • चीन ने कुछ सीमावर्ती इलाकों मे बढ़ाई सेना
  • भारत ने भी चीन के खिलाफ तैनात किया टैंक
 
चीन एक तरफ भारत के साथ बैठक कर सीमा विवाद को सुलझाने का प्रयास कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ सीमा पर सैनिकों की संख्या भी लगातार बढाते जा रहा है वैसे यह कोई पहली बार नही है जब चीन अपने दोगलेपन का प्रमाण दे रहा है इससे पहले भी सन 1962 में भी चीन ने भारत के साथ दोस्ती का नाटक किया और फिर भारत पर हमला कर दिया। भारत भी उन इलाकों में सेना की संख्या बढ़ाना शुरु कर दिया है जहां चीन गुस्ताखी करने की कोशिश कर रहा है भारतीय सेना की तरफ से भारी वाले टैंक और मिसाइल भी तैयार की गयी है जिससे अगर चीन कोई भी हरकत करता है तो उसका मुंह तोड़ जवाब दिया जा सके हालांकि जानकारों की मानें तो भारत की तरफ से तैनात टैंक और सेना को देखकर चीन कोई भी कदम उठाने से पहले कई बार सोचना होगा। भारत ने डीबीओ और डेपसांग के मैदानी इलाकों में इन टैंकों की तैनाती की है इन इलाकों में चीन का कुछ काम भी चल रहा है जिससे रोकना भी भारत का मकसद है। 
 
चीन कई सालों से भारत की सीमा के नज़दीक तक सड़क का निर्माण करना चाहता है क्योंकि अगर भविष्य में युद्ध होता है तो चीन को इसका पूरा फायदा मिल सकेगा हालांकि चीन ने सड़क निर्माण को लेकर यह अफ़वाह फैलाई थी कि इस सड़क निर्माण से दोनों देशों को व्यापार करने में आसानी होगी। चीन का इतिहास रहा है कि वह खुद को सर्वशक्तिशाली बनाने पर तुला हुआ है और इसके लिए वह कूटनीति का सहारा लेता है कमजोर देशों को पहले मदद देता है और फिर उसको अपने कब्ज़े में कर लेता है।  
भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध अब भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है और दोनों देशों के बीच बैठकें लगातार जारी है। भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद से सीमा पर हालात स्थिर हुए है लेकिन विवाद अब भी पूरी तरह से सुलझा नही है। सेना अधिकारियों के बीच हुई रविवार को आखिरी बैठक में एलएसी पर तनाव को कम करने को लेकर चर्चा की गयी। सेना के कमांडर स्तर की यह बैठक करीब 11 घंटे तक चली जिस पर भारत की तरफ से कहा गया कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल से चीन को सेना पीछे हटानी चाहिए और सीमा पर तनाव कर करना चाहिए इससे दोनों देशों को फायदा होगा। इससे पहले भी भारत और चीन के सेना स्तर पर चार और बैठकें हो चुकी है और यह बैठकों का सिलसिला अब भी जारी रहने वाला है क्योंकि चीन की तरफ से सकारात्मक परिणाम कम देखने को मिल रहे है।

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